महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद के तत्वाधान में आज वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ ओमकार सिंह द्वारा सामाजिक एवं ग्रामीण उद्यमिता विषय पर कार्यशाला का दीप प्रज्वलन कर उद्घाटन किया गया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि भारत की 70% जनसंख्या गावों में रहती है। लेकिन गांव में रोजगार का अभाव होने के कारण गांवों से लोग शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है। प्रायः देखा गया है कि शहरों में इन ग्रामीणों का रोजगार के क्षेत्र में शोषण का शिकार होना पड़ता है। एक तो इनको कम वेतन मिलता है दूसरा 31 से 40 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने पर इनको नौकरी से निकाल दिया जाता है। जिससे पुन: उनके सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो जाता है। इसी प्रकार की चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए उद्यमिता ही एक मात्र विकल्प है, जिससे यह ग्रामीण अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हुए अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कराने में सक्षम होते हैं। साथ ही, अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक विरासत छोड़कर के जाते हैं। इसके लिए उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि छात्रों के बीच में स्वयं सहायता समूह स्थापित करते हुए अपने चुने हुए व्यवसाय चुनकर पढ़ते समय शिक्षकों के सानिध्य में क्रियाकलाप करने से ना केवल उनका अनुभव बढ़ेगा। व्यवसाय में आने वाली चुनौतियां एवं उन चुनौतियों के समाधान ढूंढ कर एक परिपक्व व्यवसाई के रूप में स्वयं को परिवर्तित कर सकेंगे।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद के रिसोर्स परसन डॉ संजय कुमार अग्रवाल ने कार्यशाला के मुख्य वक्ता के रूप मे कुलपति महोदय के बात का समर्थन करते हुए कहा कि परिषद के ग्रामीण उद्यमिता केंद्र के मिशन और विजन से प्रतिभागियों का परिचय कराते हुए ग्रामीण उद्यमिता केंद्र में होने वाली गतिविधियों से राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने भारत सरकार के द्वारा चलाई जा रही एक जिला एक उत्पाद योजना मैं अपने जिले के उत्पाद में उत्पादन शुरू कर अपने भविष्य का निर्माण कर सकते हैं

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ डी एस गंगवार ने प्रतिभागियों को और प्रेस को ग्रामीण उद्यमिता के महत्व को समझाया एवं उन्नत भारत अभियान तथा ग्राम अभिग्रहण योजना के अंतर्गत किये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों से अवगत कराया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों के शिक्षकों ने बी प्रतिभाग किया जिन्होंने अपने अपने संस्थानों में ग्रामीण उद्यमिता केंद्र स्थापित कर परिषद के मिशन एंड विजन को छात्रों के बीच में ले जाने का संकल्प लिया । विश्र्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक गणेश खंडूरी ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापन किया और प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को प्रासंगिक एवं समीचीन बताते हुए इस को नई शिक्षा नीति के प्रारूप के अनुसार बताया। इस कार्यक्रम में डा संदीप नेगी, डा विशाल रमोला, डा राहुल बहुगुणा, संगीता ध्यानी, मोनिका गुप्ता, पूजा सेमवाल आदि उपस्थित रहे।

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