राष्ट्रीय जंगल एवं प्रकृति बचाओ अभियान भारत देश के विभिन्न राज्यों में प्रकृति सेवा, संरक्षण एवं जैव विविधता को बचाने हेतु देश में कार्य कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे पर्यावरण प्रेमियों के माध्यम से ज्ञात हुआ कि गांव मोहम्मदपुर देवमल जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश मैं स्थान बड़ा बिश्नोई मंदिर के प्रांगण में लगभग 30 साल पुराना पीपल का पेड़ लगा हुआ था जिसको मंदिर की कमेटी के किसी पदाधिकारी द्वारा कटा गया है जबकि विश्नोई समाज के साथ-साथ अन्य समाज के लोगों और हिंदू मान्यता के अनुसार पीपल में देवी देवताओं का निवास माना जाता है अतः वह देव वृक्ष है जहां पर लोग दीप जलाकर जल चढ़ाते हैं स्थानीय लोगों के साथ साथ देशभर मैं कार्य कर रहे बिश्नोई समाज के साथ ही पर्यावरणविद प्रेमी और संगठन के लोग मैं काफी दुख प्रकट किया है गौरतलब है कि 1730 में राजस्थान के जोधपुर जिले के खेजड़ली नामक स्थान पर जोधपुर के महाराजा द्वारा हरे पेड़ों को काटने से बचाने के लिए विश्नोई समाज की पूर्वज मां अमृता देवी विश्नोई ने अपनी तीन बेटियों आंसू,रतनी और भागों के साथ अपने प्राण त्याग दिए थे उसके साथ ही 363 से अधिक अन्य बिश्नोई खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपना बलिदान दे दिया बड़ा दुख हुआ कि हम अपने पूर्वजों के द्वारा दी गई विरासत और हमारी प्राणवायु प्रकृति को बचाने में कमजोर साबित हो रहे हैं संबंधित कृत करने वाले को इस कार्य कि समाज से माफी मांग कर इसके वैकल्पिक तौर पर गांव में 21 पौधारोपण कर उसका संरक्षण करें और जब तक कि वह पेड़ अपनी युवावस्था में ना आए उसकी देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित की होगी। अन्यथा की स्थिति में इतिहास में बिश्नोई समाज का नाम पेड़ काटने वालों की श्रेणी में भी रखा जाएगा इस कलंक को मिटाने के लिए आपको इस कार्य को स्वीकार करना चाहिए। ज्ञात सूत्रों से पता चला की वहा की कमेटी है वो इसको छुपाने में लगी हुई है किसी के द्वारा फेसबुक पोस्ट द्वारा दर्शाया गया था की ये घिनौना कार्य वहा किया गया है लेकिन वो पोस्ट भी किसी के दवाब में डिलीट कर दी गई है हमने अभी कुछ समय पहले को रोना काल देखा है जिसमें कई लोगों की जानें गई हैं और हमें यह ज्ञात है कि एक पीपल का पेड़ ही ऐसा है जो 24 घंटे ऑक्सीजन पैदा करता है उसके बावजूद भी इस तरह का कार्य जो तथाकथित लोगों के द्वारा किया गया है बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि आज के समय में यह कौन नहीं जानता कि पेड़ों का हमारी जिंदगी में कितना महत्व और खासकर वो इंसान जो लोग पर्यावरण के लिए अपनी जान भी निछावर कर देते हैं गुरु जंभेश्वर भगवान द्वारा दिए गए 29 नियमों में भी यह दर्शाया गया है की एक पेड़ हमारे लिए कितना जरूरी है और पेड़ हमें तो बहुत कुछ दे ही रहा है उसके साथ-साथ उस पेड़ से कई बेजुबान पशु पक्षियों का जीवन चल रहा हो गुरु महाराज द्वारा दिए गए कुछ उदाहरणों में एक उदहारण ये है की सिर साठे रुक रहे तो भी सस्तो जान अर्थात अगर एक पेड़ को बचाने के लिए हमें अपना सिर भी कुर्बान करना पड़े तो भी वह सस्ता सोदा है इन सब बातों को पता होने के बावजूद भी बिश्नोई समाज से संबंधित लोग अगर इस तरह की हरकतों को अंजाम देंगे तो उनके समाज में जो पूर्वज रहे हैं जिन्होंने पेड़ों को काटने से बचाने के लिए अपना बलिदान दिया है उन पर भी सवाल उठने सुरु हो जायेगे।

राष्ट्रीय जंगल बचाओ अभियान एडमिन वॉल FB

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