दूध नहीं जहर पीता है इंडिया, उत्पादन 14 करोड़ लीटर लेकिन खपत 64 करोड़ लीटर
WHO की चेतावनी- बंद नही हुई मिलावट तो 87% भारतीयों को 2025 तक होगा कैंसर
एनीमल वेलफेयर बोर्ड के सदस्य मोहन सिंह अहलूवालिया के मुताबिक, देश में बिकने वाला 68.7 फीसदी दूध और दूध से बना प्रोडक्ट मिलावटी है। यह फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ओर से तय मानकों से कहीं भी मेल नहीं खाता है।
हर वो चीज जो पैकेट बंद है वो या तो केमिकल युक्त है या मिलावटी सरकारें केवल सत्ता और चुनाव जीतने की फिराक में हैं। गौर तलब है चुनावी बजट आपकी सुरक्षा के बजट से ज्यादा है और चुनाव हार दो साल बाद देश में कहीं न कहीं होते हैं । तंत्र केवल मंत्री नेता की ताजपोशी पर ही व्यस्त रहता है या अपराध नियंत्रण या जांच में सामाजिक सरोकार से कोई मतलब नहीं ।
मिलावटी या खाद्य सामग्री की जांच केवल शिकायत पर या घटना घटने पर होती है कभी सख्त सजा नही मुकर्रर हुई इन अपराधों में आखिर क्यों नही हुई जिसका सरकार के पास कोई जवाब नही ।
आज लंपी रोग से ग्राषित गौ वंश बड़ी संख्या में मर रहे किसीने सोचा की यह गौ वंश दूध के रास्ते इस बीमारी को मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर रहे । कुछ समय बाद यह महामारी बाद इंसानी शरीर में प्रवेश कर मानव की जान लेगी तब मेडिकल अपना व्यापार का अवसर भुना लेगा ।
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