13वीं सदी तक हिंद महासागर पर भारत का दबदबा रहा था। और शायद इसी दबदबे के चलते ये महासागर “हिंद महासागर” कहलाया जाने लगा। कारोबार के लिए भारतीय इसी समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया करते थे ।लेकिन बाद में भारत का इसमे दबदबा कम होता रहा…मुगलों के काल में समुद्री मामलों पर खास ध्यान नहीं दिया गया…नतीजा ये हुआ कि अरबों का इस पर एक तरह से एकाधिकार हो गया। 2005 से पहले तक हमारे पास वाॅरशिप ग्रेड स्टील नही थी। 2005 में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने वॉरशिप ग्रेड स्टील का निर्माण किया,ताकि हम स्वदेशी विमानवाहक पोत बना सके । 2006 में यूपीए सरकार ने स्वदेशी विमानवाहक बनाने की योजना बनाई और इस पर काम शुरू हुआ। 2009 में रक्षा मंत्री थें एके एंटनी जिन्होने इसका औपचारिक उद्घाटन भी किया था। और 2013 में उन्होंने ही इसे लॉन्च भी कर दिया था। 2015 से 2022 यानि आज तक इसके इतने लंबे ट्रायल क्यो किए गये इस बात का जवाब सरकार दे सकती हैं कि इसके पीछे क्या वजह थी। ट्रायल पर ट्रायल चलते रहें और इसकी किमत 10000 हजार करोड़ से बढ़कर लगभग 25000 हजार करोड़ तक पहुंच गई।हालाकि हमारे पास INS विक्मादित्य पहले से मौजूद हैं। लेकिन आज एक लंबे ट्रायल के बाद ये INS भी नौसेना में शामिल हो गया और इसी के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल भी हो गया है, जिसके पास अपना विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता है। हां अगर चौकसी,मौकसी,मोदी जो लाखो करोड़ो रूपया देश का लेकर भाग गये हैं। उस पैसे का सही इस्तमाल होता और इन भागने वालो की चैकसी की जाती तो आप अंदाजा लगा लिजिए कि आज देश के पास ऐसे कितने INS विक्रांत हमारी समुन्द्री सीमाओ की चौकिसी के लिए तैनात रहते। दो दशक की सामूहिक मेहनत का ही ये नतीजा है कि ये शानदार उपलब्धि हमें प्राप्त हुई। भारतीय नौसेना, नौसेना डिजाइन ब्यूरो व कोचीन शिपयार्ड को बहुत-बहुत बधाई। देश की इस उपलब्धि पर सभी भारतीयों को गर्व है।

लेखक -सुनील कुमार

Tagged in : #auto #ऑटोमोबाइल #ऑटोमोबाइलबाजार #गाड़ी #car #birds#environment #CM-UP #CMbhupeshbaghel #CMUK #CMUP #congress

Categorized in : All News देश