देहरादून। सचिवालय से स्वर्ग रक्षक भर्ती पेपर लोक में पेपर छापने वाली कंपनी आरएमएस टेक्नी सॉल्यूशंस के मालिक की गिरफ्तारी के बाद आयोग कटघरे में है। सूत्रों की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि आयोग बार-बार पेपर छपवाने का काम एक ही कंपनी को दे रहा था।

गौर तलब बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार के नैपकिन पर पेपर के उत्तर लिखे होने की आशंका ने इतना बड़ा खुलासा किया आज उत्तराखंड की राज्य गठन होने के बाद से सभी भर्तियों की जांच मांग आग बन कर पूरे प्रदेश में फैल गई ।

![]बॉबी पंवार बेरोजगार संघ

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की दो भतियों में गिरफ्तार आरोपियों के बयान धीरे-धीरे आयोग को कटघरे में ले जा रहे है। एसटीएफ ने लखनऊ की आरएमएस कंपनी के जिस निर्देशक राजेश चौहान को गिरफ्तार किया है, आयोग के अधिकारियों को उन पर कुछ ज्यादा ही भरोसा था।

आयोग का दावा तो बाकि उन्होंने ऐसी चार कंपनियों पैनल की हुई थीं, लेकिन अब नए अधिकारियों ने कार्यभार संभालने के बाद पुराने रिकॉर्ड देखे तो वह भी हैरान रह गए। इक्का-दुक्का परीक्षाओं को छोड़ दें तो पिछले कई साल से ज्यादातर परीक्षा के पेपर इसी कंपनी के माध्यम से छपवाए जा रहे थे। ऐसे में पूर्व में हुई सभी भर्तियों पर भी अब आशंका के बादल छा गए हैं।

आयोग के पूर्व परीक्षा पेपर लीक घटनाक्रम से गहरे सदमे में है। जब उनसे बात की गई तो उन्होंने कहा कि हम पहाड़ के सोधे सारे लोग है किसी पर भरोसा कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह 2015 से परीक्षा नियंत्रकीरहेकार्यकाल में कभी ऐसा अंदेशा भी नहीं हुआ कि कंपनी के अधिकारी के कर्मचारी को है। अब इनसे आयोग कार्यालय से हो भर्ती का पेपर होने का उन्होंने कहा कि ओर तो कहीं भी प्रिंट करा सकते हैं। बार-बार एक ही कंपनी को पेपर छपने का ठेका देने के सवाल आयोग का है। उन्होंने कहा कि आरएमएस कंपनी का मालिक जिस तरह प्रेमपूर्वक काम किसी ओर से भी हो सकता है।

लखनऊ में तैनात होना था एक कर्मी जो पेपर पर निगरानी रखेगा ।इसके लिए आयोग के कर्मचारियों और अधिकारियों को भी इन सब कामों को निगरानी करनी थी।

जन संघर्ष मोर्चा के श्री रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि राज्य गठन के शुरुआती दौर 2001-2002 में महाधिवक्ता कार्यालय, मा. उच्च

न्यायालय नैनीताल में भर्तियों नियुक्तियों में हुई व्यापक धांधलियों यूजेवीएनएल में वर्ष 2002-2003 से लेकर 2006 तक हुई नियुक्तियों, यूकेएसएसएससी, विधानसभा में अब तक हुई सैकड़ों फर्जी नियुक्तियों, बैंक डोर के माध्यम से हुई हजारों नियुक्तियों आदि के मामलों में जिस प्रकार बड़े पैमाने पर धांधलियां हुई एवं कई मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में आवश्यक हो गया है कि राज्य गठन से लेकर आज तक हुई तमाम भर्तियों/ नियुक्तियों को सीबीआई जांच हो।

![]श्री रघुनाथ सिंह नेगी

आयोग की प्रिंटिंग प्रेस से ही शुरू हुआ पेपर लीक का खेल

देहरादून पेपर लीक के खेल को लखनऊ से नहीं रामपुर स्थित आयोग की प्रिंटिंग प्रेस में यह क्षेत्र पूरी तरह से सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में है इसलिए आसानी से आरएमएस टेक्नॉ के प्रेस को अपनी प्लान में ले लिया। हर काम देखरेख में हुआ यह भविष्य में दिखाने के लिए वो फुटेज को सुरक्षित भी रख लिया गया। मगर एक भी इसे देखने की जहमत ना कि यह किसने क्या हरकत की। या कुछ और है । लेकिन एसटीएफ जांच के दायरे में अब सब आ गए हैं। एसएसपी अजय सिंह ने कि इस मामले में क्लीन चिट किसी को नहीं दी है। इस मामले में अगर आयोग में किसी पर आपराधिक मामला नहीं मना तो ताप को रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसकी एक रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

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