आत्माराम त्रिपाठी की✍️से देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री ने हिम्मत दिखाते हुए स्वीकार किया था कि भ्रष्टाचार इतने चरम पर पहुंच चुका है कि देश के कोने-कोने में भेजे जाने वाला एक रूपया नीचे तक पहुंचते पहुंचते रूपया रूपया नहीं रह जाता वह पैसों में परिवर्तित हो जाता है। आज उनका यह कथन एक दम सत्य सावित हो रहा है जिस रूपए को देश के विकास के लिए भेजा जाता है उसमें कितनों के क्रूर पंजों द्वारा उस पर प्रहार होते हैं कि वह नीचे आते आते रुपए से पैसों की शक्ल ले लेता है और हम उम्मीद कर रहे हैं कि देश का विकास हो रहा है। भ्रष्टाचार का यह सिलसिला आज से नहीं है यह जबसे देश आजाद हुआ य इसके पहले से है यह कहना तो मुश्किल है लेकिन 60वर्ष के अपने खुद के अनुभव के आधार पर इतना तो कह सकते हैं कि इस भ्रष्टाचार का साम्राज्य 60वर्ष पहले से था जो आज समय के साथ साथ वटब्रक्ष का रूप धारण कर चुका है। सभी को अपने प्रभाव में ले चुका है जिधर देखो जंहा देखो भ्रष्टाचार का अधिपत्य स्थापित है। रूपया अपनी दुर्गति पर कराह उठा है जिसके हाथ में पहुंचता है वहीं उसे मसल रहा है निब्बू की तरह उसे निचोड़ रहा है गन्ने की तरह उसे कोल्हू में डाल कर उसका रस निकालकर उसको छिलको के रूप में फेंका जा रहा। और देश उम्मीद लगाए हैं की रूपया विकास कर रहा है। जबकि आज तक हर वजट में देश को घाटा दिखाया गया है लेकिन घाटा क्यों हो रहा है इस पर किसी ने बिचार नहीं किया और आज तो हर उपक्रमों का निजीकरण हो रहा है स्वयं की मशीनरी से विस्वास हट गया है यानी भ्रष्टाचार को छिपे रूप से देश ने स्वीकार किया कि इस घाटे के पीछे देश के हुक्मरान और यह मशीनरी है। अब तो इस भ्रष्टाचार की नींव इतनी मजबूत हो गई है कि ऊपर से लेकर निचले स्तर पर पहुंच गया है, ठहाके लगा रहा है अपनी कामयाबी पर वही रूपया चिल्ला रहा है कि इस ऊपर से निचले स्तर तक पहुंच चुके भ्रष्टाचार के ऊपर कब और कौन करेगा वार ?

Tagged in : #auto #ऑटोमोबाइल #ऑटोमोबाइलबाजार #गाड़ी #car #CM-UP #CMUP #congress #covid19 #crime #police #अपराध #डकैती #dig #अपराध #भृष्टाचार #स्वराज #संविधान

Categorized in : All News देश