![]आत्माराम त्रिपाठी लेखक वरिष्ठ पत्रकार
व्रक्षारोपण से अधिक उसके संरक्षण की जरूरत पर बल देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग के मुख्य सचिव सुधीर गर्ग आईएएस ने जाने अनजाने में उस पहलू पर अपनी पीड़ा व्यक्त कर दी य यूं कहें की अपनी बात कम शब्दों में लेकिन मजबूती के साथ वनमहोत्सव कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मंत्री जेपीएस राठौर की उपस्थिति में कहीं। मुख्य सचिव सुधीर गर्ग के कथन से हम भी सहमत हैं। हम आज चालिस वर्षों से देख रहे हैं बरसात ऋतु आते ही बनमहोत्सव कार्यक्रम बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं जिसमें विधायक, सांसद से लेकर मंत्री तक स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रदेश स्तर तक के आला अधिकारियों की सहभागिता होती है यही नहीं ग्रामीणों सहित ग्राम प्रधान भी इस कार्यक्रम में सिरकत करते हैं। जैसा की हर वर्ष होता है उसी तरह आज भी ब्रच्छा रोपण किया जाता है फोटो खिंचवाई जाती है अखबारों की सुर्खियां बनती है किन्तु क्या इससे हमारा धरती को हरा भरा बनाने का प्रयास सफल होता है तो हम कामना तो करते हैं की अभियान सफल हो पर हम यहां मुख्य सचिव सुधीर कुमार गर्ग के भावनाओं से इत्तेफाक रखते हैं की ब्रच्छा रोपण से अधिक आज उनके संरक्षण की जरूरत है सत्य भी यही है की इन चालिस वर्षों में अरबों खरबों रुपए की लागत से व्रक्षारोपड किया गया अगर ईमानदारी से इस व्यय एवं व्रक्षारोपण पर नजर डाली जाए तो इतने व्रक्षारोपड हुए की धरा दुल्हन की तरह सजी हुई नजर आती चारों तरफ हरियाली ही हरियाली दिखती वृक्षों मे कोयल की मधुर ध्वनि सुनाई देती पर यंहा तो एक दम उल्टा है कितने व्रच्छ कहां कहां रोपित किए गए किसी को भी जानकारी नहीं उनमें कितने। सुरक्षित है यह तो किसी को भी जानकारी नहीं है नहीं किसी ने जानकारी करने की कोशिश की।नहीं आगे कोशिश की गई तो ऐसे में धरती कैसे हरी भरी होगी यह अपने आप में एक बड़ा प्रस्न है। इसलिए हम मुख्य सचिव सुधीर गर्ग की बात से पूर्ण रूप से सहमत है की व्रक्षारोपण से अधिक उनके संरक्षण की जरूरत है जिसका आज अकाल देखने को मिल रहा है। और जब तक ब्रच्छो को सही तरीके से संरक्षण नहीं मिलता तब तक वनमहोत्सव कार्यक्रम एक बेइमानी जैसे लगते हैं।
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