दिनांक 21/06/22 को ऑनलाइन बैठक का आयोजन
सिर सांठे रुंख रहे तो भी सस्तो जांण* अर्थात एक वृक्ष बचाने के लिए अगर हमें अपना सिर भी कटवाना पड़े तो वह सौदा महंगा नहीं है इस अवधारणा को आदर्श मानकर राष्ट्रीय जंगल एवं प्रकृति बचाओ अभियान भारत ने राजस्थान के जोधपुर जिले के फलोदी के बाप उपखंड क्षेत्र स्थित बड़ी सीड गांव में सोलर प्लांट लगाने के लिए हो रही खेजड़ी के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के संबंध में ऑनलाइन मीटिंग हुई।
जिसमें लगभग 15 राज्यों के पर्यावरण प्रेमी और संगठन जुड़े मीटिंग करने का मेन उद्देश्य था सरकार ने बड़ी सीड गांव में सोलर प्लांट लगाने के लिए सरकार ने जमीन दी थी जिसमें वहां खेजड़ी के पेड़ भी थे, प्राइवेट कंपनियों ने बिना किसी को जानकारी दिए वह पेड़ काट दिए लगभग 8 हजार से 10 हजार के करीब पेड़ काटे और उन पेड़ों की लकड़ियों को लगभग 10 फुट गहरे गड्ढे में दबा दिया।
जब स्थानीय लोगों को पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया । खेजड़ी का पेड़ राजस्थान का राज्य वृक्ष है अगर राज्य वृक्ष ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो हम किस को सुरक्षित रख पाएंगे एक तरफ ग्रीन एनर्जी की बात होती है सोलर प्लांट लगाने के लिए कि ग्रीन एनर्जी प्लांट है और दूसरी तरफ हरे भरे लगभग 80 साल के पेड़ों को काट दिया जाता है जैसा कि अवगत है आज से लगभग 300 साल पहले जोधपुर शहर के खेजड़ली गांव में खेजड़ी के पेड़ को बचाने के लिए 363 बिश्नोई समाज के लोगों ने बलिदान दिया था यह विश्व का इकलौता पर्यावरण के लिए बलिदान था जिसमें पेड़ों को बचाने के लिए बलिदान हुए। यह आंदोलन अमर शहीद मां अमृता देवी बिश्नोई और उनकी दो पुत्री के साथ 363 लोगो का बलिदान था उस समय वहां के राजा अभय सिंह थे उन्होंने अपने महल को बनवाने के लिए लकड़ी लाने के लिए अपने मंत्री से कहा और मंत्री खेजड़ी गांव में चला गया अपनी सेना के साथ और जैसे ही वहां पेड़ काटने की आवाज आई तो मां अमृता देवी विश्नोई वहां पहुंची और उनको मना किया मना करने के बाद भी जब वह नहीं माने तो मां अमृता देवी विश्नोई ने कहा सिर सांठे रुंख रहे तो भी सस्तो जांण अर्थात एक वृक्ष बचाने के लिए अगर हमें अपना सिर भी कटवाना पड़े तो वह सौदा महंगा नहीं है ऐसे करते करते उनकी दोनों बेटियां सहित 11 सितंबर 1730 को 363 पर्यावरण प्रेमियों ने अपना बलिदान दिया। बिश्नोई समाज पहले से ही जीव प्रेमी और पर्यावरण प्रेमी रहा है बिश्नोई समाज को गुरु जंभेश्वर भगवान जी ने 29 नियम बताकर बिश्नोई समाज की स्थापना की और उस 29 नियमों में पर्यावरण और जीव रक्षा करना हमारा धर्म है ये भी बताया। मीटिंग से जुड़े अलग-अलग राज्यों के पर्यावरण प्रेमियों ने अपने अपने विचार रखें जिसमें कहा गया कि जैसे हम सभी पर्यावरण योद्धा बक्सवाहा जंगल बचाओ अभियान के साथ जुड़े थे जहां 2 लाख 15 हजार पेड़ कटने थे और उसके बाद हसदेव अरण्य जंगलों को बचाने के लिए भी हम सभी जुड़े जहा लगभग 3 लाख पेड़ कटने थे आज दोनों ही प्रोजेक्ट को अनिश्चित काल के लिए रोका गया है वर्तमान में जब पता चला की राजस्थान में भी पेड़ों की कटाई हो रही है तो राष्ट्रीय जंगल एवं प्रकृति बचाओ अभियान भारत के साथ लगभग 15 राज्य और संगठनों ने यह आह्वान किया कि अगर राजस्थान सरकार ने यह पेड़ों की कटाई नहीं रोंकी या जिन्होंने यह विनाश कार्य किया है उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही नहीं की तो हम सभी अलग अलग राज्य के पर्यावरण प्रेमी राजस्थान धरने में शामिल होंगे । कई पर्यावरण प्रेमियों के विचार आए कि हमें पोस्टकार्ड अभियान चलाना चाहिए, कुछ पर्यावरण प्रेमियों के विचार आए कि हमें बच्चों द्वारा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालनी चाहिए, कुछ पर्यावरण प्रेमियों के विचार आए कि हम अलग-अलग राज्यों से ज्ञापन देना चाहिए, कुछ पर्यावरण प्रेमियों के विचार आए कि हमें अपने अपने राज्य से सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा इसका विरोध दर्ज कराना चाहिए,बहुत लोगों के विचार मीटिंग में आए मीटिंग का संचालन अनुराग विश्नोई द्वारा हुआ और धन्यवाद ज्ञापन राजेश यादव जी द्वारा किया गया।
मीटिंग में उपस्थित पूनम खन्ना,लीला पवार,रितिका गुप्ता,स्नेह सिंह,मोनिका बागरेचा,रजनीश बिश्नोई,नवीन बिश्नोई,कपिल कुमार,संजय नवादा,डॉ अशोक गुप्ता,मिथिलेश शर्मा,प्रदीप गुप्ता,राजेश यादव,कमलेश सिंह,अरविंद सिंह,सुरेंद्र बिश्नोई,प्रखर बिश्नोई,नवीन बिश्नोई,आनंद पटेल,नेपाल सिंह पाल,सुशील कुमार विश्नोई,कपिल कुमार,जय कृष्ण बिश्नोई,स्वर्ण बिश्नोई, दिनेश जानी,हरि कृष्ण बिश्नोई,मुकेश बोहरा,सतीश पाठक,मनोज कुमार, रामप्रकाश रवि,श्याम जी बिश्नोई,राजीव गोदारा विश्नोई,त्रिभुवन कुमार सिन्हा,प्रियांशु धारसे एवं अनुराग बिश्नोई उपस्थित रहे।
अनुराग विश्नोई राष्ट्रीय जंगल एवं प्रकृति बचाओ अभियान भारत
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