मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गॉंवों से पलायन जारी है।कभी वो समय था जिसमेँ कि भागम-भाग की दौड़ नहीं थी,ना ही कोई बीमार पड्ता था और ना ही इतनी प्रतिस्पर्धा किसी चीज/सरकारी नौकरी पाने की थी।
जंगल आय दिन कम होते जा रहे हैं,जंगली जानवरोँ का रुख खेतों की तरफ होने के कारण(उजाड) खेत बंज़र हो चुके हैं,गॉंव के निवासियों को अपने परिवार के भरण-पोषण और रोजगार के लिए गॉंवों से पलायन करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। अपना पैतृक गॉंव कोटला भी इसी की भेंट चढ़ गया है। थोडा सा सहयोग(सड़क सुविधा)अगर सरकार की तरफ से हो जाता है तो यह गॉंव को आबाद करने के लिये पुन: प्रयास किया जा सकता है। यहाँ पर लगभग 100 बीघा कृषि भूमि बंज़र पड़ी हुई है।
डोईवाला विधान सभा का यह गॉंव राजधानी से मात्र लगभग 25 किलोमीटर की दुरी और सिंधवाल गॉंव पुल से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गॉंव आज भी विकास की राह देख रहा है। यहाँ से आगे नाहीकलां,नाहीखुर्द,बडकोट,कैरवान गॉंव,सेमलसारी,जाकर,मौलीघेर आदि गॉंव पडते हैं।
आज से लगभग 25-30 वर्ष पूर्व थानों से पैदल माँ सुरकण्डा देवी के दर्शन के लिए कोटला,नाही,बडकोट,पसनी,बनाली,सतेली,सत्यों आदि गॉंवों से होते हुए पहुंचते थे। मैने भी खुद परिवार के साथ 2 बार पैदल यात्रा की है।
सूत्र महिपाल सिंह कृसाली देहरादून
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