प्रकृति के लिए पीपल और बरगद के पेड़ क्यों महत्वपूर्ण हैं *मिशन एक लाख पौधों के रोपण के संचालक और ग्रीन इंडिया परिवार रिसर्च फाउंडेशन भारत द्वारा *

The Best Environment award 2021 और सुभाषचंद्र बोस ग्रांट्रली अवार्ड और कई संस्थानों द्वारा दिए गए अवार्डो से सम्मानित: पीपल मैन रघुराज प्रताप सिंह हमीरपुर उत्तर प्रदेश। जन जागरूकता अभियान के माध्यम से शहरों और गाँवो में जाकर बता रहे हैं पीपल और बरगद के पेड़ प्रकृति के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं? पीपल का पेड़ 24 घंटे 100 %और बरगद 80% जीवनदायनी ऑक्सीजन देता हैं और सबसे ज्यादा कार्बनडाईऑक्साईट सोखता हैं • एक वर्ष में करीब 20 किलो धूल सोखता है। हर साल करीब 700 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है। *प्रतिवर्ष 20 टन कार्बन डायऑक्साइड को सोखता है।गर्मियों में एक बड़े पेड़ के नीचे औसतन चार डिग्री तक तापमान कम रहता है। 80 किलोग्राम पारा, लीथियम, लेड आदि जैसी जहरीले धातुओं के मिश्रण को सोखने की क्षमता। हर साल करीब 1 लाख वर्ग मीटर दूषित हवा फिल्टर करता है। घर के करीब एक पेड़ अर्कोस्टिक वॉल की तरह काम करता है। यानी शोर/ध्वनि को सोख लेता है। *आज 15 जून को दिल्ली से चलकर बुंदेलखंड के उरई शहर मंत्रा अकादमी के बच्चों को सम्बोधितकर उनको पीपल और बरगद के वृक्ष का महत्व बताया और प्रकृति के लिए उनका क्या महत्व हैं उसके बारे में विद्यार्थियों के बीच चर्चा की गई और उनको पीपल के और बरगद के पेड़ से क्या लाभ होते हैं और मानवीय जीवन में इन वृक्षो का क्या महत्व हैं किस प्रकार यह तापमान कम कर सकते हैं और जलवायु परिवर्तन से निपटने में इनका कितना योगदान हो सकता और ग्रीन हाउस गैस को कम करने में और स्वास्थ्य के क्षेत्र में इनका क्या योगदान हैं और बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को कम करने में इनका कितना योगदान हैं बढ़ते जल संकट के संरक्षण में इन पेड़ो का आज क्या महत्व हैं और यह आज क्यों जरूरी हैं यह आज से नहीं वैदिक काल से वेदों में इन वृक्षों का महत्व बताया गया हैं आज जो समाज में प्रचलित कई अवधारणाए व्याप्त हैं की वृक्षों में ईश्वर का वास होता हैं तो यह अवधारणाये हमारे महापुरुषों ने हमारे वंशजो ने इसलिए बनाई थी ताकि पर्यावरण और जंगलो को संरक्षित किया जा सकें और मानव जीवन के लिए एक स्वच्छ वातावरण का निर्माण किया जा सकें जिससे मानवीय जीवन सुखपूर्वक बिताया जा सकें और प्रकृति से सौहार्द बना रहे और आपस में मानव प्रकृति का भच्छक ना होकर प्रकृति रक्षक बने। तो मानव सभ्यता कायम रहेंगी और प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन के उद्देश्य को समझकर अपने कर्म करेगा और एक दूसरे के प्रति सम्मान और प्रकृति के लिए सम्मान और कायम कर सकेगा और मानव सभ्यता को आने वाले संकटो से खुद को और इस प्रकृति को बचा पायेगा। इन सभी चर्चाओ के बाद बच्चों को मिशन एक लाख पौधों के रोपण में जुलाई माह में ज्यादा से ज्यादा पौधों के रोपण के लिए पीपल मैन ने संकल्प दिलाया और पर्यावरण संरक्षण जल संरक्षण और प्लास्टिक के बहिष्कार का भी सभी बच्चों ने पीपल मैन के साथ संकल्प लिया और साथ में मंत्रा अकादमी उरई के संचालक श्री सुरेंद्र राठौर जीने भी बच्चों को सम्बोधित किया और उन्होंने बच्चों को बताया की शिक्षा के साथ साथ हमें पर्यावरण का भी संरक्षण करना होगा तभी हम अपने मानवीय जीवन में सफल हो पायेंगे और एक अच्छे चरित्र का निर्माण होगा जिससे राष्ट्र का निर्माण होगा। उसके बाद छात्रा शिवानी का जन्मदिन मनाया गया और सभी बच्चों ने शिवानी को जन्मदिन की ढेरसारी शुभकामनायें दी और फिर बच्चों ने अपनी अपनी बात कही और इस आने वाले बारिश में सभी बच्चों ने संकल्प लिया की हम ज्यादा से ज्यादा पीपल और वट के वृक्षों का रोपण करेंगे और कराएँगे और जन जागरूकता के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करेंगे। मिशन हमारा सहयोग आपका।

🌳🌳🌳पीपल मैन रघुराज प्रताप सिंह 🌳🌳🌳

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