भारत में वैश्यावृति” (REDLIGHT)
कल मेने भारत में वैश्यावृती को कानूनी रूप से मिली मान्यता पर एक लेख लिखने का वादा किया था लिजिए…. -कहते है “किसी के बाप से बदला लेना हो तो उसकी औलाद पर पैसे खर्च करना शुरू कर दिजिए…और किसी भी देश को अगर तोड़ना हो तो उस देश को नग्नता परोसना शुरू कर दीजिए और वैश्यावृति शुरू कपा दिजिए। फिर वहां का यूथ अपने बाप की भी नही सुनेगा… बाकी का काम “मैकाले ब्रांड सिस्टम” अपने आप कर लेगा। ये पोर्न,ये वैश्यावृति, जिसको आज भारत में भी कानूनी सहमति मिल गई है। जी हा इसकी शुरुआत विक्टोरियनस…(Victorians) ने की थी…. हा वो ही “राजपरिवार” वाले… और उसके बाद इस दल-दल को “brothels” और “strip club” जैसें नाम दे दिये गये। भारत में अंग्रेजो ने ही बंगाल के सोना गाची (sonagachi) में एशिया का सबसे बडा रेड लाईट एरिया बनाया ही नही था..बल्कि उसे बायकायदा बसाया भी था….अभी तक दुनिया का 85% इंटर नेट पोर्न चेस्टवर्थ और कैलिफोर्निया से ही आता हैं और आज ये बिना हथियार का युद्ध”बन गया है..जिस पर कुछ दिन पहले ही मेने एक आर्टिकल लिखा था ..”समाज को फ्री सेक्स और उससे जुड़े धंधे को थाली में परोसकर इस देश को उपलब्ध करा कर एक तीर से कई शिकार हेने जा रहें हैं।…और यहाँ तक कि इस तीर की जद में आज इस देश का सुप्रीम कोर्ट भी आ गया हैं और देश की राष्ट्रवादी का दंभ भरने वाली पार्टी और सरकार भी। अब सवाल ये है कि आखिर इन सबको इतना एट्रक्टिव क्यो और कैसे बनाया जा रहा है…दरअसल आज देश के सारे सिस्टम को यौन-चकाचौंध से भरा जा रहा है….अब थोडा या तो यकीन करे या फिर “Pink cross foundation” के चीफ” Shelly lubben” से पूछ ले तो शायद पता चल जायेगा।… जब गांजा + मेरीजुआना (Marijuana) और अल्कोहल से किसी भी देश का युवा बोर हो जाता है,तो धंधा बैठ जाता है,फिर ये..ड्रग + चलती फिरती फ्री पोर्न= non curable addiction वाला सिधांत अपनाया जाता है जिसकी शुरुआत आज इस देश में हो चूकि है। जी हा आप मानिए या न मानिए हॉलिवुड के बाद बॉलिवुड दुनिया का सबसे बडा सेक्स का अड्डा बन चुका है।मै तो कहुंगा शायद कल का कोर्ट का ये फैसला इसी बाॅलीबुड़ को ध्यान में रखकर दिया गया है। ठीक वाॅली वुड की तरह सेक्स व्यापार को इन्डस्ट्रीज में लाया जा रहा हैं। जैसे बैकाक, और थाईलेंड क्योकि वहां की सारी इकोनोमि सेक्स पर ही बैस्ड़ हैं। -मेरे टच में भी कई लोग हैं जिनमें कुछ दोस्त भी है जो ड्रग लेते हैं..और कहते हैं कि ड्रग लेने के बाद आदमी की मानसिकता सेक्स के प्रति अटिरेक्ट होती हैं। तब मेरे समझ में आया कि हमारी बाँलीवुड में 99 प्रतिशत लोग ड्रग किस लिए लेते हैं।और सबसे ज्यादा ड्रग का इस्तेमाल इसी पोर्न इन्डस्ट्री मे होता भी है.. जो आपस में जुड़े हुए है-ड्रग्स डीलिंग = ह्यूमेन ट्रैफिकिंग (human trafficking) या ये कहें कि ये दोनो एक दूसरे के पूरक है.. बिना नशे के पोर्न फिल्म नही बन सकती । और शायद आपको आश्चर्य होगा कि अमेरिकन कम्पनियों के कण्डोम को बिकवाने में बॉलिवुड का एक बहुत बड़ा योगदान है…। दरअसल आज दुनिया की इन दोनो बड़ी फिल्म इंडस्ट्रीज विशेषकर बॉलीवुड भी “Theory of relativity of time” की इस थ्योरी को भी धड़ल्ले से एडाप्ट कर चूकी हैं। आप खुद देखिये कि जिस बॉलिवुड को साठ के दशक में घर-घर जाकर भी कोई अभिनेत्री नही मिलती थी और अस्सी के दशक में एक “किस सीन” पर ही बवाल मच गया था,वो ही बॉलिवुड आज “संभोग” के सीन को बिना रोकटोक दिखाता है… मुंबई में लाईन लगी है… इन मैकाले ब्रांड लडकियों की ये उदाहरण नीचे आपके सामने है, “कास्टिंग काउंच” धडाधड होते हैं…जो जितना “कम्परोमाईज” करेगी उतनी बढिया उसको फिल्म से लेकर सिरियल और राजनैतिक पार्टी में मौक़ा मिलेगा।…अब इसको आप “time-relativity Theory” नही कहेंगे तो क्या कहेंगे..? आपके ध्यान होगा “ईलू बाबा” ने अफ्रीका में एक मिस कंसेप्सन “एक झूठ” फैलाया था कि कुँआरीओ के साथ सेक्स से एडस से बचाव होगा..।
आपको नही लगता कि वास्तव समलेंगिकता को मान्यता देकर इस देश का न्याय व्यवस्था भी इस गेंग” की शिकार हो गई हैं,या फिर इन न्यायालयो में जो सरकारी वकील है वो अव्वल दर्जे के अनपढ़ है जिन्हे ने पुराणो का पता है ने विज्ञान का और न ही भारत की संस्कृति का। सुषमा स्वराज जी ने एक बार कोशीश की थी। तब लगता था कि शायद मोदी जी ने भी झाडू उठा लिया हैं।देश की गली-गली में फैले इस कचरे को साफ करने के लिए। लगता था कि ये रेप,ये नग्नता,,ड्रग्स जो दिल्ली और मुंबई समलेंगिकता के अमीरजादे नोट जलाकर सूंघते आये हैं,वो इस देश के किसी नुक्कड़ पर किसी गांँव की गली में अब नही बिकेगा..? सच कह रहा हूँ कोर्ट ने वैश्यावृति के इस धंधे को इज्जत वाले व्यापार में तब्दील करके बहुत गलत किया हैं।अब पूरे देश में ये सड़ांध फैलनी निश्चित हैं। भयंकर सामाजिक पतन होगा ,ये एडस का ग्राफ देश की जीडीपी को कहाँ ले जायेगा ये अभी नही, कुछ सालो बाद ही आपको और आपकी सरकार को एहसास होगा। हा इस संड़ाध से देश के लोगो को रोजगार जरूर मिलेगा क्योंकि दुनिया की “एडस” की दवाइयां जो अमेरिका और यूरोप की कंपनी सालो से बना रही है,ये देश उनका सबसे बडा खरीदार बनेगा और उनको बेचने वाले होगें इसी देश के अपने ही लोग। यकीनन अपने पड़ोस के मेडिकल स्टोर पर जरा एक घंटे बैठकर देख लीजिए “वियाग्रा” जिसे अमेरिका पहले ही इस देश को “खरपतवार” के रूप में भेज चुका है..वो “Kit-Kat की तरह बिक रही है या नही..। क्योकि इसके प्रसार के झुंड में मीडिया के साथ-साथ इन मलेच्छों में “हनी सिंह” और “सनीलियोनी” का नाम बहुत ऊपर है । बस आखिर में इतना ही कहूँगा कि सड़के साफ करने से देश नही चलेगा..साफ करना है तो देश से ये पोर्न इंडस्ट्री + ये स्लाटर इन्डस्ट्री दोनो को ही साफ करो,और वापस लो समलैंगिता वाले वैश्या वृति वाले इस कानून को ..। अरे कुछ नार्थ कोरिया से सीख लो जहाँ पोर्न देखना ही मौत को दावत देना हैं बनाना तो दूर की बात है। अभी भी वक्त हैं ये नग्नता (weapons) + virus (medicine) के इस अर्थ शास्त्र” को समझने का क्योकि ये Maclauy educational system + Red light industry एक बहुत बडी चेतावनी है भारत के भविष्य के लिए.। अपन तो अब दिमाग को शांत करके गुमनाम जिंदगी बिताने वाले है भैया।
लेखक सुनील कुमार सूत्र FB Wall
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