एक ऐसा क्षेत्र जहां की जलवायु निर्धारित हो और उस प्राकृतिक क्षेत्र में जीव-जन्तु, वृक्ष और वनस्पतियां भिन्न भिन्न प्रकार की होती है। इसी विविधता को जैव विविधता कहते हैं। 1992 में ब्राजील के रियो डे जेनेरियो में आयोजित जैव विविधता सम्मेलन के अनुसार जैव विविधता की परिभाषा इस प्रकार है,”धरातलीय, महासागरीय एवं अन्य जलीय पारिस्थितिकीय तंत्रों में उपस्थित अथवा उससे संबंधित तंत्रों में पाए जाने वाले जीवों के बीच विभिन्नता जैव विविधता है। “प्रतिवर्ष 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। इसे ‘विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस’ भी कहते हैं। इसका प्रारंभ संयुक्त राष्ट्र संघ ने किया था। हमारे जीवन में जैव विविधता का काफी महत्व है। नैरोबी में 29 दिसम्बर 1992 को संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में जलवायु सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष वैश्विक स्तर पर जैव विविधता दिवस मनाया जाएगा। पहले इसे 29 मई को मनाने का निर्णय लिया गया था पर कुछ देशों के कठिनाइयां जाहिर की तो इसे 22 मई को मनाने पर सहमति बनी थी।

संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में मनाए जाने वाले सभी दिवसों के लिए एक विशेष थीम होती है। विविधताओं के संरक्षण के लिए और इस समस्या से सभी को जागरूक करने के लिए वर्ष 2022 की थीम है ‘हम समाधान का हिस्सा है’ (we are the part of solution) प्राकृतिक एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में जैव विविधता का महत्व देखते हुए ही जैव विविधता दिवस को अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। नैरोबी में 29 दिसंबर 1992 को हुए जैव विविधता सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था, किंतु कई देशों द्वारा व्यावहारिक कठिनाइयां जाहिर करने के कारण इस दिन को 29 मई की बजाय 22 मई को मनाने का निर्णय लिया गया। हमें एक ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है, जो जैव विविधता में समृद्ध, टिकाऊ और आर्थिक गतिविधियों के लिए हमें अवसर प्रदान कर सकें। जैव विविधता के कमी होने से प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, सूखा और तूफान आदि आने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है अत: हमारे लिए जैव विविधता का संरक्षण बहुत जरूरी है। लाखों विशिष्ट जैविक की कई प्रजातियों के रूप में पृथ्वी पर जीवन उपस्थित है और हमारा जीवन प्रकृति का अनुपम उपहार है। अत: पेड़-पौधे, अनेक प्रकार के जीव-जंतु, मिट्टी, हवा, पानी, महासागर-पठार, समुद्र-नदियां इन सभी प्रकृति की देन का हमें संरक्षण करना चाहिए, क्योंकि यही हमारे अस्तित्व एवं विकास के लिए काम आती है। इसमें विशेष तौर पर वनों की सुरक्षा, संस्कृति, जीवन के कला शिल्प, संगीत, वस्त्र-भोजन, औषधीय पौधों का महत्व आदि को प्रदर्शित करके जैव विविधता के महत्व एवं उसके न होने पर होने वाले खतरों के बारे में जागरूक करना है। भले ही हम इस बात पर गर्व करें कि मनुष्य प्रजाति किसी पर आश्रित नहीं, किंतु यह भी सत्य है कि ऐसे बहुत से कारण हैं जिनके लिए हम जैव विविधता पर निर्भर हैं। बैक्टीरिया से लेकर विशालकाय जीव-जंतु और वनस्पति मानव जीवन को सुगम बनाने के साथ ही विकास के सहभागी हैं। जैव विविधता दिवस (22 मई) पर पारिस्थितिकी और विकास में स्वावलंबन के समीकरण को समझ रहे। किसी भी देश की संपन्नता दो ही बड़े स्तंभों से जानी जाती है। पहला, उसकी आर्थिक प्रगति और दूसरा, पारिस्थितिकी।

![]अनुराग विश्नोई

अनुराग विश्नोई राष्ट्रीय जंगल एवं प्रकृति बचाओ अभियान भारत

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