ध्यान रहे,,, आप यदि हसदेव नहीं बचा पाए,तो सबदेव मिलकर भी आपको नहीं बचा पाएंगे. इसलिए आइए हम सभी व्यक्तिगत,सामाजिक अथवा राजनैतिक क्षुद्र संकीर्णता की दीवार लांघकर हसदेव बचाने के लिए चट्टानी दीवार की तरह खड़े हो जाएं. आप सब ने सुना होगा कि हसदेव को बचाओ मुहिम जोर शोर से चल रही है आखिर यह जंगल ही तो है इसे क्यों बचाया जाए क्योंकि ऐसे ही जंगल काटे जाते हैं आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा लेकिन हसदेव कोई आम जंगल नहीं है हसदेव का जंगल 70000 स्क्वायर किलोमीटर का बसा हुआ एक घना जंगल है जिसमें लाखों की संख्या में पेड़ है अगर गिनती की जाए तो 2000000 से अधिक पेड़ होंगे इस जंगल में जो की गिनती वाले पेड़ हैं और जिनकी गिनती नहीं की जाती है उनकी संख्या तो ना जाने कितनी होगी अभी कोल आवंटन के लिए इन हसदेव क्षेत्र में खदानों को आवंटित किया गया है जिसमें पूरी तरीके से इन पेड़ों को काटकर के कोयले का उत्खनन किए जाने की योजना है अब इससे मुझे क्या नुकसान क्योंकि आज हम जब तक मेरा क्या फायदा मेरा क्या नुकसान नहीं सोचते तब तक हम चीजों के बारे में काम नहीं करते हैं।
छत्तीसगढ़ में निवास करते हैं या १ १. आप बिलासपुर या जांजगीर जिला रायगढ़ जिला में निवास करते हैं तो इससे आपको प्रत्यक्ष रूप से बहुत ही अधिक नुकसान होने वाला है जैसे कि अब देखेंगे कि हसदेव के क्षेत्र से लगभग जांजगीर जिला के 400000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती और हसदेव अरंड के कट जाने से हसदेव में मिलने वाली छोटी बड़ी नदियों या नालों की जो उद्गम है वह समाप्त हो जाएगा यार यह ना ले जो है हसदेव को पानी नहीं दे पाएंगे और जब हसदेव में ही पानी नहीं रहेगा तो सिंचाई किस तरीके से होगी।
२. दूसरी बात जुड़ी हुई है बिलासपुर क्षेत्र की से बिलासपुर क्षेत्र में अमृत मिशन योजना जो चालू की गई है उसमें खुटाघाट बांध से पानी लाने का योजना बनाया गया है लेकिन खुटाघाट जो है वह सिर्फ बिलासपुर को 3 दिनों के पानी की सप्लाई के बराबर ही पानी दे सकता है अगर इसे चालू रखना होगा तो अहिरन नदी से पानी को डाइवर्ट करके खुटाघाट में लाना होगा और वह पानी जो है बिलासपुर के लोगों को मिलेगा लेकिन जब हसदेव ही नहीं रहेगा तो अहिरन से पानी कैसे आएगा और जब अहिरन से पानी नहीं आएगा तो बिलासपुर के लोगों को प्रत्यक्ष रूप से पानी की समस्या का सामना करना पड़ेगा जो भविष्य के लिए बहुत बड़ी चिंता का सबब है।
३. मानवता के दृष्टिकोण से भी देखें हसदेव क्षेत्र में रहने वाले 3000 से 5000 आदिवासियों का समूह उनका परिवार जो है उन को विस्थापित किया जाएगा उन्हें दूसरे जगह भेजा जाएगा जो उनका मूल अस्तित्व है वह खतरे में आ रहा है उनको मुआवजा की कुछ राशि तो दी जाती है लेकिन उनका जीवन जो है वह पूरी तरीके से समाप्त हो जाता है क्या कुछ रुपयों के नाम से आप अपने पूर्वजों की जमीन जायदाद छोड़कर वहां से हटना चाहेंगे आज सभ्य समाज की जिम्मेदारी बनती है कि जो हमारे क्षेत्र के हमारे आसपास के लोग हैं जिनकी हम मदद कर सकते हैं उनकी मदद के लिए सामने आए।
४. ऑक्सीजन की कमी का असर हम देख ही चुके हैं कोरोनाकाल में आज हम इसके बाद भी इसकी कीमत नहीं पहचानेंगे तो हमसे बड़ा मूर्ख कोई नहीं होगा हमें पेड़ मुफ्त में ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और हमारे कार्बन के उत्सर्जन को ग्रहण करते हैं जिससे यह प्रकृति सुचारू रूप से चलती है और पेड़ों के कट जाने से इतनी भारी मात्रा में कट जाने से यह बैलेंस पूरी तरीके से बिगड़ जाएगा जिससे दिल्ली में हम देख रहे हैं कि हवा में जो है कितनी प्रदूषित मात्रा हो रही है जिससे वहां सांस लेना भी कठिन हो रहा है और तरह-तरह की बीमारियां हो रही है तो उससे बचने के लिए भी इन जंगलों को बचाना बहुत जरूरी है।
५. वर्षा के हिसाब से देखें तो जो बादल आते हैं वह हसदेव के जंगलों से टकरा करके इनकी आद्रता के कारण हमारे छत्तीसगढ़ के आसपास के क्षेत्रों में बरसते हैं और अगर यह जंगल नहीं रहेंगे तो यह जो मानसून के बादल हैं वह उत्तर प्रदेश और नेपाल के क्षेत्रों तक चले जाएंगे और हमारे क्षेत्र में वृद्धि की समस्या हो जाएगी जिससे हमारा पीने की पानी की समस्या कृषि की समस्या और ना जाने कितने प्रकार की समस्याओं का निर्माण होगा और जिसका प्रत्यक्ष रूप से हम को नुकसान होगा
६. हसदेव का जंगल जो है वह मध्य प्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से होते हुए झारखंड के पलामू वन क्षेत्र को जोड़ने वाला एक कॉरीडोर भी है इसमें अनेक वन्य प्राणी जो है विचरण करते हैं जिसमें बाघ हाथी इस तरीके के जीव भी शामिल हैं अगर हाथियों का यह जो रास्ता है जो इनका निवास है अगर हमने उसे छोड़ दिया तो हाथी आएंगे हमारे शहरों में और जब यहां थी हमारे शहरों की ओर आएंगे तो इसका भी नुकसान हमको ही भुगतना पड़ेगा.
अगर हसदेव जंगल नहीं रहा तो जंगली हाथियों के प्रचंड कोप का भाजन सर्वप्रथम हमारे सिर्री,पसान,पिपरिया क्षेत्र को ही बनना पड़ेगा. आप हर वक्त हम को क्या लेना हमारा क्या फायदा की स्थिति में बैठकर नहीं दे सकते इस बार अगर आप चुप बैठेंगे तो इससे आपका ही नुकसान है आपके आने वाली भविष्य आपको कोशिश की कि आप चुप रहे आपने कुछ कदम नहीं उठाया और देखते ही देखते हसदेव के लाखों पेड़ कट गया जिसका खामियाजा हमको आने वाले भविष्य में भुगतना पड़ेगा।
हसदेव को बचाने की इस मुहिम में आ गया यह पूरा देश हमारे साथ खड़े होने के लिए तैयार है लेकिन क्या हमारे आस-पास के लोग जो हम प्रत्यक्ष रूप से इसका भुगतान करने वाले हैं क्या हम सामने नहीं आएंगे मैं आप से पूछना चाहता हूं कि हसदेव को बचाने के लिए अपना योगदान देने के लिए आगे आइए हसदेव को बचाइए हर एक माध्यम जो आपके पास उपलब्ध है उससे इस बात को उठाइए कि सरकार मजबूर हो जाए अपने फैसले को वापस लेने के लिए और हसदेव को बचाने के लिए वह सामने आए और हमारा हरा भरा जंगल बचा रहे और हम एक बेहतर जीवन जी सकें एक छोटी सी गुजारिश आप सभी लोगों से आगे आएं।
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सूत्र पीपल नीम तुलसी अभियान (राजि)
निवेदक:- पेड़ नहीं हम प्राण लगाबो परिवार छत्तीसगढ़.
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