**जागो!साथियों जागो, पेड़ बचाओ पेड़ लगाओ **

बड़े ही दुख के साथ आप सभी को सूचित किया जा रहा है कि सरगुजा अंबिकापुर क्षेत्र के हसदेव क्षेत्र में परसा कोल ब्लॉक के विस्तार के लिए रातों-रात गुपचुप तरीके से हजारों की संख्या में पेड़ों को काटे जा रहे हैं. अदानी ग्रुप आफ कंपनी द्वारा यहां भूमिगत कोयले के दोहन के लिए करीब 400000 पेड़ों की बलि दी जाने का अनुमान है. आज समूची दुनिया जलवायु परिवर्तन, तापमान में वृद्धि व कम वृष्टि की समस्या से चिंतित है.कुछ दिनों के लिए आए कोरोना वायरस की भयावहता ने ही लोगों को ऑक्सीजन व वन दोनों की महत्ता को समझाने का छोटा सा प्रयास मात्र किया था.तो पूरी दुनिया हाय हाय कर उठी थी.ऐसे में लाखों जीवन दाताओं की यूं ही बलि दिया जाना अपने ही हाथों अपना गला घोट लेने से कम नहीं है.साथ ही साथ जिस क्षेत्र में कोयला खनन के लिए वनों को काटा जा रहा है, वह जंगली हाथियों द्वारा स्वघोषित कारीडोर है.यदि यह जंगल नहीं रहे तो वहां के लाखों वन्य जीव या तो बेघर हो जाएंगे या मारे जाएंगे. किंतु सबसे बड़ी समस्या हाथियों की होगी.अपने आवास क्षेत्र के नेस्तनाबूद होने पर वे आक्रोशित गजराज निश्चित ही रिहायशी क्षेत्रों में अपना तांडव मचाएंगे.तब इन के कहर से भला आम जनों व बस्तियों को कैसे बचाया जा सकेगा? जंगल पर आश्रित सहस्त्रोँ आदिवासी भाई-बहन घर-बार,भूमिहीन,आजीविका विहीन,जीवन शून्य होंगे, सो अलग. साथ ही साथ इन सब के दुष्परिणाम हम सब को भी भोगने पड़ेंगे.इसलिए समय रहते आइए हम सभी आलस्य,प्रमाद व किंकर्तव्य विमुढ़ता छोड़कर जागें. और परसा कोयला खदान के विरोध में बैठे भाई बहनों का एकजुटता से साथ दें.ध्यान रहे हमारा विरोध कोयला खदान अथवा विकास से नहीं है,अपितु विकास के छद्म वेशधारी विनाश से है.आइए हम सभी मिलकर प्रयास करें कि परसा कोल ब्लॉक या तो पूरी तरह से बंद हो या फिर कंपनी को कोयला खनन करना ही है,तो अन्य भूमिगत कोयला खदानों की तरह इसे भी भूमिगत खदान में तब्दील किया जाए. ताकि जंगल वन एवं पर्यावरण सुरक्षित रह सकेँ.

निवेदक:- पेड़ नहीं हम प्राण लगाबो परिवार छत्तीसगढ़.

सूत्र Dr Dharmendra Kumar पीपल नीम तुलसी अभियान (रजिस्टर्ड )पटना

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