।। बड़ा मधुरिम सा संबंध नदियां और जंगल का ।।

पेड़ो का बहुत महत्व होता है नदी नालों का श्रोत है पेड़ पानी रिचार्ज करते करते है । बारिश क्या पानी पेड़ पीते है फिर धरती में ट्रांसफर कर छोटे छोटे चस्मे के रूप में नदी नालों का स्वरूप बन जाते है । पहाड़ों में ऐसे पानी के श्रोत मिल जाते है जो मिनरल से भरपूर मीठे पानी पीने काबिल होते हैं। गंगा एक इसका जीता जागता उदाहरण है जो अपने पानी में बहुत खासियत लिए बहती है गोमुख से गंगा सागर तक ।

जल स्रोत जब नदी का

चूमता हैं किनारा जंगल का आवेग के साथ ।। धरती होती हैं गदगद और करती भीतर ही भीतर कंपन हिलोरे मारता हैं नदी का अस्तित्व जब जब, हलचल सी होती हैं धरती के सीने में ।। खुशी की लहर जल की हिलोर में हैं दिखती कैसे नदी हैं मतवा के चलती ।। ये अंबर,ये धरा,ये लता और ये नदियां हैं! जब आपस में मिलते कुदरत की हर सीमा हो जैसे, खुशी की चमक से भरती ।। हमें, इन्हें संजोना हैं और प्रकृति के दि❤️ल पर हैं हरित स्याही से खुद का नाम अंकित करना ।।

![]स्नेहा कृति 🙏🙏🙏🙏🙏 (रचनाकर, पर्यावरण प्रेमी और राष्टीय सह संयोजक) कानपुर उत्तर प्रदेश

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