दिल्ली से देहरादून वापस लौटते हुए, घुमावदार पहाड़ी सड़के प्रारम्भ होते ही पहाड़ो के खुशनुमा अनुभव की उम्मीद में दिल की धड़कने बढ़ने लगती हैं। गाड़ी की गति को धीमा करें तो चौड़ी सफेद घुमावदार नदी तल, आसमान को छूते पुराने साल और अन्य वृक्षों की छत्रछाया से हल्की हल्की छनती धूप, चिड़ियों की चहचहाहट और झिंगुरों की आवाज़ चारों ओर ठंडी हवा के साथ आने लगती है। मैदानों की शुष्क हवा कहीं दूर एक दुष अनुभूती सी लगने लगती है। वातावरण की आबोहवा अपने इस अद्भुत रूप में धीरे से “देहरादून में आपका स्वागत है” कहती है। कोई भी फ्लेक्स साइन बोर्ड ऐसा एहसास कभी नहीं दे सकता। यह पर्यटकों को उत्तराखंड, इसके प्राकृतिक प्राचीन अछूते अनोखे भूभाग, इसकी वनस्पतियों और जीवों, इसके आकर्षक वातावरण की ओर आकर्षित करता है।

दून में प्रवेश करते हुए, साल के आलीशान, वर्षों पुराने, और इस मौसम में फूलों से भरे, राजमार्ग को सुसज्जित करती हैं, वह आज एक बहुचर्चित एक्सप्रेस हाईवे बनाने के लिए बलि चढ़ रहे है।

साल के वृक्ष प्राकृतिक सम्पदा है, कृत्रिम रूप से नहीं उगाए जा सकते और एक बार हटा दिए जाने के बाद, हम इन्हें हमेशा के लिए खो देंगे। पेड़ों के साथ-साथ इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता नष्ट हो जाएगी। इस तथ्य को CFGDs की याचिका के माध्यम से अदालत के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद, इस मामले पर निर्णय ने साल वनों पर एक अध्ययन और केवल सरकारी अधिकारियों की एक समिति नियुक्त करने का सुझाव दिया, जिसमें कोई भी नागरिक प्रतिनिधि शामिल नहीं था।

इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण दो-ढाई घंटे में दिल्ली पहुंचने और एक्सप्रेस-वे पर्यटन उद्योग के लिए वरदान साबित होने की खुशी में अनजान भोली-भाली जनता विकास के प्रचार-प्रसार में शामिल हो गई है। वह इस विनाशकारी तथ्य के प्रति पूरी तरह से अन्भिग्य हैं कि हम देहरादून को अपने देश के अन्य स्थानों की तरह एक गर्म, दुर्गम, प्रदूषित और भीड़-भाड़ वाले शहर में बदलने की राह पर चल निकले हैं।

इस बात पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए कि, बिना यहां के दीप्तिमान वनस्पतियों और जीवों के, बिना यहां के पहाडी़ भौगोलिक रूपरेखा के, बिना यहां के र्निमल और स्वच्छ हवा के, कौन पर्यटक यहाँ आना ही चाहेगा? और दिल्ली पहुँचने की यह गति, जिसकी कई लोग प्रशंसा कर रहे हैं, हम सभी को तेजी से खराब स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और हमारे विनाश की ओर भी ले जा रही है।

तापमान पहले से ही सामान्य से कुछ डिग्री ऊपर चढ़ चुका है, गर्मी की शुरुआत में अधिक शुष्क मौसम की भविष्यवाणी की जाने लगी है, हम सभी को यह स्वीकार करना चाहिए कि पेड़ मानव जाति के सुखी और स्वस्थ अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं। कोई भी मानव निर्मित रचना प्रकृति की रचना के साथ प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश नहीं कर सकती है। पेड़ हमारे ग्रह में उस तरह से बड़े पैमाने पर योगदान करते हैं जिसकी हम थाह भी नहीं ले सकते। यह उनका परोपकारी प्रेम है जिसे ही सच्चा प्रेम माना जा सकता है। एक राष्ट्र के जीवित रहने और समृद्ध होने के लिए पेड़ जरूरी हैं।

कई संबंधित समूह: फ्रेंड्स ऑफ दून, खुशीओं की उड़ान, प्राउड पहाड़ी, निरोगी मिशन, पराशक्ति, आघास, मिट्टी फाउंडेशन, बीटीडीटी, न्यू, स्वच्छ परिवेश, तितली ट्रस्ट, प्रमुख, आइडियल फाउंडेशन, इकोग्रुप, हिंद स्वराज, एमएडी, डू नो ट्रैश, दून नेचर एसोसिएशन, प्रमुख, द अर्थ एंड क्लाइमेट चेंज इनिशिएटिव, सिटिज़न फॉर क्लीन एण्ड ग्रीन आमबिएंस तथा बहुत सारे जागरुक नागरिक हमारे राज्य के खजाने के इस अनावश्यक नरसंहार और हमारी आने वाली पीढ़ियों और पृथ्वी की भलाई के लिए ध्यान आकर्षित करने के लिए, 3 अप्रैल को असारोढ़ी चेकपोस्ट पर सिटीजन फॉर ग्रीन दून के आह्वान पर आयोजित विरोध ‘विनाश का विरोध’ में शामिल हुए हैं ॥

सूत्र लेखन -इरा चौहान Citizen For Green Doon page

पीपल नीम तुलसी अभियान संस्थापक Dr Dharmendra Kumar इस विनाश का घोर विरोध करते हैं पेड़ की कटान विकास के नाम पर बंद होना चाहिए **पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ **

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