देहरादून दिल्ली मार्ग सुगम बनाने के चक्कर में इसके लिए हजारों पेड़ों की बलि देनी होगी। महेज़ ढाई घंटे में कैसे पूरा होगा सफर देहरादून से दिल्ली । विरोध में शुरू हुआ चिपको आंदोलन ।
देहरादून: उत्तराखंड कई बड़ी आपदाओं का गवाह बन चुका है, लेकिन विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाए रखना है, यह हम आज तक नहीं सीख पाए । इसी तर्ज में उत्तर भारत के हिमालयन श्रालंखा में पहाड़ों को छलनी कर बांध बनाए जा रहे हैं।
गौर तलब है की गणेशपुर से डाट काली मंदिर के बीच दिल्ली-देहरादून राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना के तहत एलिवेटेड रोड का विकास किया जा रहा है। परियोजना की कुल लंबाई 19.38 किलोमीटर है। परियोजना का काम पूरा होने के बाद देहरादून से दिल्ली का सफर सुगम हो जायेगा एवं मात्र ढाई घंटे में दिल्ली पहुंचा जायेगा ।
देहरादून में एलिवेटेड रोड के नाम पर हजारों पेड़ों की बलि लेने का काम शुरू हो गया है। इसके विरोध में कई गैर सरकारी संगठन लामबंद हो गए हैं। जिस राज्य में पेड़ों को बचाने के लिए सालों पहले गौरा देवी ने चिपको आंदोलन शुरू किया था, उसकी राजधानी में पेड़ों को बचाने के लिए बड़े स्तर पर मुहिम चल रही है । मोहंड बचाओ आंदोलन अभियान शुरू कर दिया क्यों की अधिकारियों ने आश्वाशन तो दिया परियोजना में वन संरक्षण पूरा ध्यान रखा जाएगा और हजारों पेड़ काटने काम शुरू कर दिया ।
देहरादून दिल्ली एलिवेटेडेड रोड परियोजना का काम पूरा करने के लिए मोहंड क्षेत्र में बसे दर्जनों वन गुर्जरों के डेरों को भी शिफ्ट करने के आदेश दिए गए हैं। लिहाजा एनजीओ कार्यकर्ताओं ने अभियान में वन गुर्जरों को भी शामिल किया है। राष्ट्रीय जंगल बचाओ अभियान भारत के संयोजक संरक्षक अध्यक्ष संस्थान पीपल नीम तुलसी अभियान के डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि समूची दून घाटी पर्यावरण की नजर से संवेदनशील है। यहां पेड़ों के कटान को रोकने की जरूरत है। इसे देखते हुए विभिन्न गैर सरकारी संगठनों ने चिपको आंदोलन की तर्ज में विरोध जारी करना शुरू कर दिया ।
महज 50 मीटर दूरी वन विभागीय दफ्तर और आवासीय परिसर से सैकड़ों पेड़ो को काटा गया जिसका वीडियो साझा किया है वीडियो रूद्र भारत सत्य संपादक और Dr अंचल शर्मा पर्यवार्ण प्रेमी रक्षक द्वारा लिया गया
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