![]लेखिका डॉ हर्ष प्रभा उत्तर प्रदेश गाज़ियाबाद समाज सेविका पर्यावरणविद एवं लेखिका
मैं काफी समय से देख रही हूं कि ज्ञान देने वालों की कमी नहीं है इस दुनिया में,और इन ज्ञान देने वाले बाबाओ के कुछ तो ऐसे अंधभक्त हैं कि बस अपने घर बाहर को छोड़कर अंधभक्ति में ही लीन हो गए हैं!दुख मुझे तब ज्यादा होता है,जब इन अंध भक्तों का भ्रम टूटता है,तो यह टूट जाते हैं,और फिर भी ना ना करते करते उस पागल प्रेमी की तरह सब कुछ जानने के बावजूद भी,कि वह गलत है,फिर भी दिन-रात माला जपते हैं उसी के नाम की क्यों?क्योंकि वह उस इंसान को भगवान का दर्जा जो दे बैठे थे!ऐसी ही एक अंधभक्त की सच्ची कहानी में आप सबको सुनाऊंगी,जो आज भी पागल प्रेमी की तरह सच्चाई जानने के बाद भी,अपने भगवान को मतलब इंसान को याद करती हैं,उसकी पूजा करती हैं कि कभी तो ऐसा दिन आएगा,जब इनके भगवान को मुक्ति मिलेगी!
मैं बात कर रही हूं “धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा” गुरमीत सिंह राम रहीम की!कौन नहीं जानता होगा इस पाखंडी,ढोंगी व्यक्ति को!इसी राम रहीम की एक परम भक्त थी,जो मेरी बहुत दूर की बुआ जी लगती थी!इस राम रहीम गुरमीत सिंह के चक्कर में उन्होंने अपने बच्चों की बातें सुननी बंद कर दी थी,स्वर्गवास सिधार चुके पति की फोटो उतार कर दूर कर दी थी,पति की फोटो की जगह इनके भगवान राम रहीम ने ले ली थी! इन दूर की बुआ जी से घर में बच्चों के लिए खाना नहीं बनता था, लेकिन वह राम रहीम के डेरे में जाकर 500 लोगों का खाना बना देती थी!क्योंकि उनको पूरा विश्वास था,कि वह जो सेवा वहां जाकर कर रही है,वह सीधे भगवान के खाते में जुड़ रही है,और यह खातेदार कोई और नहीं वह राम रहीम ही था उनका भगवान!
एक बार तो हद तब हो गई, जब राम रहीम गुरमीत सिंह का हाथ लगाई हुई हरी मिर्च को मेरी दूर की बुआ जी ने जादुई मिर्च बताकर एक एक मिर्च को ₹500 में पूरे मोहल्ले में बेच दिया था,और खरीदने वाले गुरमीत सिंह के अंधभक्त ही थे,लंबी लाइन लगी हुई थी हरी मिर्च को लेने के लिए,ऐसे ही गुरमीत सिंह धन-धन सतगुरु बना! हाथ लगाते ही सभी चीजों से धन जो बरस रहा था और पागल अंधभक्त धन कमा कमा कर राम रहीम को सौंप रहे थे!
यह तो मैंने हरी मिर्च की बात बताई है इसमें आलू, प्याज, धनिया, टमाटर,न जाने कितनी चीजों को गुरमीत सिंह ने सिर्फ हाथ लगाया और हजारों की बिक गई थी और यह सब बेचने वाले,राम रहीम गुरमीत सिंह के अंधभक्त ही थे, और खरीदने वाले भी! यह बात दूसरी है कि आज गुरमीत सिंह जेल में आलू और मिर्ची उगाने का ही काम कर रहा है ₹50 महीना,इतनी मिर्ची तो उससे उगवाई ही जाएंगी,जितनी उसने लोगों को मिर्ची लगाई थी!
मैंने इन दूर की बुआ जी को बहुत समझाने की कोशिश की,जैसे ही मैं समझाने लगती कि बुआ जी आप उस व्यक्ति को अपना गुरु मानती हो तो,गुरु की जो अच्छी बातें हैं उन्हें अपने पास रखो, लेकिन किसी इंसान को भगवान का नाम मत दो,यह सुनते ही वह कहती तुम नर्क में जाओगी,तुम भगवान का अपमान कर रही हो! मेरा इन दूर की बुआ जी से कहना था,कि इस धरती पर एक से ज्ञानी महापुरुषों ने जन्म लिया है जिनके नेक विचारों पर हम आज भी अमल करते हैं,इतने ज्ञानी पुरुष होने के बावजूद भी वह इंसान ही है भगवान नहीं!क्यों क्योंकि जो इस धरती पर जन्म लेकर आया है वह इंसान है भगवान नहीं, हां यह बात अलग है कि हम उस व्यक्ति की अच्छाइयों,अच्छे कर्मों,नेक विचारों को देखकर हम उसकी तुलना भगवान से कर देते हैं,और उस व्यक्ति के अच्छे कर्मों को देखकर हम भी उससे सीखकर अच्छे इंसान बनने कि कोशिश करते हैं,लेकिन वह इंसान ही कहलाए भगवान नहीं!अगर इस धरती पर भगवान ने भी जन्म लिया,वह भी इंसान ही कहलाए उस समय, जैसे श्री राम,श्री कृष्ण जी ने भी कभी नहीं कहा कि वह भगवान है इस धरती पर,उन्होंने भी यह कहा कि हम आम इंसान हैं इस धरती पर,अगर हम यहां जन्म लेकर आए हैं!तो यह राम रहीम भगवान कैसे हो सकता है? क्यों क्योंकि यह अपनी-अपनी समझ है कि हम अच्छाइयों को किस तरह से समाज में फैलाएं और अच्छाइयों को समाज में जो फैलता है उस इंसान को भी हम,भगवान नहीं कह सकते हैं,हां हम यह जरूर कह सकते हैं कि तुम्हारे कार्य देव तुल्य हैं,तुम्हारे विचार नेक हैं,सबकी भलाई के लिए है तुम एक नेक इंसान हो इंसान के रूप में!
इतना सब कुछ समझाने के बावजूद भी मेरी इन दूर की बुआ जी का भ्रम नहीं टूटा,जिसको यह भगवान बता रही थी वह गुरमीत सिंह राम रहीम बॉलीवुड में रंगरलिया मना रहा था! फिल्म बना रहा था, उसकी फिल्म का गाना (आई एम द लव चार्जर) गाने के बोल थे, मेरी दूर की बुआ जी और मेरी दूर की बुआ जी जैसे करोड़ों भक्त राम रहीम को, भगवान बता कर उसके गाने को गुनगुना रहे थे,और कह रहे थे कि हममें प्यार जग रहा है,हम चार्ज हो रहे हैं,अपने भगवान को साक्षात धरती पर देखकर!
जब इस पाखंडी गुरमीत सिंह के सारे काले चिट्ठे सबके सामने आ गए, कानून का शिकंजा इस गुरमीत सिंह पर कसा गया,तब भी इन अंधभक्तों की भक्ति नहीं खत्म हुई!अंधभक्ति खत्म क्यों नहीं हुई,क्योंकि यह उसको भगवान जो मान बैठे थे,इंसान को भगवान का दर्जा यह कैसे संभव हो सकता है? गुरमीत सिंह के जेल जाने के बाद न जाने कितने भक्त पागल हो गए, जिनका इलाज आज भी अस्पतालों में चल रहा है,उनको आज ऐसा झटका लगा है कि जिसको उन्होंने अपना भगवान माना था वह शैतान कैसे हो सकता है?और मेरी दूर की बुआ जी तो आज भी इसी आस में है कि भगवान जेल से बाहर निकल कर आएंगे और दर्शन देंगे सब भक्तों को !
अब इसमें गलती में किसकी कहूँ गुरमीत सिंह की या अंध भक्तों की!इसमें गलती अंध भक्तों की है जो किसी इंसान को भगवान मान बैठते हैं,इंसान को इंसान ही रहने दो, भगवान ना बनाओ! किसी भी इंसान को चाहे वह कितने ही अच्छे कार्य,विचार और ज्ञान की बातें बताता हो, हमारा काम है किसी अच्छे व्यक्ति की अच्छाइयों को ग्रहण करना ना कि उसे भगवान बना देना!नहीं तो राम रहीम गुरमीत सिंह जैसे इंसान यहीं से इंसान से भगवान और भगवान से शैतान बनने का सफर तय करते हैं और इस सफर में साथ देते हैं इनके अंधभक्त!
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