।। नीर की बूंद बूंद हैं कीमती ।।

जल बिन जीवन हैं शून्य

एक प्यासा,एक तलबगार ही समझेगा इस अमूल्य धन की कीमत । मानव के जिस्म का 70 प्रतिशत भाग भी पानी से बना हैं वो, निरीह प्राणी,फिर क्यूं हैं तू इसके लिए इतना लापरवाह ।। भविष्य निधि हैं ये जल इसका संरक्षण करना हो मात्र हमारा उद्देश । ये नदियों का उफान । ये कल कल की आवाज कर बहते झरने ।। ये पोखर और ये तालाब का पानी कहता हैं हमसे बस यही कहानी । सहेज लो मुझे, मुझसे ही हैं ओ मानव, तेरा आज,कल और अमूल्य सागर भविष्य का ।। आइए,मिलकर संरक्षित करे जल को जिससे, सुरक्षित हो सके हमारा कल ।।

![]स्नेहा कृति (रचनाकार ,पर्यावरण प्रेमी और राष्टीय सह संयोजक ) कानपुर उत्तर प्रदेश

जल एक ऐसा तरल तत्व जो मनुष्य के शरीर 77 फीसदी व्यापत है जल के बिना जीवन संभव नहीं । जल से ही हमारे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का संतुलन बनता है जो वायु से प्राप्त ऑक्सीजन के साथ मिल कर हमारे अंदर एक ऊर्जा बनाता है जिससे हम जीवित हैं।

जल के बैगर हम एक दिन भी नहीं रह सकते है। हम पानी पिए बिना जीवित नहीं रह सकते है। जल सिर्फ सेवन के लिए नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के गतिविधियों में इस्तेमाल होती है।  जल से हम खाना बनाते है , कपड़े धोते है , नहाते है और हर बार हाथ पैर भी हम जल द्वारा धोते है। जल नियमित रूप से हमे ज़रूरत होती है।  जल हमे नदियों , तालाबों , वर्षा जैसे स्रोत से प्राप्त होती है |

जल का दुरुपयोग कर हम बेजुबान जीव जंतु और प्राकृतिक पेड़ पौधों को खतरे में डाल रहे उनका जीवन अल्प बना रहे ।

जल मनुष्य के लिए बेहद अहम होता है।  पृथ्वी पर अधिकांश जल समुन्दर में पाया जाता  है , जो खारा है और कुछ बर्फीला होता है। इन का पानी हम ना इस्तेमाल कर सकते है और ना ही सेवन कर सकते है। पृथ्वी पर पीने लायक  जल सिर्फ दो प्रतिशत होता  है। जल एक प्राकृतिक संसाधन है , इसका सोच समझकर इस्तेमाल करना चाहिए। निरंतर जल का  गलत उपयोग और उसे बेवजह  बर्बाद करने की आदत ने मनुष्य और जीव जंतुओं को मुश्किल में डाल दिया है।जल सिर्फ मनुष्य के लिए ही नहीं  बल्कि पशु पक्षियों और पेड़ पौधों के लिए भी ज़रूरी होता है। पर्यावरण जल के बैगर नष्ट हो सकता है। आजकल भूमिगत  जल में काफी गिरावट आयी है जिसके कारण ना सिर्फ गाँव बल्कि शहरों में भी पानी की दिक्कत पायी जाती  है।जंगल गांव और शहर सब जगह पानी की किल्लत देखने को मिलती है ।

बरसात की मात्रा  में  पहले की तुलना में काफी गिरावट आयी है जिससे जल स्रोत जैसे नदी , तालाब इत्यादि जलाशय  सभी   सूख रहे है। इसका प्रमुख कारण है मनुष्य का अंधाधुंध वनो को काटना। वन उन्मूलन ने वर्षा के दर को कम किया है।  एक मात्र वृक्ष ही हैं जो धरती के पानी को पी कर धरती के नीचे श्रोतों को पुनर्जीवित करते हैं यानी रिचार्ज करते है पेड़ो की कटान जल स्तर को बहुत नीचे ले जा रहा है यूं कहें जल स्रोतों को सुखा रहा है।यही मुख्य कारण है ग्लोबल वार्मिंग का जिससे समुद्र का जल स्तर दिन प्रति दिन बड़ता जा रहा है ।

प्लास्टिक एक ऐसा दुश्मन है धरती का जो धरती के रोम छिद्र यानी धरती की पानी पीने और सांस लेने की क्षमता को घटा रहा है और जल प्रदूषित हो रहा है नालंदा यूनिवर्सिटी में गंगा के पानी में सोध करने से पाया गया की जल में माइक्रो साइज में प्लास्टिक के कण पाए गए जो साधारण आंखो से नही देख सकते और वो पानी इस्तेमाल करने से शरीर में प्रवेश कर रहें है जिसके दुष्परिणाम आप अपने बीमार शरीर से पहचान सकते हैं । हमे आज संकल्प लेना चाहिए की हमे जल को प्लास्टिक मुक्त करना हैं ।

जल का सही उपयोग और जल बचाओ जैसी चीज़ो को प्रत्येक घरो तक पहुंचाना ज़रूरी बन गया है। जल का सही मोल वह इंसान जानता है , जो कई किलोमीटर चलकर जल मटके में भर कर लाता है। हमारे देश की जनसंख्या आसमान छू रही है।  दुनिया में जनसंख्या के मामले में भारत दूसरे नंबर पर खड़ा है। जितने अधिक लोग होंगे , उतनी पानी की अधिक ज़रूरत होगी और पानी के लिए टैंकर के सामने लम्बी लाइने होंगी।  जितने अधिक लोग जल का खर्च भी उतना अधिक होगा। देश के कुछ राज्यों को डार्क जोन की केटेगरी में डाला गया है।  अगर ऐसे ही चलता रहा तो कुछ वर्षो बाद उन राज्यों में भूमिगत पानी समाप्त हो जाएगा। लोगो को जितनी ज़रूरत हो , उतना ही पानी का इस्तेमाल करना चाहिए।

जल समस्त प्राणियों के लिए अमृत से कम नहीं होता है। अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो वह दिन दूर नहीं कि जल के बिना पूरी पृथ्वी समाप्त हो जायेगी। अभी भी समय है कि हम जल संरक्षण करे और जल को प्रदूषित होने से बचाये। देश की सरकार अपनी तरफ से भरपूर कोशिशें कर रहे है।  आम जनता को भी जल की अहमियत समझनी होगी और प्रत्येक व्यक्ति को जल के मामले में जागरूक होना चाहिए। हमारा दायित्व है कि हम जल को बचाये और जल की असली  कीमत समझे। पृथ्वी पर शुद्ध जल प्राप्त करना हर प्राणी का अधिकार है आज जिसे हम पैसे से खरीद रहे।

संपादकीय डेस्क

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