बचपन से ही मुझे फूलों से बहुत लगाव रहा है! जहां भी फूल खिले हुए मुझे दिखते थे,मैं उjन फूलों को देख कर मुस्कुराती और खुश होती थी!और थोड़ी देर उसी फूल के पास रुक कर उसको निहारती थी! ऐसा करते हुए मुझे देखकर मेरी सहेलियां मुझ पर हंसती थी कि फूल तो तोड़ने के लिए होते हैं,तुम इनको क्यों निहारती हो! तब मेरी सहेलियों से मेरा कहना होता था कि इनमें मेरी आत्मा जो बसती है इन फूलों में!
यह बात सुनकर मेरी सहेलियां जोर-जोर से हंसती और आगे बढ़ जाती थी!फूल तो मुझे सभी तरह के पसंद थे, लेकिन लाल गुलाब मुझे ज्यादा ही पसंद था!इसीलिए लाल गुलाब की कली मैं हर जगह लगती थी बचपन में!
बचपन का यह गुलाब का मोह अभी खत्म नहीं हुआ था जवानी में तो मैं और ज्यादा गुलाब की कलम लगाने लगी थी! जहां भी मुझे जगह दिखती लाल गुलाब की कलम वहीं लगा देती!
एक बार की बात है जब मैंने लाल गुलाब की कलम,युद्ध में शहीद हुए एक सैनिक की याद में लगाई थी!और प्रार्थना की कि आप कहीं नहीं गए हो,फूलों के रूप में हमारे बीच हमेशा मुस्कुराते रहोगे यहीं पर! मैं शहीद सैनिक की याद में लगाई गई इस कलम की बहुत ज्यादा देखभाल करती थी! लेकिन 1 साल तक भी इस कलम पर कोई लाल गुलाब का फूल नहीं आया!तब मुझे बहुत दुख हुआ कि इसका मतलब मेरे द्वारा लगाई गई कलम,सैनिक ने स्वीकार नहीं की है!
मैं उदास होकर बहुत देर तक वहीं लाल गुलाब की कलम के पास बैठी रही! उसके बाद मैं घर वापस आ गई और पूरे दिन सोचती रही कि फूल क्यों नहीं आए,इतनी मेहनत करने के बाद भी,जबकि मेरे हाथों से लगाई गई हर कलम पर फूल आते थे!शाम हो गई थी,अंधेरा हो चुका था,मेरा मन बहुत दुखी था,मैं फिर से उसी लाल गुलाब की कलम के पास जा पहुंची थी!
मैं अंधेरे में क्या देखती हूं,कि लाल गुलाब की कलम पर,मुझे पीले गुलाब का फूल लगा हुआ दिखा! पीले गुलाब के फूल को देखकर मैंने सोचा कि मैं कहीं और आ गई हूं!जैसे ही वहां से मैं वापस चलने लगी,मुझे किसी ने पुकारा कि तुम गलत जगह नहीं आई हो! यह वही लाल गुलाब की कलम है जो तुमने लगाई थी 1 साल पहले!यह सब सुनकर मैंने पीछे मुड़ कर देखा लेकिन मुझे वहां कोई नहीं दिखाई दिया! मुझे लगा कि मैं कुछ ज्यादा ही सोच रही हूं,इमोशनल बहुत ज्यादा थी ना बचपन से ही!
और फिर से वहां से चलने लगी! दो चार कदम ही चली कि मुझे फिर से किसी ने आवाज लगाई रुको! मैंने फिर पीछे मुड़कर देखा मुझे फिर कोई नहीं दिखाई दिया!लेकिन इस बार मुझे पीले गुलाब में किसी व्यक्ति के होने का आभास हो रहा था! मैं बहुत डर गई थी उस समय!मैंने वहां से भागने की कोशिश की!पीले गुलाब ने मुझसे कहा कि डरो मत! मैं डर के कारण थर थर कांप रही थी लेकिन मेरे पैर भागने की कोशिश नहीं कर पा रहे थे!मैंने डरते डरते पीले गुलाब से पूछा,कि मैंने तो लाल गुलाब की कलम लगाई थी यहां पर……………..पर यहां पीला गुलाब कैसे? ऐसा कैसे हो सकता है?
पीले गुलाब ने मुझसे कहा ,क्योंकि मुझे पीला गुलाब पसंद था लाल गुलाब नहीं!मेरी अंतिम इच्छा भी यही थी कि सब मेरे शहीद होने पर पीले गुलाब मुझे समर्पित करें!पीले गुलाब ने मुझसे कहा लेकिन तुम दुखी ना होना तुमने वही फूल लगाया जो तुम्हें पसंद था! और तुम्हारे पसंद की लाल गुलाब की कलम पर, जो मुझे पसंद था वैसा फूल आया पीला गुलाब!इसलिए मैं शाम को खिलता हूं दिन में नहीं, वरना अगर किसी ने लाल गुलाब की कलम पर पीले गुलाब का फूल खिलते हुए देख लिया तो,यह दुनिया बड़ी जालिम है मुझे तोड़कर इस कलम से अलग कर देगी,इसमें मेरी आत्मा बसती है अब,लाल गुलाब की कलम में!
यह सब बातें मेरी समझ से समय बाहर थी! लेकिन अब मैं रोज शाम को पीले गुलाब को देखने के लिए आने लगी थी! पीले गुलाब की और मेरी दोनों की खूब बातें होने लगी थी! 1 दिन पीले गुलाब की आत्मा ने मुझसे कहा तुम्हें कुछ मांगना हो तो मुझसे मांग लो! मैंने पीले गुलाब की आत्मा से तुरंत एक चीज मांग ली थी उसी समय! कि मैं जितने भी पेड़ पौधे कहीं भी लगाऊं उनमें तुम्हारी आत्मा निवास करके उनको जिंदा रखने में हमेशा मेरी मदद करेगी!पीले गुलाब ने मुझसे कहा कि ऐसा ही होगा अब से, तुम जहां भी पेड़ पौधे लगाओगी, मेरी आत्मा उस पेड़ पौधे में निवास करके उस पौधे को जिंदा रखने में सहायक होगी!
मैंने आगे पीले गुलाब से पूछा,कि तुम आत्मा क्यों बन गए हो?क्या तुम्हें मुक्ति नहीं मिली?पीले गुलाब की आत्मा ने मुझे बताया,कि मैं युद्ध के मैदान में शहीद होकर इस दुनिया से नहीं गया था,मैं तो कोरोना काल की वजह से इस दुनिया से गया था,जब मेरा ऑक्सीजन लेवल बहुत कम हो गया था! मैंने पीले गुलाब से कहा, कि कोरोना काल में तो बहुत लोग इस दुनिया से गए थे,लेकिन आपके जाने के बाद भी आपकी आत्मा मेरे द्वारा लगाई गई लाल गुलाब की कलम में कैसे आ गई?पीले गुलाब ने मुझे बताया कि मुझे इस दुनिया से जाने के बाद आभास हुआ,कि मैंने एक भी पेड़_पौधा आज तक नहीं लगाया था अपने हाथों से,जब तक मैं इस पृथ्वी पर रहा!लेकिन कोरोना के कारण, ऊपर जाने के बाद मेरे मन और मस्तिष्क में सिर्फ एक ही बात रही कि मुझे ढेर सारे पौधे लगाने थे पृथ्वी पर,इसी कारण मुझे मुक्ति नहीं मिल पा रही थी! लेकिन शरीर भी नहीं मिल पा रहा था दूसरा!
इसीलिए मैं किसी पवित्र हाथों का इंतजार कर रहा था जो मेरी इच्छा को पूरा कर सके!और वह पवित्र हाथ मुझे तुम्हारे नजर आए! इसीलिए तुम्हारे द्वारा,मेरे लिए लगाई गई लाल गुलाब की कलम में,मेरे प्राण फिर से समाए! इसीलिए तुम्हें लाल गुलाब की कलम में,मेरी आत्मा पीला गुलाब नजर आए!पीला गुलाब और मैं दोनों खूब मुस्कुराए! इसीलिए मेरे द्वारा लगाए गए पौधे बिना खाद के भी बड़े हो जाए!
तो बात इतनी सी है कि बस आपके हाथ नेक हो,उन नेक हाथों को सहारा देने के लिए पूरे ब्रह्मांड से शक्ति आपके साथ खुद जुड़ जाएगी किसी भी रूप में!सैनिक और पेड़ पौधे दोनों एक समान है,दोनों ही हमारे प्राणों की रक्षा करते हैं दोनों का सम्मान करना हमेशा सीखो!
लेखिका डॉ हर्ष प्रभा उत्तर प्रदेश गाज़ियाबाद समाज सेविका पर्यावरणविद एवं लेखिका 🌹
Tagged in : #animal #birds#environment #CM-UP #CMbhupeshbaghel #CMUK #CMUP #crime #police #doctor #drugs