** ** भारतीय इतिहास में सबसे खूबसूरत जिस महिला का जिक्र किया गया है उसका नाम था आम्रपाली। आम्रपाली को अपनी खूबसूरत की कीमत भी चुकानी पड़ी थी। सबसे खूबसूरत महिला के रूप में प्रसिद्ध आम्रपाली को अपने खूबसूरती का कीमत वैश्या बनकर चुकानी पड़ी।

ये जीवन आम्रपाली ने खुद नहीं चुना था बल्कि वैशाली नगर की शांति बनायें रखना चाहती थी इसलिए उसने किसी से भी विवाह नहीं किया था। आम्रपाली ने सालों तक वैशाली के अमीर लोगो को मनोरंजन किया। लेकिन जब वे गौतम बुद्ध के सम्पर्क में आई तो बौद्ध भिक्षुक बन गई।

आपको बता दे कि भगवान बुद्ध के सम्पर्क मे ऐसे कई लोग आये जो अपने असल जीवन में कुछ और थे ओर भगवान बुद्ध से मिलने के बाद  पूरी तरह बदल गये। भगवान बुद्ध के साथ रहने और उनके विचारों का कमाल था कि कई लोग अपना पुराना जीवन छोड़कर उनके साथ हो गए। आम्रपाली भी उनमें से एक थी, जो वेश्या से बौद्ध भिक्षुक बनी।

आम्रपाली कौन थी आम्रपाली के माता पिता का पता नहीं लेकिन जिन्होंने उसको पाला था उन्हें वह आम के पेड़ के नीचे मिली थी इसलिए उसका नाम उन्होंने आम्रपाली रख दिया था। आम्रपाली इतनी खूबसूरत थी कि उन्हें देखने के बाद कोई भी अपनी आंखे उन पर से हटा ही नहीं पाता था। लेकिन उसकी यही खूबसूरती, उसका यही आकर्षण उसके लिए शाप बन गया। एक आम लड़की की तरह वो भी खुशी-खुशी अपना जीवन जीना चाहती थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। वह अपने दर्द को कभी बयां नहीं कर पाई।

**आम्रपाली जब बड़ी हुई ** आम्रपाली जैसे जेसे बड़ी हुई उसकी खूबसूरती बढ़ती गई और जो कोई भी उन्हें देखता अपनी पत्नी बनाने के बारे में ही सोचता। लोगो में आम्रपाली की दिवानगी एक जुनून बन गई जिसके वजह से आम्रपाली को पाने के लिए कोई भी किसी हद तक जा सकता था।  आम्रपाली के माता-पिता जानते थे की आम्रपाली को जिसको भी सौपा गया तो बाकी के लोग उनके दुश्मन बन जाएंगे और वैशाली में खून की नदिया बह जाएंगी। इसीलिए वह किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे थे। इसी समस्या का हल खोज ने के लिए एक दिन वैशाली में सभा का आयोजन हुआ।

इस सभा में मौजूद सभी लोग आम्रपाली से विवाह करना चाहते थे तो निर्णय करना मुश्किल हो गया था। इस समस्या का सुलझाने के लिए अलग अलग विचार सामने आये लेकिन कोई समाधान नहीं हो सका। लेकिन आखिर में जो निर्णय लिया गया उसने आम्रपाली की तक्दीर को अंधेरे में धकेल दिया। सर्वसम्मति के साथ आम्रपाली को नगरवधू यानि वेश्या घोषित कर दिया गया।

आम्रपाली और बुद्ध बुद्ध अपने एक प्रवास में वैशाली आए। उनका एक शिष्य भिक्षा मांगने आमृपाली के महल पहुंचा। आमृपाली उसे देखते ही प्रेम में पड़ गई। आमृपाली ने उससे कहा कि वर्षाकाल में वो उसके महल में रह सकता है। भिक्षुक ने कहा वो बिना बुद्ध की आज्ञा के कहीं नहीं रूक सकता। आम्रपाली के निवेदन से उसने कहा कि वह बुद्ध से पूछकर जवाब देगा। बुद्ध ने उसे आज्ञा दे दी, क्योंकि उन्हें अपने धम्म पर विश्वास था।

चार महीने तक आमृपाली उस भिक्षुक को आकर्षित करने की कोशिश करती रही मगर उसका कोई प्रभाव भिक्षुक पर नहीं हुआ। चार महीने बाद जब भिक्षुक वापस बुद्ध के पास लौटा तो आम्रपाली भी बुद्ध की शरण में पहुंची और बोली मैं आपके सिखाएं धम्म के आगे नतमस्तक हूं। मेरा कोई भी प्रयास आपके भिक्षुक को मेरी और आकर्षित नहीं कर सका। मैं भी आपकी शरण में आना चाहती हूं। तभी से आम्रपाली बौद्ध भिक्षुणी हो गई और पूरे जीवन उसने उसी रूप में बिताया।

एक शरीर जो खुशी से समर्पित या मजबूरी में क्या नाम दें ?

**बस हर इंसान कसमकस में **

वेश्यावृति एक पेशा या मजबूरी

वैश्या एक आम नारी ही हैं । फिर ऐसा क्या जुड़ जाता हैं उसके नाम में या ,क्या जुड़ जाता हैं उसके कर्म में कि,बदनाम उसके नाम की हर गलियां ।। मजबूरी वजह हैं या आर्थिक परिस्थितियां हैं जिम्मेदार । जो, वेश्यावृति बन गया हैं एक धंधा । मैं! हैरान हूं बस हैरान जिस्म के अंग अंग को कौन खुद से करना चाहता हैं लहूलुहान कौन,खोना चाहता हैं अपना आत्मसम्मान । क्या, इसके लिए कसूरवार हैं सिर्फ नारी पुरुष या समाज वर्ग हैं क्या,बिलकुल निर्दोष ।।

![]स्नेहा कृति (रचनाकार) कानपुर

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