![]लेखिका डॉ हर्ष प्रभा उत्तर प्रदेश समाज सेविका पर्यावरणविद एवं लेखिका
यूं तो मां का स्थान पूरी दुनिया में छोड़ो,पूरे ब्रह्मांड में भी कोई नहीं ले सकता है! मां सिर्फ मां ही होती है,जो 9 महीने अपनी कोख में अपने बच्चे को रखकर पालती है!और यह सिर्फ एक मां ही कर सकती है कोई और नहीं! वह अथाह तकलीफ सहकर भी मुस्कुराती है, हंसती है,क्योंकि उसे अपने बच्चे से बहुत ज्यादा प्यार, और लगाव जो हो जाता है! बिना देखे किसी से इतना प्यार और लगाव!ऐसा क्यों होता है?क्योंकि 9 महीने एक मां अपने खून से जो,अपने बच्चे को सींचती है अपनी कोख के अंदर!
देखते ही देखते अब यह सच्चाई मां बनने की कुछ बदलने लगी थी 21वीं सदी में ही!मैंने बहुत सारी महिलाओं को यह कहते हुए खुद सुना है,कि मां बनना कोई आसान काम नहीं है जिसमें दूसरा जन्म ही लेना पड़ता है!और दूसरी बात हम इतना कमाती हैं,कि हम किराए की कोख लेकर बच्चा तो कभी भी खरीद सकते हैं!बच्चा खरीदना मैं इसलिए कहूंगी, क्योंकि वहां एक मजबूर,महिला पैसों के लिए ही तो मां बनने को तैयार होती है! जिससे पैसे तय करके किराए की कोख खरीद ली जाती है कुछ शर्तो के साथ! और ऐसा मैं ही नहीं देख रही हूं,ऐसा आप भी सब देख रहे हैं,कि 21वी सदी में कैसे महिलाएं मां बनने से परहेज करती हुई जा रही है? कभी अपने सौंदर्य को बचाने के चक्कर में,कभी पैसे कमाने के चक्कर में, और इन दोनों ही चक्कर में फिर तीसरा चक्कर बढ़ती उम्र का आता है!
आज देखा देखी एक होड़ सी लगी हुई है कि आज 40% से ज्यादा कामकाजी महिलाओं के पास मां बनने का भी समय नहीं है! और वह महिलाएं इसी चक्कर में किराए की कोख खरीद लेती हैं! और इन्हीं कामकाजी महिलाओं की देखा देखी आज बाकी महिलाएं भी इसकी नकल करने लगी है,कि हमें अपने सौंदर्य को खराब नहीं करना है मां बनकर, हम भी किराए की कोख खरीद लेंगे जब बच्चे की जरूरत होगी!इनका कहना है कि माना हम कामकाजी महिलाएं नहीं हैं, लेकिन हमारे पास भी तो पैसे की कमी नहीं है! हमारे पति खूब कमाते हैं!
इसी चलन के चलते चलते 22 वी सदी में महिलाओं की कोख ही विलुप्त हो गई ! क्योंकि यह प्रकृति का नियम है जिस चीज का उपयोग आप नहीं करोगे,वह चीज अपना काम करना बंद कर देगी,वह विलुप्त हो जाएगी!ऐसे ही शरीर की संरचना बनाई है ईश्वर ने!इसलिए 22 वीं सदी में,लैब में बच्चे तैयार किए जाने लगे थे! जिनको बच्चे की जरूरत होती थी,वह माता-पिता लैब में आते थे और लैब के असिस्टेंट को पूरी जानकारी देते थे,कि उनको किस तरह का बच्चा चाहिए!उसी तरह के केमिकल का चुनाव करके लैब के असिस्टेंट बच्चे को तैयार करने के लिए कार्य करते थे!इस कार्य में 1 महीने का समय माता-पिता को दिया जाता था, कि आपका बच्चा 1 महीने में तैयार हो जाएगा!आप आकर ले जाना! अब यहां सब कार्य लैब में हो रहा था,इसलिए माता पिता अपने हिसाब से,गुण सुंदरता और जो भी उनको अपने बच्चे में चाहिए होता था,अपने हिसाब से बच्चे को तैयार करवा लेते थे लैब में 22 वीं सदी में!
एक दिन लैब में एक महिला और पुरुष आए,दोनों ही बहुत सुंदर थे,इसी के साथ साथ,दोनों ही अच्छे पदों पर कार्यरत थे,दोनों ही बहुत बुद्धिमान,और उनके कार्यों की चर्चा देश दुनिया तक थी! माता-पिता बनने के उद्देश्य से वो दोनो लैब में आए थे!उन्होंने लैब असिस्टेंट से कहा कि अब हमें माता-पिता बनना है, हमारे लिए बच्चा तैयार कर दीजिए! लैब के असिस्टेंट ने कहा कि सर आप फॉर्म भर दीजिए, कि आपको किस तरह का बच्चा चाहिए,और कौन-कौन से गुण आपको बच्चे में चाहिए! दोनों महिला और पुरुष फार्म को भर देते हैं और उसमें जैसा उनको बच्चा चाहिए था सब लिख देते हैं!लैब असिस्टेंट उन दोनों से कहता है, कि आप एक महीने बाद आकर अपना बच्चा ले जाना!
एक महीना बीत जाता है!महिला और पुरुष दोनों बच्चे को लेने के लिए लैब में जाते हैं! वहां जरूरी कागजात पूरे करने और बच्चे की जो कीमत होती है उसको अदा करने के बाद बच्चा इन दोनों महिला पुरुष के हाथों में सौंप दिया जाता है और लैब असिस्टेंट उनको कहता है,कि आपको बहुत-बहुत बधाई हो आप माता पिता बन गए हैं! लैब असिस्टेंट आगे कहता है,कि अगर आपको बच्चे में कोई कमी लगे तो,आप हमें निसंकोच बता सकते हैं, हम आपको उसी कीमत में दूसरा बच्चा तैयार करके देंगे! इस बच्चे को नष्ट करके!ऐसा 22 वी सदी में हो रहा था लैब में!वैसे तो ऐसा 21वीं सदी में भी हो रहा था मां की कोख में,21वी सदी में सिर्फ कन्या भ्रूण को नष्ट किया जाता था लेकिन 22 वीं सदी में दोनों के ही नष्ट करने का काम हो रहा था जिसमें कुछ भी कमी हो बच्चे में!माता-पिता दोनों बच्चे को लेकर खुशी-खुशी घर आ गए थे!
धीरे-धीरे समय बीतने लगा और समय बीतने के साथ, पता चला कि बच्चे को तैयार करने में कुछ कमी रह गई थी उस समय! उसके कारण ही बच्चा बोलने में सक्षम नहीं था और रंग भी उसका गहरा काला हो गया था बाद में! यह सब देख कर,बच्चे के माता_ पिता को बहुत गुस्सा आया और वह गुस्से में बच्चे को उठाकर,लैब असिस्टेंट के पास ले गए और उससे बोले कि इस बच्चे को नष्ट कर दीजिए!और जैसा हमने कहा था,वैसा बच्चा तैयार करके दीजिए! लैब असिस्टेंट ने कहा ठीक है,इस बच्चे को हम आज शाम को नष्ट कर देंगे!और आपने जैसा कहा था वैसा बच्चा आपको तैयार करके देंगे,जो हमसे गलती हुई है, उसके लिए हम क्षमा चाहते हैं! जब माता पिता बच्चे को लैब असिस्टेंट की गोद में दे रहे थे, तब बच्चा बड़ी बड़ी आंखों से मां की तरफ देख रहा था!और नन्हे नन्हे हाथों से मां के आंचल को पकड़े हुए था! लैब असिस्टेंट ने बच्चे के हाथ से मां का आंचल छुड़ा दिया था! माता-पिता दोनों वापस घर आ गए थे लैब से,और दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त हो गए! लेकिन………………
मां को बार-बार बच्चे की बड़ी बड़ी आंखें दिखाई दे रही और नन्हे नन्हे हाथों से आंचल का पकड़ना! न जाने क्यों 22 वीं सदी में आज मां की ममता फिर से जाग रही थी! पूरे दिन मां का काम में मन नहीं लगा,बार-बार बच्चे का ख्याल आता रहा कि इसमें बच्चे की क्या गलती है? और छह महीने जो उसने बच्चे के साथ समय बिताया था उसको याद करने लगी!
यह सब बातें सोच सोच कर मां से रहा नहीं गया! उसने अपने पति से बात की, कि चलो लैब में चलते हैं बच्चे को वापस ले आते हैं! अब वह जैसा भी है हमारा बच्चा है!यह सब सुनकर पति को बुरा लगा! और पति ने कहा कि वह बच्चा हमारे किसी काम का नहीं है और तुम क्यों चिंता करती हो,लैब वालों ने पहले ही फॉर्म में लिखा हुआ था, कि अगर बच्चे में कोई कमी रह जाती है, तो वह दूसरा बच्चा तैयार कर के देंगे,और इस बच्चे को नष्ट कर देंगे!
4:00 बज चुके थे! इधर मां का किसी काम में मन नहीं लग रहा था! बार-बार बच्चे का ख्याल मन में आ रहा था! न जाने 6 महीने में कौन सा लगाव इस मां को बच्चे से हो गया था!ऐसा तो 22 सदी में पहली बार देखने को मिल रहा था!मां से रहा नहीं गया, वह दौड़ी दौड़ी लैब की तरफ भागी! और वहां जाकर, लैब असिस्टेंट से कहती है कि कहां है मेरा बच्चा? लैब असिस्टेंट मां से कहता है कि बच्चे को नष्ट करने के लिए अंदर ले जाया गया है! आप चिंता ना करें,आपको नया बच्चा, जैसा आपने कहा था, वैसा तैयार करके दे दिया जाएगा! मां ने कहा कि मुझे मेरा बच्चा वापस चाहिए अभी! लैब असिस्टेंट ने कहा,कि यह आप क्या कह रही हैं, इससे हमारी लैब की बदनामी होगी कि हमारी लैब से गलती हुई है पहली बार!
मां ने कहा मुझे तुम्हारी गलती स्वीकार है!मुझे मेरा बच्चा चाहिए!आज के बाद तुम्हारी लैब की बदनामी नहीं सब जगह तारीफ होगी! बस मुझे मेरा बच्चा दे दो! इधर बच्चे का पिता यह सब सुनकर लैब में आ चुका था! और पत्नी को समझाने की कोशिश कर रहा था, कि तुम यह क्या कर रही हो?वह बच्चा हमारे किसी काम का नहीं है! पति आगे कहता है कि हम 22 वीं सदी के हैं, और कोई भी बच्चा इस सदी में ऐसा नहीं है,इसलिए इस कमी के साथ हम सब का सामना कैसे करेंगे? इस बच्चे को रखकर!
मां ने कहा मुझे किसी से कोई लेना देना नहीं है मुझे मेरा बच्चा चाहिए,चाहे कोई सी भी सदी हो! यह सब सुनकर पति को गुस्सा आया और पति ने कहा, कि मैं तुम्हें अभी छोड़ दूंगा अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी! पत्नी ने कहा कि आज तुम मुझे,बेशक छोड़ दो, लेकिन मैं अपने बच्चे को नहीं छोड़ सकती हूं, क्योंकि मैं एक मां हूं और मां, मां होती है चाहे वह किसी भी सदी की हो! मां की जिद पर,बच्चे को लैब से निकालकर लाया गया और मां की गोद में दे दिया गया! मां बच्चे को सीने से लगाकर बहुत रोई वहीं पर बैठकर!और बच्चा भी मां को रोता हुआ देखकर, मां मां कहकर चिल्ला उठा था! यह क्या यह सब देखकर वहां खड़े सभी व्यक्ति आश्चर्यचकित हो गए थे!क्योंकि विज्ञान एक तरफ, और मां की ममता एक तरफ !आज एक मां की ममता ने फिर से एक बच्चे की आवाज को जिंदा कर दिया था,जो काम विज्ञान भी नहीं कर पाया था 22 वीं सदी में भी!
तो बात इतनी सी है कि हम कितनी ही तरक्की कर ले,लैब में प्यार, इमोशन,फिलिंग्स,भावनाएं, नहीं बनाई जा सकती हैं चाहे हम किसी भी सदी में हो! उसके लिए अपनत्व की खुशबू खुद जागनी पड़ती है!
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