विधानसभा की तस्वीर साफ करेगी की पिछले घटना क्रम क्या फिर दोरहाए जायेंगे या कुछ बदलाव के साथ नए घटना क्रम सामने आयेंगे आइए जाने ।
बहुमत की अंकगणित से राज्यसभा में अनगिनत पद होते हैं जिसका असर कृषि कानून देख चुका है किसान इस देश का और अनेक बिल जो दोनो सदनो में पास हुए ।
उत्तरप्रदेश के चुनाव में बीजेपी का बहुत दूरी का नाता था पर मोदी लहर ने बसपा और सपा की लहर को थाम लिया और पूर्ण बहुमत में 2017 में सरकार योगी के नेतृत्व में सत्ता आसीन हुए । कांग्रेस अगर पांच राज्यों में जीत हासिल करती है तो 2024 की डगर आसान हो जाएगी पर किसान का मसला खड़ा खड़ा रहेगा जो भारतीय राजनीति को नई दिशा और दशा दे सकता है । बीजेपी अगर पांचों राज्यों में कम मार्जिन से जीत हासिल करती है या हार जाती है तो सीधा असर 2024 के चुनाव पर पड़ेगा ।
भाजपा की हार जीत का असर सीधा राष्ट्रपति के चुनाव पर पड़ता है इन पांच राज्यों के चुनाव पर विशेषकर उत्तरप्रदेश के चुनाव का।
आम आदमी पार्टी की पंजाब में पूर्ण बहुमत की सरकार अगर आती है तो केजरीवाल का वजन राष्ट्रीय राजनीति में बहुत अच्छा होगा और कई राजनीतिक मायनों पर परिवर्तन देखा जायेगा किसान आंदोलन को भी बल मिल सकता है ।
इसके साथ ही इन चुनावों के राष्ट्रीय दलों का बहुत कुछ दांव पर लगा है. इस बजह से ये जानना आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली उनके मुताबिक बीजेपी के पास वहीं बरिश पत्रकार अदिति अभी तक तीसरे मोर्चे में आम पाँच राज्यों में कांग्रेस के सामने आम हो जाता है कि इन राज्यों में की विधि के हिसाब से प्रत्येक अभी 398 सांसद है और सभी फड़नीस कहती है, नतीजे जैसे भी आदमी पार्टी ट्रटमेंट नहीं चुनीती पंजाब में अपना किला हुए चुनाव का असर किन पर कैसे चोट का अपना बेटेज होता राज्यों में विधायकों की संख्या आप दोनों सूरत में असर बैंड मिलती है, लेकिन पंजाब चुनाव बचाने की है पड़ेगा.
उत्तराखंड में बीजेपी की जीत अगर होती है तो जाति समीकरण और एक पुराना क्रम टूटेगा दो राष्ट्रीय पार्टियों की जीत का एक बार कांग्रेस और एक बार बीजेपी ।
पांच राज्यों के नतीजे 10 तारीख को तय करेंगे भारतीय राजनीति के दशा और दिशा
संपादकीय डेस्क से
दांव पर राजनीति
चुनावी सरगर्मियां अपनी चरम सीमा पर हैं हर पार्टी,हर नेता और हर मंत्री फिराक में हैं । अपने अपने दांव चलने में, हर कोई चाहता हैं अपने नाम का परचम लहराना गांव,कस्बा,शहर,प्रदेश और दूर देश की सीमा तक हार और जीत हो जैसे, उनके मान और सम्मान का हिस्सा, जैसे, छिन जायेगी विरासत हार और जीत के किस्से पर खैर,ये मसला निरंतर यूं ही मुद्दा बनकर उभरता रहेगा । और चर्चाओं का हिस्सा भी बनता रहेगा ।। पर,क्या सोचा हैं किसी ने भी इसके परिणाम क्या, पड़ेंगे इस राजनीति के किस्से का विकास पर । विकास (Devlopment) आर्थिक हो,मानसिक हो या हो फिर सामाजिक चुनाव (Election) का आखिर! क्या अर्थ हैं सही मायने में, इसका अर्थ हैं हम सभी देशवासी चुनकर एक ऐसा नेता या ऐसा मंत्री लाए । जो,देश राज्य,शहर और गांव,कस्बा के विकास और तरक्की के लिए बाध्य हो ।। वो,बाध्य हो ईमानदारी के लिए वो,बाध्य हो समर्पण और चहुमुखी नवीनीकरण के लिए । पार्टी कोई भी हो,नेता या मंत्री कोई भी बने । पर,हो वो शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतया निष्ठा के साथ न्योछावर हो । विकास और तरक्की के लिए बाध्य हो ।। राजनीति में शामिल न हो दुर्गंध बेमानी,चापलूसी, मक्कारी और कुंठित सोच की क्योंकि,आर्थिक सामाजिक और चहुमुखी विकास तभी संभव हैं । जब,राजनीति पारदर्शिता और निष्पक्ष होकर की जाए ।। हम एक हैं एक ऐसे देश के निवासी हैं जिसमें, अखंडता हैं,परंपराएं हैं,रीति रिवाज हैं और अनेक, अनेक जातियों और भाषाओं को आपस में एक साथ पिरो की रखने की कला भी । हमें चुनना हैं एक ऐसा नेता हमें चुनना हैं एक ऐसा मंत्री जो,सबके हित के लिए कार्य करे ।। गरीब को रोजी रोटी मिले,बेरोजगार को नौकरी मिले । महिलाओं को मान सम्मान और पूरे अधिकार मिले । दहेज के लिए कोई प्रताड़ित ना की जाए ।। न्याय और सच की दृष्टिकोण हो हर सोच का आधार, ऐसा हो प्रतिबिंब राजनीति का ।।
![]स्नेहा के चुनावी अंश कविता के रूप में ( रचनाकार)
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