लेखक शंकर साखो

जंग में सबसे ख़राब स्थिति गुलाम बनायी गयी महिलाओं की होती है।बम,गोली, बारूद के अतिरिक्त इन्हें बलात् और अपमान का भी शिकार होना पड़ता है।इनके जिस्मों को रौंदा जाता है। यातनाएं दी जाती है।इनकी बेबसी के आंसूओं और रौंदे गये जिस्मों से निकलनेवाले लहू से सैनिकों की वीरता की वीर-गाथा लिखी जाती है। पता नहीं कितनी महिलाएं गहरी वेदना की शिकार हो जाती है?इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है।हम सिर्फ उसकी तरफ ध्यान देते हैं जो युद्ध भूमि में हथियार लेकर उतरे हैं।मगर यह ध्यान नहीं देते हैं कि हथियार के बल पे ये सैनिक जिस महिला को घसीटते हुए बंकरों में ले जाते हैं,उनके साथ ये‌ सैनिक कैसा बर्ताव करतें हैं? बर्बरता और दरिंदगी की शिकार हुई महिलाएं सैनिकों के कामुकता का शिकार हो जाती है।एक नहीं कई सैनिक एक साथ नोंचते हैं इस गुलाम असहाय महिलाओं के जिस्मों को। घंटों तक, कई दिनों तक, साल दो साल तक , आजीवन दर्द से कराहती है ये महिलाएं। इन्हें दर्द से राहत देने के लिए वैक्सीन दी जाती है। इन्हें सैनिकों को संतुष्ट करने के लिए वैक्सीन दी जाती है। हज़ारों प्रकार की यातनाएं सहनेवाली ये महिलाएं क्या कभी आम जीवन जी पाती है? बिन मौत के ही मर जाती हैं ये महिलाएं।धिक्कार है, घृणा है ऐसे योद्धा पर जो जंग के नाम पर नोंचते हैं किसी की वेदना को,संवेदना को, चेतना को ,वसन को और शरीर को। आखिर क्या मिलता है ऐ सैनिक तुझे मरी हुई लाश के साथ बलात् करने में? तुम हिंसक हो सकते हो, तुम बर्बर हो सकते हो मगर बर्बरता और दरिंदगी की सारी सीमाएं लांघ दोगे ऐसा कभी सोचा भी नहीं था। अगर तुम ऐसा करते हो तो‌ तुम सैनिक नहीं अत्याचारी हो, मानवता को कलंकित करने वाले दानव हो। @ शंकर

Tagged in : #birds#environment #CM-UP #CMbhupeshbaghel #CMUK #CMUP #covid19 #covid19#MPC#mudra #crime #crime #police

Categorized in : All News देश स्पेशल