आज मनुष्य रोटी ,कपडा मकान और जल के लिए तो चितित है,पर शुद्ध हवा (आँकसीजन )की प्राप्ति के लिए तनिक भी सोच विचार नही कर पा रहा है। ज्ञानी भी अज्ञानी बने हुए है ।आज एक आदमी को शुद्ध हवा प्राप्त करने के लिय चौबीस पेडो की आवशयकता होती है वृक्षारोपण से वायू मण्डल को शुद्धता ,धरती को उपजाऊपन ,जल स्रोत की प्रचुरता ,फलो की प्राप्ति ,इंधन की प्राप्ति आदि आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकती है। पर यहां तो लाखों पेड़ काट जंगल के जंगल साफ किए जा रहे विकास के नाम पर ।

धरती पर हवा पानी मिट्टी और पौधे के बीच संतुलन है। वन पहाड को स्थिर रखते है। वर्षा के पानी को संचित करते है।हवा के तेज को रोकती है।वन हवा और पानी से होने वाले भूक्षरण को भी रोकती है। वन शुद्ध हवा को पाने के लिए छन्नी का काम करती है ।जितना घना जंगल होगा शुद्ध ठंडी हवा मिलेगी और तूफान के वेग को शांत करेगा ।

एक वृक्ष हमे क्या नही देता है। ५०टन वजन का एक पेड़ ५०वर्ष तक जीवित रहता है तो वह दो लाख का रुपये का आँकसीजन ,३लाख रुपये का जल चक्र नियंत्रण २लाख का पक्षी कीट तथा जीवन संरक्षता।फल फुल लकडी भी जोडे तो पता चलता है की ५० साल में लगभग ८०लाख का लाभ देती है ।

आज सभी लोग कहते अधिक गर्मि है ,जाडा है समय पर वर्षों नहि मौसम का मिजाज ऊथल पुथल है।

![]डॉ धर्मेंद्र कुमार **पीपल नीम तुलसी अभियान **संस्थापक

ईस समस्याओं को हम आम आवाम ने बनाया है । ईसका समाधान भी हम आप मिलकर वृक्षारोपण अभियान को बढाना होगा। आज शोषण ,हिंसा और तनावतावरण में पयार्वरण की चुनौती शायद पूरे देश को एक सूत्र में बाँध सकती है।

डॉ धर्मेंद्र कुमार **पीपल नीम तुलसी अभियान **संस्थापक

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