आत्माराम त्रिपाठी की विशेष रिपोर्ट बांदा जनपद में समाहित चित्रकूट धाम कर्बी जो आज विभाजित कर अलग जिला चित्रकूट धाम कर्बी के नाम से जाना जाता है साथ ही डकैतों के उदय और अस्त के लिए भी इसी जनपद की चर्चा होती है।
इस क्षेत्र को लोगों की जुबान में पाठा क्षेत्र कहा जाता है पाठा का नाम आते ही यंहा अनगिनत समास्याओं का अंबार है जिसमें जल की समास्या कहीं कहीं बिकराल है उसके बाद आदिवासियों की जिनका जीवन जंगल से जुड़ा है आजभी वह इस चकाचौंध भरी दुनिया से अलग थलग है भोले हैं निश्चल निशकपट सादगी भरा मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हुए जीवन जीते हैं। हम बात कर रहे थे दस्युओं के उदय और अस्त के बारे में तो यह सायत ही किसी से छिपा हो की इन डकैतों का उदय समय पर शासन प्रशासन द्वारा न्याय न मिलपाने के कारण पीड़ित बागी तेवर अपनाने को बाध्य हो जाता है और वही बागी डकैत जब समय के साथ-साथ उग्र रूप धारण कर आमजनमानस के अमन-चैन को रौंदना प्रारंभ कर देता है तो शासन प्रशासन की नींद खुलती हैं लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है तब वह उस डकैत के खात्मे पर कार्य करने लगती है। किंतु इसी मध्य क्षेत्र में दहसत के पर्याय बन चुके इन डकैतों को राजनैतिक संरक्षण के साथ जातीए संरक्षण मिल जाता है जिसमें इनका इस्तेमाल राजनेता चुनाव के समय अपने पक्ष में वोट डलवाने हेतु करते हैं वे समाज अपना दबदबा कायम रखने हेतु। चित्रकूट धाम कर्बी जिसे पठारी क्षेत्र के नाम से जाना जाता है दस्यु सम्राट ददुआ उर्फ शिवकुमार जिन्हें उस समय के सांसद का खुला संरक्षण प्राप्त था के पहले भी डकैत थे जिनका झोला लेकर चलता था यह दस्यु सम्राट किंतु एक दूसरे डकैत के साथ उसी काल में रहकर डकैती के गुर सीखने के बाद अलग हो लंबे समय तक अपनी बादशाहत कायम रखने में सफल रहा ददुआ के समय में ठोकिया खड्ग सिंह धर्मा गौरी कालिंजर किले में नर संघार करने वाला पप्पू यादव सहित कितने डकैत हुए जो आमजन व शासन प्रशासन के लिए चुनौती बन गये। इन सबके पीछे अपनी अपनी अलग कहानी रही जिनका खात्मा हुआ और डकैतों के एक युग की समाप्ति भी। किंतु यह कहना मुश्किल है कि पाठा क्षेत्र डकैतों से विहीन हो गया क्योकी यहां डकैत बनते नहीं बनाए जाते हैं इनकी उत्पत्ति समाज कहीं अपने दबदबे के लिए बनाता है तो राजनेता अपने पक्ष में वोट डलवाने हेतु य शासन प्रशासन खुद इनका निर्माण करता है लोहे से लोहे की काटने की नीति पर चलकर पर हम भी शासन प्रशासन की हां में हां मिला रहे हैं और कह रहे हैं कि चित्रकूट धाम कर्बी का पाठा क्षेत्र डकैत के आतंक से मुक्त हो गया है।
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