श्याम सुन्दर त्रिपाठी के साथ सुमित त्रिपाठी की रिपोर्ट
बांदा जिले के ग्राम पड़मई से
गौबंश तड़प कर मरने को मजबूर प्रशासन मौन कागजी घोड़े गोवंश की रक्षा सुरक्षा में रेस जीतने की होड़ में
दोनो पैरों से घायल जख्मी नंदी पड़ा है।पर प्रशासन सुध नहीं ले रहा राष्ट्रीय बजरंग दल के सहयोग से चल रहा उपचार एवं चारा पानी की व्यवस्था कई बार कहने पर पशु चिकित्सक एक बार पहुंचकर खानापूरी कर चले आए दोबारा जाने की आवश्यकता नहीं समझी राष्ट्रीय बजरंग दल के गौ सेवा प्रमुखएक तरफ जहां राष्ट्रीय बजरंग दल सड़कों से घूम घूम कर जख्मी गोवंश को उठाकर अपने द्वारा चलाए जा रहे जख्मी गोवंश आश्रय स्थल पर पहुंचा रहा है इलाज कर सही भी कर चुके हैं वहीं अब तक प्रशासन ने जख्मी गोवंश के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की है जहां पर जख्मी गौवंश का इलाज हो सके कहने के लिए तमाम गौशाला कागजों पर चल रही हैं परंतु जिंदा गौवंश भी मरने की कगार पर है जख्मी गोवंश तो भगवान भरोसे हैं।प्रशासन की अनदेखी और संरक्षण न मिलने के कारण गोवंश सड़कों पर सिसक रहा है। कोई वाहन की चपेट में आकर दम तोड़ जाता है तो कोई बुरी तरह चोटिल हो रहा है। रत्ती भर उगी घास चरती गाय या खा रहीं मिट्टी . महिलाएं आपस मे बात करती हैं कि अभी क्या ? जरा और ठंड आने दो फिर एक एक करके गाय की लाश गिरने लगेगी। उन्होंने पिछले वर्ष की बात दुहराई कि पिछले साल की ठंड मे जाने कितनी गाय मर गईं।
एक तरह से कहा जाए तो गाय के नसीब मे अब मौत है। वह पहले कटती थी , काटी जाती थी। एक बार मे गाय को मौत मिल जाती थी परंतु इस प्रशासन की भूमिका में गाय तड़प – तड़प कर मरने को मजबूर है। वहीं कागज मे सबकुछ दुरूस्त रहता है और कागजी घोड़े गोवंश की रक्षा – सुरक्षा मे अपनी रेस जीत रहे हैं।
यह हकीकत है कि रेल की पटरी के किनारे और सड़क के पीछे तक शायद ही किसी की नजर पहुंचे परंतु संवेदनशील मन और आत्मा से देखा जाए तब संभव है कि हृदय विदारक दृश्य से दिल दहल जाए।
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