श्याम सुन्दर त्रिपाठी के साथ सुमित त्रिपाठी की रिपोर्ट बांदा उत्तर प्रदेश में साल 2017 में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो जो काम उनकी प्राथमिकता की लिस्ट में थे, उनमें से सबसे अहम प्रदेश में गायों गौबंशो की रक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करना था. योगी आदित्यनाथ ने अपनी इस प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए ना सिर्फ गायों और गोवंशों की सुरक्षा के लिए तमाम इंतजाम किए बल्कि कयी नियम-कानून बना डाले व इसके लिए भारी भरकम बजट का भी प्रावधान दिया. जिससे गायों व उनके बंसजो की रक्षा के लिए पैसों की कोई कमी ना रहे।अब हम बात करते हैं की धरातल की क्या

योगी की की मंशा पर अधिकारियों ने कार्य किया तो यंहा पाया की इस कार्य में लगे प्रशासनिक अधिकारियों सहित ग्राम प्रधानों ने उनकी मंशा में पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

इसके लिए प्रदेश मे बिक रही गायों पर भी काऊ सेस लगा दिया. जिलों मे डीएम, ग्राम प्रधानों और निगम अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी तय कर दी कि अगर लापरवाही हुई तो खैर नहीं. प्राइवेट एनजीओ और लोगों को गोवंशों के शेल्टर बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया. लेकिन इस बजट, आदेश और योगी जी की मंशा पर अधिकारियों ने ऐसा पलीता लगाया कि प्रदेश में गायों और गोवंशों की हालत बद से बदतर होती चली गई. मरने को मजबूर जानवर

गो-सदन और गौशालाओं के नाम पर प्रदेश के तमाम जिलों में जानवरों को ऐसे दड़बे मे बंद कर दिया गया जहां गर्मी, बारिश और ठंड मे सिर छुपाने के लिए छत नहीं, पीने के लिए पानी नहीं, खाने के लिए ठीक से चारा नहीं. नतीजा ये है कि जानवर वहीं पर मरने के लिए मजबूर हो गए जहां उनके सबसे सुरक्षित होने का दावा किया गया।

जेल से बदतर हैं जानवरों के लिए बने शेल्टर

हम बात कर रहे है बांदा जिले के ग्राम पड़मई की जहां गयो की हालात इतनी बदतर हैं कि गौशालाओं में जानवरों के पीने के लिए पानी और खाने के लिए भूसे का इंतजाम ही नहीं है. पानी के लिए बनाये गए हौज में या तो पानी सड़कर कीचड़ में बदल गया या फिर पीने के पानी की व्यवस्था ही नहीं है. खाने के लिए तय चारा दो-तीन दिन में एक बार आता है, वो भी इतना कम कि मौजूद जानवरों में से आधे जानवरों का पेट भी ना भर सके. अकेले बांदा जिले में दो सौ से ज्यादा शेल्टर्स हैं. जिन्हें जिला प्रशासन की देख-रेख में गांव के प्रधान या बांदा जिले का नगर निगम चलाता है. हर जगह गांववाले मानते हैं कि इससे बेहतर तो ये होता कि इन बेजुबान जानवरों को सड़क पर ही रहने दिया जाता. शेल्टर्स में इस बुरे हालात में रहकर जानवर घुट-घुटकर मरने के लिए मजबूर हैं. इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। स्थित यह बन गई है कि गौ गौबंश घुट घुट कर अपना दम तोड रहा है उसे दोनों तरफ से मौत ही मौत मिल रही है गौशालाओं में घुट घुट कर मरने की मौत तो सड़क पर बैठने में फर्राटे भर रहे ओवरलोडिंग वाहनों की टक्करो से टक्कर खाकर मौत अबतो इन मौतों को भी छिपाया जा रहा है इन जिम्मेदार लोगों द्वारा उन्हें घटना स्थल से दूर फेंक दिया जाता है कुत्तो का निवाला बनने के लिए इधर इन गौबंशो को मांसाहारी अपना भोजन बनाते हैं तो दूसरी ओर इनके नाम पे आने वाली य मिलने वाली सामाग्री पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की तर्ज पर उन्हें मिलने वाले चारा भूसा तक खाने में गुरेज नहीं करते और यह सबकुछ जानते हुए भी जिम्मेदार मौन है।

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