आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से पूर्ब लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेकर राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।तभी से सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहीं है कांग्रेश के जी-23 नेताओं का समूह पूर्णकालिक अध्यक्ष के मुद्दे पर पार्टी आलाकमान पर निशाना साधा रहा है। विगत शनिवार की बैठक में सोनिया गांधी ने इस समूह को नसीहत दी कि उन्हें ही पूर्णकालिक अध्यक्ष माना जाए ।इस नसीहत में चेतावनी और जिद के साथ उनके पुत्र राहुल गांधी के पार्टी के अध्यक्ष पद तक पहुंचने के लिए सर्व सम्मत और शुगम राय नहीं निकल पाने की व्यवस्था भी महसूस होती है कांग्रेस में अबतक असमंजस भ्रम हुआ अनिश्चितता से इस कदर घिर चुकी है कि ना उसे आगे का रास्ता सूझ रहा है ना ही रणनीति पूर्णकालिक अध्यक्ष के बगैर पार्टी में अंदरूनी समस्याओं के मामले में जहां हाथ रखे थे वही वाला आलम है। कांग्रेस शासित राज्यों में पार्टी के असंतुष्टों ने नींद उड़ा रखी है पंजाब में अमरिंदर सिंह की विदाई के बाद भी प्रदेश पार्टी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू कब किस बात पर ईट से ईट बजा कर शुरू कर देंगे या कोप भवन में चले जाएंगे कांग्रेस आलाकमान भी नहीं जानता। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के समीकरण नहीं सुलझ पा रहे हैं सूरजपाल हैं तो छत्तीसगढ़ में टी एस सिंह देव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है उधर महाराष्ट्र में प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले के बयान आए दिन आलाकमान के माथे के बल बढ़ा देते हैं दरअसल जब तक कांग्रेश केंद्रीय स्तर की समस्याओं को हल नहीं करेगी राज्यों में संगठन का संकट दूर होने के आसार नजर नहीं पाते राजनीतिक पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह नहीं चलाया जा सकता कांग्रेस नेतृत्व जितनी जल्दी इसे समझेगा पार्टी के लिए उतना ही बेहतर होगा। कांग्रेस की हालत कुछ उस तरह की तरह हो गई है जो कुएं में उछल कर कुएं में गिर जाता है और कहता है मेरा सारा संसार कुआं ही है वह सारे विकल्प अपने कुएं में ही देखता है यानी कूप मंडूक की कहानी कांग्रेस नेतृत्व दोहराने में लगा हुआ है वह गांधी परिवार मोह से इस कदर घिर चुका है कि लगता है कांग्रेस गांधी परिवार के बिना कुछ नहीं है नहीं उनके पार्टी में ऐसा कोई कमान संभालने वाला है। पूर्णकालिक अध्यक्ष के मुद्दे पर कांग्रेस में भी चर्चा घूम फिर कर गांधी परिवार पर टिक जाती है शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में यही परंपरा दोहराई गई जिन पार्टी नेताओं के लगातार आग्रह के बावजूद राहुल गांधी ने कभी अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया था बैठक में उन्हीं नेताओं ने फिर आग्रह किया और वह फैसले पर पुनर्विचार के लिए तैयार हो गए पार्टी के दिग्गज नेताओं की कवायद से फिर साफ हो गया कि नेतृत्व के मामले में कांग्रेश के पास या तो विकल्प ही सीमित है या वह परिवार मोह से मुक्त नहीं होना चाहती जिससे हम यह कहने को बाध्य हो रहे हैं कि कांग्रेस की हालत कूप मंडूक की तरह हो गई है।
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