कानपुर। आरटीओ कार्यालय में सेवानिवृत बाबू कमलेश बाजपेई विभागीय अधिकारियों के बहुत ही करीबी माने जाते है जिसका प्रभाव यह है कि कार्यालय के सभी वित्तीय लेन देन का सारा कार्य यही बाबू देखते है। सेवानिवृत्त के बाद भी बिना सरकार के अनुमोदन के वह शान से काम कर रहे है साथ ही अधिकारियों के सारे कार्यो का लेखा जोखा भी यही रखते है। विभागीय सूत्रो की माने तो आरटीओ के बाबू कमलेश बाजपेई रिटायर्ड होने के बाद भी अपना पद नही छोड सके है या यूं कह सकते है कि अधिकारियों से सांठ गांठ कर आज भी अपना वर्चस्व कायम किए हुए है। यह बाबू आपको अक्सर अधिकारियों के कमरो में उनके समक्ष बैठे हुए देखे जा सकते है। कार्यालय में कोई भी सेमिनार हो या फिर कार्यालय की खरीद फरोख सभी का कार्य कमलेष बाजपेई बाखूबी से निभा रहे है। आरटीओ कार्यालय वैसे ही भ्रष्टाचार करने के लिए जगविदित है उस पर ऐसे बाबुओ का वर्चस्व कुछ और बंया करता है।
रिटायर्ड बाबुओ ने रखे हुए निजी लडके रिटायर्ड बाबुओ का आलम तो यह है कि उनकी कुर्सी तो रिटायर्ड होने के बाद चली गई ,लेकिन उनका प्रभाव कार्यालय से आज तक बना हुआ है। यही नही उन्होंने निजी तौर पर अपने लोगो का कार्यालय में स्थापित भी कर रखा है जो फाइल निकालने से लेकर लाइसेंस कराने तक का ठेका ले लेते है। अब ऐसे में योगी सरकार जहां जीरो टालरेंस की बात कर रही है वहीं विभाग के अधिाकरियों की कृपा पात्र मिलने से उनका वर्चस्व आज भी कायम है।
रिपोर्ट के एम गुप्ता कानपुर
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