कल बिश्नोई धर्म नियम रक्षार्थ पेड़ों को बचाने के लिए अपना जीवन बलिदान करने वाले 363 अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पण की गई,अनुराग बिश्नोई ने बताया कि राजस्थान की मारवाड़ की धरती पर आज से 291 साल पहले सन् 1730 में गुरु जंभेश्वर महाराज के बनाए नियमों के पालनार्थ 363 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी जिसमें बच्चे, स्त्रीयों, युवा,वृद्ध सभी उम्र के लोग शामिल थे अनुराग बिश्नोई ने बताया की तत्कालिक मारवाड़ राज्य (वर्तमान जोधपुर) के राजा अभय सिंह ने अपने राज्य काल में महल के निर्माण हेतु चुना पकाने के लिए लकड़ियों की आवश्यकता थी राज्य के दीवान गिरधर दास भंडारी ने आदेशानुसार लकड़ियों का प्रबंध खेजड़ी (एक मरुस्थलीय वृक्ष) बाहुल्य गांव खेजड़ली से किया जाना निश्चित हुआ राज्य के कर्मचारी जब गांव में पहुंचे तो वहां लोग इस कार्य के विरोध में लामबंद हुए उन्होंने अपने बिश्नोई धर्म के नियम “रोक लीलो नहीं घावे” का स्मरण कराते हुए राज्य कर्मचारियों को हरे वृक्ष नहीं काटने की गुजारिश की, परंतु राज्य के दीवान ने उनकी एक नहीं सुनी,अनुराग विश्नोई ने बताया कि उस समय आसपास के 84 गांव के विश्नोई बंधु एकत्रित हुए और उन्होंने एक बार फिर से दीवान गिरधर दास भंडारी से अनुरोध किया कि हरे वृक्षों को बचाना उनका नियम है इसलिए वह इन पेड़ों को ना काटे परंतु दंभ पर सवार दीवान पर कोई असर नहीं हुआ और उसने वृक्ष को काटने का आदेश दिया इस पर सभी बंधुओं ने विचार किया कि अब हरे वृक्ष काटने पर हमें अपने प्राणों की आहुति देनी होगी बलिदान की इस घटना का पता चला आस-पास के गांव तक पहुंचा तो आसपास के 84 गांव के लोगों ने निर्णय किया कि जैसे-जैसे पेड़ों को काटा जाएगा एक-एक करके सभी लोग पेड़ों से लिपट कर अपने प्राण न्योछावर कर देंगे, पहले मां अमृता देवी बिश्नोई और उनके तीन बेटियों ने पेड़ से लिपट कर अपनी जान दी फिर उसके बाद एक-एक करके 363 पर्यावरण रक्षकों ने हरे वृक्ष को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी इस प्रकार यह अत्यंत लोहमर्षक एवं निर्दयता पूर्ण घटनाक्रम काफी दिनों तक चलता रहा, प्राणोत्सगर्ग कि यह खबर राजा तक पहुंची, तब तक 363 पुरुष स्त्री एवं बच्चे अपने प्राणों की आहुति दे चुके थे जिसमें 292 पुरुष और 71 महिलाएं थी अतः राजा अभय सिंह ने इस घटना पर दुख प्रकट किया तो और ताम्र पत्र पर माफीनामा लिखा और आदेश दिया कि भविष्य में विश्नोई बाहुल्य क्षेत्रों में कोई भी हरी खेजड़ी को नहीं काटेगा जो कि आज भी लागू है अनुराग विश्नोई ने समाज के लोगों से अपील की हम सभी को पर्यावरण को बचाने के लिए आगे आना होगा क्योंकि आज के समय में अगर कहीं भी विकास करना होता है तो सरकार विकास के नाम पर लाखों हजारों पेड़ काट देती है जिसका हमें पूर्णतः विरोध करना चाहिए क्योंकि हम सब देख ही चुके हैं कुछ समय पहले कोरोना काल में की ऑक्सीजन की कितनी महत्वत्ता है यह हमने अपनी आंखों से देखा है पता है अनुराग बिश्नोई ने कहा की उनका सभी देशवासियों से हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है कि सही समय पर अगर पर्यावरण की देखभाल ना हुई तो आने वाले समय में हमारे बच्चों को अपने कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर अपनी जिंदगी बितानी होगी।

लेखक-पर्यावरण प्रेमी अनुराग विश्नोई रूपनगर (पंजाब)

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