बृजेश मिश्रा लगातार अपने चैनल पर तेवरदार पत्रकारिता कर रहे थे। इसलिए वो भी मोदी सरकार के निशाने पर आ गए हैं। चौथे स्तंभ पर हमला इस तरह शर्मनाक हैं। पत्रकार भूमाफिया के खिलाफ़ लिखें,दिखाए तो उसे मत्यु मिलती हैं पत्रकार, पुलीस प्रशासन के खिलाफ़ लिखें तो उसे मुक़दमा मिलता है, पत्रकार जनता को सच दिखाऐ सरकार की आंखों पर बंद पट्टी खोलने का प्रयास करे तो उसके खिलाफ़ मुकदमा नहीं तो इस तरह के आयकर छापे मारी जैसे कृत्य कर डराने का प्रयास किया जाता है। आज ब्रिटिश सरकार जैसा शासन चल रहा है।

जो मोदी सरकार की कमियाँ उजागर करेगा वह नाप दिया जाएगा। घोषित आपात काल भले न हो लेकिन जो हालात हैं वह आपातकाल से भी भयावह है।

ऑल जर्नलिस्ट प्रेस कौंसिल इसकी घोरनिन्दा करता है और सरकार को बता देना चाहता है मीडिया को डराने का प्रयास व्यर्थ है तत्काल प्रभाव से ये छापे मारी तुरंत बंद की जाए और मीडिया को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाएं और मीडिया पर इस तरह का डर और भय पैदा करने का प्रयास उनका व्यर्थ है!*

नकुल अवस्थी

ऑल जर्नलिस्ट प्रेस कौंसिल (वरिष्ठ प्रदेष उपाध्यक्ष)

संपादक “भारतसात्य”रूद्र पाल सिंह

ऑल जर्नलिस्ट प्रेस कौंसिल (राष्ट्रीय प्रवक्ता)

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