पहला नंबर ब्रिटेन का दूसरा नंबर अमेरिका भारत का 51वें स्थान में है ।

स्विस बैंकों में भारतीयों का व्यक्तिगत और कंपनियों का पैसा 2020 में बढ़कर 20,700 करोड़ रुपए से अधिक पर पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी बतौर नकद जमा तौर पर नहीं बल्कि क्रेडिट लिमिट सिक्योरिटीज, बॉन्ड समेत अन्य वित्तीय स्वरूप होल्डिंग के रूप में दिखती हैं। स्विस बैंक की सालाना रिपोर्ट में जमा काफी हुआ है ।

स्विस बैंकों में यह कोष भारत स्थित शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए रखे गए हैं। स्विस बैंकों में भारतीय ग्राहकों का सकल कोष 2019 के अंत 6,625 करोड़ रुपए था। यह 2020 में बढ़कर 20,632 करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच गया। 2019 के पहले 2साल गिरावट दर्ज की वर्तमान आंकड़ा 13 साल में सर्वाधिक है। गौरतलब है कि 2014 में सरकार बनने से पहले एनडीए के नेता लगातार विदेश में रखे गए धन को काला बताते हुए इसे वापस लाने का आश्वासन देते रहे थे, हालांकि स्विस बैंक में भारतीयों की रकम बढ़ना उल्टा इशारा करता है।गौर तलब है 3,100 करोड़ रुपए से अधिक अन्य बैंकों के जरिए रखे गये हैं। न्यास के द्वारा 16.5 करोड़ रुपए जबकि सबसे ज्यादा करीब 13,500 करोड़ रुपए बॉन्ड, प्रतिभूति और अन्य वित्तीय उत्पादों के रूप में रखे गए हैं।

ये आंकड़े बैंकों ने एसएनबी को दिये हैं और फिलहाल इसके जरिए भारतीयों द्वारा स्विट्जरलैंड के बैंकों में रखे जाने वाले काले धन के बारे में कोई पुख्ता संकेत नहीं मिलते। इन आंकड़ों में वह राशि भी शामिल नहीं है जो भारतीय, प्रवासी भारतीय या अन्य तीसरे देशों की इकाइयों के जरिये स्विस बैंकों में रख सकते हैं।

कुल मिलाकर स्विस बैंकों में विभिन्न देशों के ग्राहकों की जमा राशि 2020 में बढ़कर करीब 2,000 अरब स्विस फ्रैंक पहुंच गई। इसमें से 600 अरब स्विस फ्रैंक विदेशी ग्राहकों की जमा राशि है। सूची में ब्रिटेन अव्वल है। उसके नागरिकों के स्विस बैंकों में 377 अरब स्विस फ्रैंक जमा हैं। उसके बाद अमेरिका के (152 अरब स्विस फ्रैंक) का स्थान है।

शीर्ष 10 में अन्य वेस्टइंडीज, फ्रांस, हांगकांग, जर्मनी, सिंगापुर, लक्जमबर्ग, केमैन आईलैंड और बहामास हैं। भारत इस सूची में 51वें स्थान पर है। और न्यूजीलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, हंगरी, मॉरीशस, पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा श्रीलंका जैसे देशों से आगे है। ब्रिक्स देशों में भारत, चीन और रूस से नीचे लेकिन दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील से आगे है। आंकड़े के अनुसार स्विस बैंकों में ब्रिटेन, अमेरिका के ग्राहकों का धन कम हुआ। बांग्लादेश के भी ग्राहकों का धन घटा लेकिन पाकिस्तानी ग्राहकों का कोष दोगुना हो गया।

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच कर मामलों में सूचना के स्वत: आदान-प्रदान की व्यवस्था 2018 से है। इस व्यवस्था के तहत 2018 से स्विस वित्तीय संस्थानों में रखने वाले सभी भारतीय निवासियों की विस्तृत वित्तीय जानकारी पहली बार सितंबर 2019 में भारतीय कर अधिकारियों को प्रदान की गई थी। व्यवस्था के तहत इसका हर साल पालन किया जाना है।

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