आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻 से चुनाव आयोग की बेवसाइट को अगर देखा जाए तो उसमें पता चलता है कि आज देश के उच्च सदन से लेकर निचले सदन में कितने अपराधी बैठे हैं जिनके कंधों पर देस प्रदेश के संचालन की जिम्मेदारी है और वह माननीय कहलाते हैं।
राजनीति की इसी दुर्दशा को देखते हुए आमजनमानस की निगाहें देश के चौथे स्तंभ की तरफ आकर्षित हो गई थी उन्हें आश थी कि उनकी आवाज बनेगा यह चौथा स्तंभ।पर यहां भी बिज्ञापन की भूख ने ऐसे लोगों को भर्ती करना प्रारंभ कर दिया जिनका पूरा बैकग्राउंड अपराधिक गतिविधियों का है जिनके अपराधिक गतिविधियों से भरे कारनामों के लेखा जोखा से थानों में दर्ज मुकदमे फाइलों की सोभा बढा रहे हैं और वह गर्ब से कहते हैं कि वह पत्रकार हैं। जिन्हें पत्रकारिता की एबीसीडी का ज्ञान नहीं है जिन्होंने न पत्रकारिता का डिप्लोमा लिया नहीं बरिष्ठ पत्रकारो य किसी पत्रकारिता के संस्थान में रहकर अनुभव प्राप्त किया पर पत्रकार बन बैठे ओढ़ लिया पत्रकारिता का लबादा करने लगे उस पबित्र मिशन को कलंकित जिसने क्रांति की ज्योति जलाने में अग्रिम भूमिका निभाई कलंकित करने लगे उन कलमकारों की लेखनी को जिन्होंने पत्रकारिता को अपने बिचारो लेखको के माध्यम से जनजागृति लाई उसे उच्चतम शिखर पर पहुंचाया जिन्होंने पत्रकारिता को मिशन माना नकी व्यापार पर आज कुछ ऐसे पत्रकारों ने जन्म ले लिया है जिनका एक मात्र उद्देश्य ही इससे पैसा कमाना है माफियाओं के तलुये चाट उनसे धन वसूल करना है अधिकारियों को अपने प्रभाव में लेकर दलाली करना है क्योंकि यह पत्रकार नहीं है इनके रक्त में अपराधियों के बिषाणु भरे पड़े हैं इनकी मानसिकता अपराधिक किस्म की है जो इन्हें अपने जैसे देखने को सभी को बाध्य कर देती है। जैसे देव सिंह निवासी चिल्ला थाना के निवासी हैं जिनके थाना चिल्ला में ही अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा मुकादमा दर्ज कराया जाता है जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जिला बदर की कार्यवाही अमल लाई जाती है पर यह पत्रकार हैं ऐसे ही इनके साथी है जिनका बैकग्राउंड अपराधिक गतिविधियों में लिप्तता से भरा हुआ है पर यह पत्रकार हैं ऐसे पत्रकारों को हम पत्रकार नहीं मानते जो पूरी पत्रकारिता को ही दागदार करने में आमादा हो।
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