आत्माराम त्रिपाठी की विशेष रिपोर्ट टीकमगढ़// दहेज की बलबेदी पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की एक भांजी पुनः प्रताड़ना एवं दहेज रूपी दानवो के क्रूर खूनी पंजों का शिकार हो गई। दुल्हन ही दहेज है ऐसे नारे मध्यप्रदेश की दीवारों पर लिखे हैं पर वह अच्छे नही लगते हैं। जिस बहू के प्रथम गृह आगमन पर आरती उतारी जाती है ग्रह लक्ष्मी आई कहकर स्वागत किया जाता है किन्तु वहीं ग्रह लक्ष्मी जो अपने माता-पिता पिता भाई भाभी की लाडली होती है के तमाम अरमानों पर इन दहेज रूपी दानवो द्वारा कुठाराघात कर दिया जाता है और अपने खूनी पंजे उस मासूम के अरमानों के साथ उसकी जीवन लीला समाप्त कर देते हैं ।मानवता जिसके आगे सारे जनजागृति के प्रयास व मंचों से दहेज व प्रताड़ना के खोखली आवाज जो मंच पे खड़े हो माइक में गलाफाड कर चिल्लाते हैं पर माइक हाथ से छूटते ही उसी दहेज की लालसा करते हैं इच्छा पूर्ति न होने पर नरपिशाच बन समूहिक रूप से उस बच्ची के प्राण हंता बनते हैं जो अपने जन्म दाता जन्मभूमि यहां तक कि अपना पैदायसी नाम गोत्र तक इन दानवो की खुशी के लिए त्याग देती है पर उसके सारे त्याग बलिदान ब्यर्थ हो जाते हैं।बावजूद आज समाज की मानसिकता दहेज के लालच से मुक्त नहीं हो सकी है। इसका जीता जागता उदाहरण टीकमगढ़ की जेल के सामने निवासी शुक्ला परिवार में उस समय देखने को मिला जब पति सास-ससुर व जेठानी द्वारा दहेज के लिए आए दिन की प्रताड़ना से क्षुब्ध होकर नवविवाहिता युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मामला पुलिस की चौखट तक पहुंचा और एक माह बाद नामजद एफआईआर होने के बावजूद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाना पुलिस की संदिग्ध कार्य प्रणाली की ओर इशारा करती है।
पुलिस की विवेचना रिपोर्ट के अनुसार ज्ञात हुआ है कि टीकमगढ़ के जेल के सामने निवासी रजनी पत्नी अनुज शुक्ला उम्र 32 वर्ष ने विगत माह 7/4 /2021 को शाम चार बजे के वक्त फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी तथा विवेचना के दौरान पुलिस को मृतका का अंतिम नोट भी प्राप्त हुआ था जिसमें उसने स्पष्ट उल्लेख किया था कि उसके पति ,ससुर ,सास व जेठानी द्वारा उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है इसी प्रकार के आरोप में मृतिका के भाई तथा माता द्वारा भी पुलिस की विवेचना के दौरान लगाए गए थे पुलिस ने उपरोक्त घटना में धारा 306 का मामला दर्ज करते हुए अपनी प्रारंभिक कार्यवाही शुरू की थी परंतु घटना के 1 माह पश्चात भी टीकमगढ़ पुलिस द्वारा आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाना पुलिस की लापरवाही पूर्ण कार्यप्रणाली की ओर इशारा करता है आखिर क्यों एक नवविवाहिता के हत्यारों को गिरफ्तार करने में पुलिस हिचक रही है ?आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि प्रथम दृष्टया जांच में आरोपी सिद्ध होने के बावजूद बहू हंताओ को पुलिस बचा रही है? इस पूरे मामले की पुलिस अधीक्षक द्वारा जांच टीम गठित कर मामले की सच्चाई लोगों के सामने लानी चाहिए आखिर क्यों रजनी के हत्यारों को पुलिस बचा रही है। और खास बात यह है कि मृतका का मामा जिसकी वह भांजी है यानी मध्य प्रदेश सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपनी इन भांजियों की दहेज एवम प्रताड़ना को लेकर हो रही हत्याओं पर कैसे खामोश है ?अब तक की उनकी भांजी दहेज रूपी दानओं के खूनी क्रूर पंजों का शिकार हो गई और वह चुप चाप बैठे तमाशा देख रहे हैं ।धिक्कार है ऐसे मामा पर, धिक्कार है ऐसे असबेंदनहीन पुलिस पर ,धिक्कार है ऐसे समाज पर ,धिक्कार है ऐसे जनप्रतिनिधियों पर जो इतना सब कुछ होने के बाद ऐसे नर पिशाचों का साथ दे रहे हैं ध्यान रहे आप भी बेटी वाले हैं ईश्वर न करे कि कल आपकी बेटी भी ऐसे नर पिशाचों का शिकार हो।
गोमती शुक्ला सास साजिश और उकसाने मे प्रवीण
रजनी शुक्ला के दयाविहीन क्रूर पति अनुज शुक्ला षडयंत्रकारी साजिश कर्ता वरिष्ठ वकील क्रिमिनल अधिवक्ता रामस्वरूप शुक्ला
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