आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻से किस पर लिखूं क्या लिखूं लिखूं तो क्या लिखूं आज कयी प्रस्न मन में उठ रहे हैं तरह तरह की भ्रांतियों ने मन में डेरा डाले हुए मनकों उलझन में डालकर मन को बेचैन कर दिया है।मन असांत है व्याकुल है सुबह का समय है कोयल गीत गा रही है मोर नृत्य कर रहा है बड़ा ही मनोरम दृश्य है।पर कौए की कांव कांव की करकस आवाज ने इसमें बिघ्न डाला कहां कोयल की कूक मयूर नृत्य उसमें यह कांव कांव की कर्कश ध्वनि सब-कुछ एक दूसरे से भिन्न था। ठीक उसी प्रकार जैसे ही मैंने व्हाट्सएप खोला तो कहीं गुडमार्निग शुभ प्रभात मिला तो कहीं रेप, हत्या , डकैती, चोरी, एक्सीडेंट की घटनाओं से भरे पड़े मैसेज देखने को मिले तो कहीं अवैध खनन ओवर लोडिंग, के समाचार उसमें माननीयों की संलिप्तता बरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण य आत्मसमर्पण की तरफ इंगित करती कलमकारों की लेखनी जो चिल्ला चिल्ला कर आवाज उठा रही है की बालू के अवैध खनन ओवर लोडिंग कारोबार में खनन माफिया प्रशासन माननीयों का गठबंधन है इनसे सीधे टकराव का मतलब है फर्जी केसों में फसा जेल भेजना य अन्य कई तरीके से विरोधियों को समाप्त करना इस लाबी का उद्देश्य रहता है जिससे इनके गलत कार्यों का कोई काला चिठ्ठा न खोल सके। कोरोना के चलते शोसलडिस्टेटिंग लाक डाउन का पालन करने हेतु सख्ती दिखाई जाती है पर वह नियम डग्गामार वाहनों में जिसमें भूसा की तरह सवारी भरी जाती है और उसी स्थिति में वह वाहन इन जिम्मेदार जिनके कंधों पर इसे रोकने की जवाबदेही तय है के सामने से गुजर जाते हैं किन्तु मजाल क्या जो इन्हें यह रोक सके। जैसा कि बिभिन्न समाचार पत्र , शोसलमीडिया, व्हाट्सएप, इंस्ट्राग्राम, फेसबुक, ट्विटर अकाउंट आदि प्रचार तंत्रों से छन कर आ रही खबरों के अनुसार कोरोना महामारी का ग्राफ तेजी से नीचे की तरफ जा रहा है जो कोरोना महामारी में एक प्रकार से विजय प्राप्त करने से कुछ कम नहीं है। किंतु इस कोरोनाकाल में जिस तरह से आम जनता महंगाई से प्रभावित हुई मुनाफाखोर, जमाखोरी करने वालों ने आमजन की मजबूरी का फायदा उठाने में पीछे नहीं रहे वह भी किसी से छिपा नहीं है।आज अगर सरकार व उसके नुमाइंदों द्वारा व्यापारियों से वार्ता कर रेट निर्धारित करते हुए रेट को सार्वजनिक प्रचार-प्रसार के माध्यम से कर दिया गया होता तो आज इस महा विपत्ति के समय लूटने से बच जाती किंतु ऐसा नहीं हुआ जनता लुटती रही चिल्लाती रही सरकार, प्रशासन मौन सुनते रहे देखते रहे व देख रहे हैं। कोरोना के अलावा अन्य भी कई ऐसी गंभीर बिमारियां है जिनका इलाज आम आदमी के बलबूते से बाहर है सरकार का दावा है कि आयुष्मान कार्ड के जरिए उनका फ्री इलाज होता है लेकिन आयुष्मान कार्ड कितने लोगों का बना है किन मापदंडों का उपयोग किया गया आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए क्या सभी कार्ड धारक उसकी पात्रता रखते हैं और जो वंचित हैं क्या वास्तव में वह इस कार्ड के हकदार नहीं हैं अगर हकदार हैं तो उनलोगो के कार्ड क्यों नहीं बने इसके लिए दोषी कौन,? डाक्टरों को हमने बहुत नजदीक से मारीज के मर्ज से संघर्ष करते हुए देखा उनकी भावनाओं को गंभीरता से समझा तो हमें लगा आमजन आज उन्हें धरती के दूसरे भगवान की संज्ञा दे रहे हैं तो वह गलत नहीं है पर अपवाद हर जगह है कुछ डाक्टर ऐसे भी हैं जिनके वजह से ये भगवान भी बदनाम हो जाते हैं तो कुछ डाक्टर ऐसे हैं जिनमें डाक्टर डी एम युवराज गुलाटी सर्जन प्रोफेसर कानपुर हैलेट जो अपने मारीज को अपने से दो चार सौ किलोमीटर दूर हो जाने के बाद भी फोन पर हाल चाल लेते हैं इलाज बताते हैं ऐसे ही मेडिकल कॉलेज बांदा के डाक्टर शैलेन्द्र सिंह यादव है जो मारीज को भेदभाव रहित हो देखते हैं। ऐसे और कई डाक्टर है जो अपने कर्तव्य पथ पर कर्मयोगी की भांति डटे हुए हैं। जबकि कुछ डाक्टर तो ऐसे भी हैं जिनका कमीशन मेडिकल स्टोर से लेकर पैथालॉजी तक बंधा हुआ है जिन्हें मारीज से मतलब नहीं केवल उनका उद्देश्य धन लूटना है। अभी और कयी विभाग ऐसे हैं जहां भ्रष्टाचार दलाली दलालों का बोलबाला है जिस पर लिखा जाएगा पर लेखनी बंद कर रहा हूं क्योंकि लेख लंबा खिंचता चला जा रहा है। लेखनी भटकने लगी है लिखूं तो क्या लिखूं हर साख पे उल्लू बैठा है।
Tagged in : #CM-UP #CMUK #CMUP #electiion #human
Categorized in : All News bihar उत्तर प्रदेश उत्तराखंड छत्तीसगढ़ देश