बकस्वाहा जंगल में दो लाख से अधिक पेड काटने की खबर पर गोलबंद हुए देश भर के पर्यावरण प्रेमी

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बकस्वाहा जंगल को काटे जाने की खबर पर रविवार को पर्यावरण पर कार्य करने वाले देशभर के 60 से अधिक संस्थाओं ने वर्चुअल तरीके से भाग ली। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार द्वारा आदित्य बिरला समूह को 50 साल के लिए बकस्वाहा जंगल की 382.13 हेक्टेयर जमीन दी जा रही है। जिसपर करीब दो लाख 15 हजार पेड लगे है। समूह द्वारा अपने क्रियाकलाप के लिए जंगल काटने की योजना है। जंगल काटे जाने की खबर से पर्यावरणविदों, पर्यावरण मित्रों व आमजनों में नाराजगी है। एक तरफ कोरोना काल में वर्तमान में पूरे देश में आॅक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ है वहीं दूसरी तरफ इतने बडे जंगलों को काटे जाने से पर्यावरण असंतुलित व जैव विविधता प्रभावित होंगे। वर्चुअल मीटिंग में एक सामूहिक प्रतिनिधि मंडल व व्यक्तिगत रूपों से छतरपुर के जिला प्रशासन, मध्यप्रदेश की राज्य सरकार व केन्द्र सरकार से जंगल कटाई पर रोक लगाने की बात हुई । कार्रवाई न होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने व आंदोलन करने की भी बात कही गई। वैश्विक स्तर पर पर्यावरण एक बडी समस्या बन चुकी है जिसका सीधा असर मानव जाति सहित पशु पक्षी पर पड रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें हरहाल में जंगलों को बचाना ही होगा। मीटिंग का संचालन शिवमणि वेलफेयर एडुकेशनल सोसाइटी बांका बिहार के सचिव शिवपूजन सिंह ने की। मीटिंग में पीपल नीम तुलसी के संस्थापक डा. धर्मेंद्र कुमार , उदघोष फाउंडेशन झारखंड के अध्यक्ष कमलेश सिंह , मध्यप्रदेश से करूणा रघुवंशी, भूपेन्द्र सिंह, प्रेम सिंह विदिशा, विवेक सक्सेना, कैप्टन राज द्विवेदी, अभिषेक कुमार , आनंद पटेल , राज पटेल, उत्तरप्रदेश से पूनम खन्ना, डा. टी. एन सिंहा, डा. ओपी चौधरी , बिहार से नीतीश कुमार , मृत्युंजय मनी, संतोष झा, राकेश कुमार, संजय कुमार बबलू, रोहित कुमार, पंजाब से राजीव गोधरा, उडीसा से सुवेन्दु राउतरी, हितेन्द्र कुमार , अधिवक्ता दनेवालीय सहित कई राज्यों के पर्यावरण संरक्षण पर कार्य करने वाले पर्यावरण मित्रों ने विचार रखे एवं हरहाल में जंगल बचाने की बात कही। पेड नहीं बचाओगे तो आॅक्सीजन कहां से लाओगे का भी नारा दिया।

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