एनसीआरबी 2019 की रिपोर्ट में खुलासा, उत्तराखंड में शादियों के नाम पर होती है तस्करी****बालिकाओं की तस्करी के मामलों में लॉकडाउन अवधि में भी दर्ज किया गया है इजाफा
बेटियों की तस्करी में हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर उत्तराखंड, शादियों के नाम पर होता है अपराधएनसीआरबी 2019 की रिपोर्ट में खुलासा, उत्तराखंड में शादियों के नाम पर होती है तस्करी
बालिकाओं की तस्करी के मामलों में लॉकडाउन अवधि में भी दर्ज किया गया है इजाफा
उत्तराखंड चमोली में 13 साल की बालिका की 32 वर्षीय व्यक्ति से शादी के मामले के बीच अगर आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तराखंड में हालात बेहद चिंताजनक हैं। पैसे देकर 32 वर्षीय युवक से कराई नाबालिग की शादी, अब कर रहे उत्पीड़न, परीक्षा देने पहुंची किशोरी ने शिक्षक को बताई आपबीती
नेशनल क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़ों पर गौर करें तो चिंताजनक हालात की तस्वीर साफ हो जाती है। 2019 में जारी हुई रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों की तस्करी (चाइल्ड ट्रैफिकिंग) के मामलों में दस हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड पहले पायदान पर है।
यहां बच्चों की तस्करी को प्राथमिक रूप से अपराध माना गया है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि बच्चों की तस्करी के यह मामले कहीं रिपोर्ट भी नहीं हो पाते। बमुश्किल दो प्रतिशत मामले ही संज्ञान में आ पाते हैं।
बेटियों की कम उम्र में शादी करने की यह परंपरा लॉकडाउन की अवधि में बढ़ी है। माउंटेन चिल्ड्रन फाउंडेशन की संस्थापक अदिति पी कौर का कहना है कि 2019 में उनके पास करीब पांच मामले रिपोर्ट हुए थे लेकिन 2020 में 12 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बेटियों की बाल अवस्था में शादी कराई जा रही थी या कराने का प्रयास किया जा रहा था। उनका कहना है कि कहीं न कहीं यह शादियां अप्रत्यक्ष रूप से बालिकाओं की तस्करी से जुड़ी हुई हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता को खुद बनना पड़ा वादी 78 मामलों पर यह एक व्हाइट कॉलर सुनियोजित अपराध हो रहा जिसमे रसूखदार लोग सामिल हैं ।
एम्पावरिंग पिपुल संस्था के मुख्य कार्यवाहक एवं अंतरराष्ट्रीय एक्टिविस्ट ज्ञानेंद्र कुमार बच्चों की तस्करी रोकने के लिए वर्ष 2005 से काम कर रहे हैं।
पुलिस की मदद से मुकदमा दर्ज कराया तो इन सभी मामलों में वह खुद वादी की ओर से न्यायालयों के चक्कर काटते हैं। सरकार की ओर से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जाता है। सबसे बड़ी चुनौती गवाहों को मुकरने से बचाते हुए संबंधित मामले के एविडेंस एकत्र करना भी होता है।
एक बहुत बड़ा तबका इस काम को अंजाम दे रहा है । बच्चों को तस्करी से बचाने की दिशा में काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि जिस बड़े पैमाने पर यह अपराध उत्तराखंड में पनप रहा है।इसकी रोकथाम के लिए एक सामाजिक जागरूकता और सक्रिय पुलिसिंग की जरूरत है।
एम्पावरिंग पिपुल इस दिशा में लंबे समय से आवाज उठा रहा है लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। संस्था के मुख्य कार्यवाहक ज्ञानेंद्र कुमार का कहना है कि बेटियों की तस्करी के प्रति जागरूकता सबसे जरूरी है। जब तक समाज में इसके लिए बड़े स्तर पर काम नहीं होगा, यह अपराध रुकेगा नहीं।
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