उत्तराखंड वर्तमान पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या लाखों में हो पर राज्य सरकार के 14 मुख्य विभागों में भी हजारों की संख्या में पद खाली हैं। पिछले चार साल से प्रदेश सरकार प्रचार कर इन खाली पदों को भरने का दावा करती आई है। लेकिन, खुद सरकार के ही आंकड़े बता रहे हैं कि राजकीय महकमों में ही 56 हजार से अधिक पद खाली हैं। सरकार के 14 बड़े विभागों में करीब 36 हजारों पद खाली चल रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार चाहकर भी इन खाली पदों को भरने का साहस नहीं कर पा रही है। इसकी वजह सरकार कर्ज में डूबी एवं कमजोर वित्तीय स्थिति है। माननीयों के खर्चे उच्च स्तर के बरकरार है विपरीत नियमित भरती से राजकोष पर खर्च का दबाव बढ़ेगा इसका डर के चलते लिहाजा सरकार की कोशिश खाली पदों पर अस्थाई नियुक्ति करने की रही है। लेकिन नियमित भरती न होने और बड़ी संख्या में खाली पद होने से विभागों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। साथ ही सरकारी नौकरियों की राह देख रहे बेरोजगारी की उम्मीदें भी टूट रही हैं। बेरोजगार हर सरकार से रोजगार की आशा लगा बैठते है।
TSR 1 सरकार ने वर्ष 2020-21 को रोजगार वर्ष के तौर पर मनाने का फैसला किया था। इसके तहत सरकारी और गैरसरकारी रोजगार सृजित करने और रोजगार भर्ती की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिशें की गईं। बहाना Covid-19 महामारी के चलते खाली पदों के लिए आयोगों को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया थम गई।
20 साल से उत्तराखंड का युवा ठगा जा रहा सरकारों के द्वारा आंकड़े निम्न प्रकार
2020 तक प्रमुख विभागों में खाली पदों की संख्या:-
विभाग सृजित पद खाली कृषि 2489 1270 लोनिवि 11226 2333 वन विभाग 9237 3519 पशुपालन 3443 754 उद्यान 3550 1402 पुलिस 26009 1467 उच्च शिक्षा 3563 2130 विद्यालीय शिक्षा 35892 4184 माध्यमिक शिक्षा 32588 7899 चिकित्सा व स्वास्थ्य 11879 3403 चिकित्सा शिक्षा 5215 2893 परिवार कल्याण 4565 1359 महिला सशक्तिकरण 31035 1273 माध्यमिक 12833 2166 (अकादमिक व शोध) कुल 36052
सरकारी सूत्रों s – 200279 स्थाई पद हैं सरकारी विभागों में – 46396 पद सरकारी विभागों में अस्थाई हैं – 56944 पद सरकारी विभागों में अभी रिक्त हैं
बस एक मात्र रोजगार के मुद्दे पर प्रदेश की सियासत गर्म है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा होगा। कांग्रेस रोजगार के मुद्दे पर भाजपा सरकार की आलोचना कर रही है। भाजपा पूर्व कांग्रेस सरकार के तुलनात्मक आंकड़ों के जरिये यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसके प्रयास ज्यादा बेहतर रहे। हालांकि बेरोजगारों का मानना है कि सरकारी नौकरियों के लिए खाली पदों को भरने में प्रदेश सरकारों ने हमेशा कंजूसी बरती है।