इतिहास में 26 जनवरी, 2002 का अपना अलग स्थान है। यही वह दिन है जब भारत के आम नागरिकों को भी अपनी मर्जी के हिसाब से किसी भी दिन झंडा फहराने की अनुमति मिली। ऐसी बात नहीं है कि उनको इससे पहले झंडा फहराने का अधिकार नहीं था। अधिकार तो था लेकिन सिर्फ कुछ खास राष्ट्रीय दिवसों जैसे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराने का। 26 जनवरी, 2002 को इंडियन फ्लैग कोड में संशोधन किया गया और आम नागरिकों को कहीं भी कभी भी गर्व के साथ राष्ट्रीय झंडा फहराने का मौका मिला। अब वे गर्व के साथ अपने घरों, कार्यालयों और फैक्ट्रियों में झंडा फहरा सकते हैं।
दरअसलउद्योगपति नवीन जिंदल वर्ष 1992 में अमेरिका में पढ़ाई कर भारत लौटे। वर्ष 1992 में उन्होंने अपने कारखाने में तिरंगा फहराना शुरू किया, तो उन्हें जिला प्रशासन ने दण्डित करने की चेतावनी दी। जिस पर निजी तौर पर राष्ट्रध्वज फहराने के अधिकार को लेकर वे दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गए। सात साल चली कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को आदर, प्रतिष्ठा एवं सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार है। इस प्रकार यह प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार बना।
इस फैसले के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फ्लैग कोड में संशोधन किया था। इसके पूर्व स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अलावे किसी भी दिन भारत के नागरिकों को अपना राष्ट्रध्वज फहराने का अधिकार नहीं था। खास कर अपने घरों या कार्यालयों में।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 26 जनवरी 2002 से भारत सरकार फ्लैग कोड में संशोधन कर भारत के सभी नागरिकों को किसी भी दिन राष्ट्र ध्वज को फहराने का अधिकार दिया।
वर्ष 2009 में गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव दिया कि देश में रात को भी विशाल ध्वज दंड पर राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगा फहराने की अनुमति दी जाए। गृह मंत्रालय ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। भारतीय नागरिक अब रात में भी राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहरा सकते हैं, इसके लिए शर्त होगी कि झंडे का पोल वास्तव में लंबा हो और झंडा खुद भी चमके। गृह मंत्रालय ने उद्योगपति सांसद नवीन जिंदल द्वारा इस संबंध में रखे गए प्रस्ताव के बाद यह फैसला किया।
जिंदल को दिए गए संदेश में मंत्रालय ने कहा था कि प्रस्ताव की पड़ताल की गई है और कई स्थानों पर दिन और रात में राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के लिए झंडे के बड़े पोल लगाने पर कोई आपत्ति नहीं है। जिंदल ने जून 2009 में मंत्रालय को दिए गए प्रस्ताव में बड़े आकार के राष्ट्रीय ध्वज को स्मारकों के पोलों पर रात में भी फहराए जाने की अनुमति मांगी थी। जिंदल ने कहा था कि भारत की झंडा संहिता के आधार पर राष्ट्रीय ध्वज जहां तक संभव है सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच फहराया जाना चाहिए, लेकिन दुनिया भर में यह सामान्य है कि बड़े राष्ट्रीय ध्वज 100 फुट या इससे उंचे पोल पर स्मारकों पर दिन और रात फहराए गए होते हैं।
स्पष्ट है कि नवीन जिंदल के प्रयास के बाद ही आज सभी को अपना तिरंगा फहराने का अधिकार मिला है।
इंडियन फ्लैग कोड को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से में राष्ट्रीय ध्वज के आकार और निर्माण के बारे में नियमों का उल्लेख है।
दूसरे हिस्से में आम लोग, निजी संगठनों, शैक्षिक संस्थानों द्वारा झंडा फहराने और रखरखाव आदि से संबंधित नियमों का उल्लेख है।
तीसरे हिस्से में केंद्र एवं राज्य सरकार और उनके संगठन एवं एजेंसियों द्वारा झंडा फहराने एवं इसके रखरखाव से जुड़े नियमों का उल्लेख किया गया है।
झंडे का किसी तरह से अनादर करने की स्थिति में प्रीवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नैशनल ओनर ऐक्ट, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) के तहत सजा का प्रावधान है। इस कानून में 2003 में संशोधन किया गया। इसके तहत पहली बार जुर्म करने पर 3 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा जुर्म करने पर कम से कम एक साल सजा का प्रावधान है।
-निखिलेश मिश्रा
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