उत्तर प्रदेश के कासगंज में पुलिसकर्मियों पर बिकरू काण्ड जैसा हमला हुआ। पुलिस वहाँ के गाँव में अवैध शराब का कारोबार बंद कराने गयी थी लेकिन यह सर्वविदित है कि ऐसे कारोबारों से सरकारी सीढ़ियों तक कैसे चढ़ावा चढ़ता है। परिणामस्वरूप माफ़िया को पुलिस के आने की ख़बर पहले ही हो गयी। पहुँचने पर शराब माफ़ियाओं ने पुलिस को घेर लिया और दारोगा, अशोक व सिपाही, देवेंद्र को बंधक बना लिया। मौका मिलते ही सम्पर्क किया गया और अतिरिक्त पुलिस बल की मदद ली गयी। कॉम्बिंग के दौरान सिपाही अर्धनग्न अवस्था में मृत पाये गये, उनकी हत्या कर दी गयी और दारोगा खेत में लहूलुहान पड़े मिले।

इस मामले में योगी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रासुका लगा दी है और आरोपियों की तलाश जारी है। बिकरू काण्ड के बाद योगी सरकार ने जिस तरह काम किया उससे राज्य के माफ़ियाओं में दहशत का माहौल बन गया था जिसके बाद एक वर्ष के भीतर ही दिल दहलाने वाली यह घटना भयावह है।

एक छोटी टीम के साथ किसी ऑपरेशन पर निकलना पुलिस के लिए जोखिम भरा हो चुका है। शहर के बीचों-बीच रह रहे गुंडे आतंकवादियों की तरह वर्दीधारियों पर हमले कर रहे हैं। यह सब इतना सहज होना ख़तरनाक है वह भी तब जब उन्हें पता है कि हश्र क्या हो सकता है। लहूलुहान दारोगा की तस्वीर मायूस करती है। सिपाही शहीद हो गये, कुछ घायल हैं। ज़रूरी है कि ऐसे माफ़ियाओं पर कठोरतम तरीके से नकेल कसी जाए। दिल दहलाने वाली इस घटना ने नींद उड़ा दी है। पुलिस अब भी छानबीन कर रही है, पता नहीं सुबह तक कितने पुलिसकर्मी किस स्थिति में मिलें।

उन गुंडों के लिए मुखबिरी करने वाला भी कोई ख़ास ही होगा। पैसे की ख़ातिर ज़मीर बेचना जबतक आसान रहेगा, ईमानदारी और कर्त्तव्यनिष्ठा लहूलुहान होती रहेगी।

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