आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻 से अभिव्यक्ति की आजादी पर तरह तरह के हथकंडे अपना कर उन पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है वह चाहे आज की भाजपा सरकार हो या पूर्ववर्ती अन्य दलों की सरकारें रही हो कमोबेश रवैया एक जैसा ही रहा। जो भी इनके खिलाफ गया उसे राष्ट्रद्रोही बताया गया उसके ऊपर मुकदमा ठोके गए जेल में ठूंस दिए गए कुछ मरणासन्न अवस्था में बाहर आए कुछ कालकवलित हुए यह कैसी बिडबंना है कि आज जिसे पूरा विश्व अन्नदाता धरतीपुत्र पुत्र कहता है हमारे देश भारत का नारा जय जवान जय किसान जो अपने आप में किसान की महत्ता को उजागर करता है इस भीषण ठंड में सड़कों पर बैठा है अपनी चिंता शंकाओं को लेकर लेकिन उनके समाधान करने के बजाय उन्हें आंतकवादी राष्ट्रद्रोही घोषित करने में कुछ लोग आमादा है।क्या अपनी बात रखना कहना राष्ट्र द्रोह है? अपनी अभिव्यक्ति सामने रखना राष्ट्रद्रोह है ? क्या आंदोलनकारी किसान इस देश के नागरिक नहीं है? क्या वह आंतकवादी है? क्या किसान को अपनी बात कहने रखने की आजादी नहीं है? अगर हां तो इतना समय क्यों लगा कि वह अपना आपा धैर्य खो बैठे और खेत में कार्य करने के बजाय सड़कों पर उतर आए इसके जिम्मेदार कौन है ? किसान अपने खेतों खलिहानों को छोड़ सड़क पर तभी उतरता है जब उसे इस बात का पूर्ण आभास हो जाता है कि वह ठगा जा रहा है उसके साथ छल किया जा रहा है उसे अपना भविष्य अंधकारमय दिखाई देने लगता है तभी धरती पुत्र अन्नदाता सड़कों पर उतरता है वह राजनीति की भाषा नहीं समझता कानून की भाषा का उसे ज्ञान भान नही रहता क्योंकि वह खेत खलिहान के अलावा बाहर की दुनिया से मतलब नहीं रखता वह अपनी दुनिया में मस्त रहता है और दूसरों के उदर क्षुधा शांति के लिए दिन-रात कठोर मेहनत कर अन्न पैदा करता है जिसमें वह अन्न दाता व धरती पुत्र कहलाता है और उसी को आज आंतकवादी कहा जा रहा है उनके उपर राष्ट्रद्रोह जैसे मुकादमे ठोके जा रहे हैं यह कैसी नीति है क्या यही स्वतंत्र भारत में अभिव्यक्त की आजादी है ?य उसे कुचलने का प्रयास है किया जा रहा है कम से कम हमारी समझ से तो यह सब परे है।
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