आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट

बांदा_सामाजिक कार्यकर्ता असीस सागर दीक्षित ने बताया की खनन माफिया ने 14 दिसंबर की खबर लिखने के चलते धारा 200 व 66 के तहत मुझ पर मुकदमा लिखाया हैं। खान निरीक्षक इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह ने तहरीर दी हैं। आज प्रकाशित अमर उजाला की इस खबर में अब उन तथ्यों पर भी गौर करिये जिसमें हमीरपुर के अधिवक्ता जनहित याचिकाकर्ता विजय द्विवेदी के बाँदा मण्डल आयुक्त को दिए शिकायत ज्ञापन में चारों जनपद पर अवैध खनन की बात का उल्लेख हैं। उन्होंने हमीरपुर, बाँदा में हैवी पोकलैंड मशीन से अवैध खनन की शिकायत की हैं जिसपर आयुक्त बाँदा ने चारों जनपद के डीएम को जांच के आदेश दिए है। गौरतलब यह है कि सीबीआई गत 4 साल से हमीरपुर, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर आदि में सपा सरकार के अवैध खनन व सत्ता समर्थित सिंडिकेट की जांच कर रही है। पिछले सप्ताह 5 दिन सीबीआई फतेहपुर में डटी थी। विजय द्विवेदी के शिकायत ज्ञापन की प्रति पर गौर करेंगें तो हमीरपुर में खनिज निरीक्षक और खान अधिकारी सहित मौजूदा डीएम के दावे के स्याह सच स्पष्ट होता हैं। सामाज़िक कार्यकर्ता और मीडिया कर्मियों की आवाज दबाने के लिए नदियों पर माफिया व खदान संचालकों के सरपरस्तों ने यह मुकदमे बाजी की हैं। खान निरीक्षक हमीरपुर जितेंद्र सिंह से अनुरोध हैं कि ग्राम पंचायत बेरी के आसपास संचालित सभी खंडों व हमीरपुर के अवैध खनन साम्राज्यवाद / यूपी उप खनिज परिहार एक्ट के सैंतालीसवें संशोधन की उपधारा 41-ज का यथोचित अनुपालन पर संजीदा रहें क्योंकि उनके मुताबिक हमीरपुर में अवैध खनन तो है ही नहीं खासकर बेरी ग्राम पंचायत के आसपास क्षेत्र में….!! अलबत्ता किसी भी दिन कैमरे पर अवैध खनन यदि वीडियो फुटेज कैद हुए और डेटलाइन के साथ उनके पास बयान लेने की बारी आई तब वे क्या उत्तर देंगे यह भी तैयारी होनी चाहिए। फिलहाल यह बतलाते चले कि बीते 14 दिसंबर को बाँदा से संचालित आनली न्यूज़ बाँदा मण्डल एडमिन अनवर राजा के जरिये ( संवाददाता के न्यूज़,भास्कर, बुंन्देलखण्ड न्यूज़.कॉम आदि) हमीरपुर के बेरी ग्राम पंचायत के पास फ़ोटो के साथ अवैध खनन की खबर वायरल हुई थी ज़िसको अपडेट करके हमने फेसबुक सोशल साइट पर पोस्ट किया था। उक्त के सभी स्क्रीन शाट उपलब्ध हैं…वहीं सवाल यह भी कि खान निरीक्षक व्हाट्सएप पर वायरल खबर नहीं देख सके लेकिन फेसबुक पोस्ट उन्हें मुखबिरी में नजर आ गई यह भी जांच का विषय हैं। आखिर हमीरपुर खनिज अधिकारी और खान निरीक्षक ने डीएम हमीरपुर को किन खदान संचालकों के इशारे पर गुमराह किया और यह सुनियोजित मुकदमा आईटी एक्ट में लिखाया हैं ? उल्लेखनीय हैं कि 14 दिसंबर को खबर लिखी गई,14 दिसंबर ही जांच हो गई और 14 दिसंबर ही वाद दर्ज किया गया। क्या जांच करने गए अधिकारी और खान निरीक्षक के मोबाइल लोकेशन व सीडीआर सार्वजनिक किए जा सकते है ताकि सबको खबर हो सके कि यह बेरी ग्राम पंचायत के आसपास गए भी थे या नहीं ? क्या वास्तव में हमीरपुर के अंदर अवैध खनन नहीं हो रहा है यदि यह पाया गया तो खान निरीक्षक पर डीएम किस प्रकार की कार्यवाही करेंगे क्योंकि सीबीआई तो चार साल से सरकार के अनुसार जांच कर ही रही हैं !!! उधर देश के चर्चित आईआईटी रिसर्चर व पर्यावरणविद श्री सिद्धार्थ अग्रवाल ने भी बीते 15 दिसंबर को यह ट्वीटर हैंडल पर पोस्ट कर माननीय मुख्यमंत्री यूपी,प्रधानमंत्री, माइन्स मिनिस्ट्री इंडिया व रिवर फोरम को अवगत कराया हैं। अब देखना यह होगा कि खान निरीक्षक किस-किस पर कूटरचित एफआईआर दर्ज करवाते हैं…साथ हमीरपुर का अवैध खनन नदी किन कंदराओं में रहकर कैमरे से छुपता है।

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