,बाँदा/। हमीरपुर जनपद में तीन साल से तैनात हैं खान निरीक्षक जितेंद्र सिंह ‘? आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट बांदा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा व शासन के निर्देश बावजूद द्वितीय श्रेणी अधिकारी एक ही जनपद में तीन साल तक कैसे तैनात है,किन लोगों को इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह के हमीरपुर तैनाती से खनन में लाभ हो रहा है यह जांच होनी चाहिए। सीबीआई cbi को हमीरपुर के इन अधिकारियों से भी पूछताछ करनी चाहिए। इस पोस्ट में हमीरपुर के अधिवक्ता व याचिकाकर्ता विजय द्विवेदी की मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत का स्क्रीन शाट जिसमें शिकायतकर्ता ने खान निरीक्षक जितेंद्र सिंह पर अवैध खनन को संरक्षण देने की बात लिखी हैं। वहीं बीते 6 दिसंबर 2020 को मण्डल आयुक्त बाँदा के पास की लिखित शिकायत एवं आयुक्त महोदय के चित्रकूट मण्डल में चारों जनपदों पर जारी अवैध खनन की जांच अपर आयुक्त प्रशासन को करने के निर्देश हैं। यहां सवाल यह भी हैं कि मेरे द्वारा बीते 14 दिसंबर को खबर पोस्ट की जाती हैं अन्य स्थानीय व बाँदा के व्हाट्सएप प्रेस ग्रुप के हवाले से….इसी दिन डीएम हमीरपुर / खनिज अधिकारी / खान निरीक्षक हमीरपुर बेरी ग्राम पंचायत के आसपास संचालित बालू खदानों की जांच भी करा लेते हैं और ठीक 14 दिसंबर को ही खान निरीक्षक जितेंद्र सिंह की तहरीर पर मेरे ऊपर आईटी एक्ट की धारा 200 व 66 में मुकदमा लिखा जाता हैं। ‘ क्या जांच में नामित अधिकारी व कर्मचारी अपने मोबाइल सीडीआर / जीपीएस कैमरा लोकेशन सार्वजनिक कर सकते है कि यह बेरी ग्राम पंचायत के आसपास खदान पर मौके में जांच करने बीते 14 दिसंबर को गए है ? यह कृत्य पूर्णतः सुनियोजित हैं। ‘ वाइस आफ मीडिया फ्रीडम ‘ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात करते हुए यूपी व देशभर में यूँ ही सामाज़िक कार्यकर्ता / पत्रकारों / जन आंदोलन से जुड़े एक्टिविस्ट पर पूर्वाग्रह में मुकदमा लिखा जा रहा है। गौरतलब यह भी हैं बाँदा समेत हमीरपुर में अवैध खनन की कालिख दबाने को सत्ता के समानांतर माफियाओं का गठजोड़ प्रशासन से है। उधर मुख्यमंत्री ज़ीरो टॉलरेंस भ्रस्टाचार मुक्त सरकार का मुगालता तो कर ही रहे हैं। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक कि मुख्य धारा की पत्रकारिता आज बीजेपी सरकार में अवैध खनन पर तीन वर्ष से आईसीयू में हैं। यही कारण है कि बुंन्देलखण्ड में बालू कारोबार आज समाजवादी सरकार से उच्च सोपान पर अवैध तरीके से संचालित है। विधायक,मंत्री के परिजन तक परोक्ष रूप से बालू खदानों के रस्ते व पट्टेधारक की कतार में शामिल हैं। यही तो रामराज्य की नदियों को बर्बाद करके किसानों के हिस्से का पानी तक उनसे छीन लिया जाना है ताकि आत्महत्या व अकाल,पलायन के नाम पर हजारों करोड़ के विशेष पैकेज ब्यूरोक्रेसी को ब्लैक होल देने का काम करेंगे।

Categorized in : All News उत्तर प्रदेश