आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से आज जंहा देखो जिधर देखो सुनो झोलाछाप डॉक्टरों पर चर्चाएं हो रही है उनपर कार्रवाई की मांग भी की जा रही है ?पर सवाल उठता है कि इन्हे यह सब करने की मान्यता कौन देता है?क्या इस पर बिचार करना जरूरी नहीं प्रतीत होता ? झोलाछाप डॉक्टर आज हर गांव कस्बों शहर में बिराजमान है और इलाज कर रहे हैं इनमें एक भी डिग्री धारक य सरकार से अधिकृत नहीं है और खास बात यह है कि वहां के स्थानीय लोग इस बात से भलीभांति परिचित भी है कि सामने वाला झोलाछाप डॉक्टर है फिर भी वह उनके पास जाना पसंद करते हैं आखिर क्यों ?क्या वजह है कि सबकुछ जानते हुए भी आमजनमानस मध्यम वर्गीय व मजदूर डिग्री धारक के पास न ज इनके पास जाना पसंद करते हैं।कारण क्या है तो एक पहला अंतर मिला जनसेवा भाव का यह आए हुए रोगी की जेब नहीं देखते बल्कि रोगी के यथासामर्थ उपचार करने लगते हैं कोई फीस नहीं दवा का पैसा है तो ठीक नहीं बाद में लेते हैं। और ईश्वर में विश्वास रखते हुए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं की उसके रोगी को ठीक करें यही नहीं रोग समझ न आने पर यह बडे डाक्टरों से जो क्लानिक चलाते हैं उनसे सलाह मशविरा भी करते हैं। जबकी दूसरी तरफ जितने भी डिग्री धारक है जिनमें कुछ सरकार से भारी-भरकम बेतन भी उठाते हैं और अपने निजी क्लानिक खोल कर मारीज देखते हैं पर फ्री मे नही बकायदे भारी भरकम फीस लेते हैं बाद अपना बड़प्पन दिखाने के लिए नाना प्रकार की जांच करवा रोगी को कंगाल कर देते हैं। यही नहीं रोगी पैसा जमा करने में असफल रहा य देर हो गई य रोगी की मृत्यु हो गई तो उसके परिजनों को उसकी डेथ बाड़ी भी नहीं देते जब तक की परिजन पैसे नहीं जमा कर देता। खैर हम आबेस में आ थोड़ा भटक रहे थे फिर आ रहें हैं उसी जगह इन्हें मान्यता कौन देता है तो हमारा मानना है यही डिग्री धारक सरकार से भारी-भरकम वेतन उठाने वाले व एमबीबीएस की डिग्री लेकर क्लीनिक चलाने वाले। लेकिन कैसे तो हम बताते हैं सुनो मरीज इनके पास इलाज के लिए जाता है यह फीस लेकर इलाज करते हैं दवा का पर्चा लिखते हैं उसमें दस दिन लगातार इंजेक्शन लगवाने हेतु दस इंजेक्शन लिखते हैं और कहते हैं यंहा न आना वहीं गांव में ही किसी से लगवालेना आखिर गांव में इंजेक्शन कौन लगाएगा यही झोलाछाप डॉक्टर तो इनके पास जाने के लिए कौन बाध्य कर रहा है ? यही मान्यता प्राप्त तो कार्रवाई अगर हो तो सबसे पहले इन जिन्हें हम दूसरे भगवान का दर्जा देते हैं पर यह भगवान नहीं यमराज, लुटेरे,बने हुए इनकी धन पिपासा इतनी बढ़ गई है कि इनका जामीर तक मर चुका है यह मौत के सौदागर बनगये है । और हम पीछे पड़े हैं झोलाछाप झोलाछाप की रट लगाए हुए।आज शहर छोड़ आखिर ग्रामीण अंचलों में यह डाक्टर क्यो नही जाना चाहते क्योंकी इनके अंदर सेवा भाव नहीं है। और गांवों की ओर गए तो इनके क्लीनिक बंद हो जाएंगे।सो पहले इन्हें चिन्हित करें इन पर कार्रवाई हो झोलाछाप अपने आप नेस्तनाबूद हो जाएंगे पर यह सब होगा हमें ऐसी संभावना दूर दूर तक नजर नहीं आती।

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