आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से पत्रकारो को धमकी देने का चलन हो गया है।यह धमकी तभी मिलती है जब एक पत्रकार की कलम से सच निकल कर सामने आता है और सामने वाले को समाज के सामने वेपर्दा कर देता है। जंहा पर वह अपने आप को पाक साफ दिखाता है। और उसी सफेदी की आड़ में काली करतूतों को अंजाम देने में हिचक महसूस नहीं करता।आज वैसे तो पूरे देश मे अबैध खनन हो रहा है कंही भी नियमों के तहत खनन नहीं हो रहा। हां नियमों को ताक में रखकर खनन का कार्य जरूर हो रहा है।इस बात की गवाही प्रमाण शासन प्रशासन द्वारा समय-समय पर की गई कार्रवाई दर्ज किए गए प्रकरणों से साफ जाहिर होता है। और यह कार्यवाही हुई जब पत्रकारों की कलमें चली इनके कारनामों को उजागर किया गया तब जाकर इनकी नींदें खुली होस आया और कार्रवाई की।अब हम बात करते हैं बांदा जनपद की जंहा पर सीबीआई ने अपना डेरा जमा रखा है और उन अधिकारियों सहित सफेदपोश नेताओं की नींदें हराम है जो इस अबैध बालू खनन में पहले य आज लिप्त थे य हैं सीबीआई के राडार पर है नोटिसें मिल रही है पूछताछ में इनके पसीने छूट रहे हैं सफेद रंग उतर रहा है कालिख लग रही है यह तिलमिला उठे हैं कोई पत्रकारों को कार्यवाही करने की धमकी देता है। तो कलम इन धमकियों से कभी झुकी नहीं हां यह जरूर हुआ कि वह मजबूती से आगे बढ़ती रही और इन सफेदपोशों को समाज के सामने बेपर्दा करती रही है और करती रहेगी।रही बात जनपद बांदा में अबैध खनन की तो आज कोई ऐसी जगह नहीं है जहां खनन के नियमों का पालन किया जा रहा हो। और जो नियम कानून से हटके है वह असंवैधानिक है अबैध है और यही यंहा हो भी रहा है। और जब कोई पत्रकार इसे उजागर करता है उसे कार्रवाई का भय दिखा दबाने की कोशिश की जाती है। दस्यु सम्राट ददुआ ने मंदिर बनवाए गरीब कन्याओं की सादी करवाई ऐसा लोग कहते थे।पर क्या इन सब कार्यो से उसके द्वारा किए गए डकैती अपहरण मार्डर जैसे बुरे कर्म के पाप धुल गये नहीं उसी तरह नदियों को जिनमें पतित पावन गंगा यमुना सरस्वती नर्मदा जिन्हें हम मां कहकर पुकारते हैं उसी तरह अन्य नदियों को भी मां कहकर पुकारते हैं नमन करते हैं पर उसके सीने को जिससे हमें जीवन मिलता है बेदर्दी से चीरकर अबैध खनन करने में संकोच नहीं करते। और जब कलम इस सबको उजागर करती है तो उसे कार्रवाई का भय दिखाकर चुप कराने की नाकाम कोशिश की जाती है।आज वर्तमान य भूत जनप्रतिनिधियों में इतना नैतिक साहस है कि खुलकर सामने आए और बताएं कि इस अबैध बालू खनन में किन किन जनप्रतिनिधियों की संलिप्तता है य पहले थी अगर नहीं तो पत्रकारों को धमकाने के बजाय सीबीआई के जवाबों का सामना करे यह पब्लिक है सब जानती है।
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