आत्माराम त्रिपाठी की✍🏻से आज जिस तेजी से अबाधिगति से नशा ने हंसते खेलते हुए जीवन को हमारी संस्कृति को अपनी आगोश में ले लिया है वह बेहद चिंताजनक है। हमने देखा अनुभव किया कि आज से चार दसक पहले ग्रामीण अंचलों में भांग ठंडई का प्रचलन था जो स्वंय के साथ घर आए हुए अतिथि के सामने भी संम्मान के साथ रखी जाती रही। लेकिन समय बदलता गया बीड़ी, सिगरेट ,गांजा,चरस, अफीम, फिर शराब सामने आ गया जिसे लोग खुलकर तो कुछ पर्दे में आकर उपयोग करने लगे।आज इस नशा ने आम जनमानस को अपने गिरफ्त में इस कदर जकड़ लिया है की कोई फक्सन, पार्टी इन नशीले पदार्थों के बिना अधूरी है।इनकी उपस्थिति फैसन में बदल गई है।लोग इसे अपनी शान समझते हैं जो नशे की बढ़ रही निरंतर प्रवृत्ति की ओर इशारा कर जनमानस को लगातार सचेत कर रही है। और समाज नशा रूपी महामारी का परित्याग करने के बजाए उसके क्रूर पंजों के मकड़जाल में अपनी सिसकती जिंदगी लिए फसता ही जा रहा है।इस नशा के आगोश में हमारा हमारे देश के भविष्य नवयुवक चपेट में आ गए हैं और हम चिंतातुर होने के बजाय निश्चिंत है।शहर से लेकर ग्रामीण आंचल तक इस बेलगाम नशा ने अपने पैर पसार लिए हैं अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया है घर के घर बर्बाद हो रहें हैं इस नशा ने ही कई लोगों को असमय काल के गाल में पहुंचा दिया पर इतनी जिंदगियों को निगलने के बाद भी इसकी बढ़ रही गतिविधियों पर कोई अंकुश नहीं लगा पाया।यह मदमस्त हाथी की तरह अपनी चाल से चला जा रहा है । सभ्यता, संस्कृति को रौंदता हुआ। किसी को भी तो नहीं छोड़ रहा इसने सभी को अपना मुरीद बना लिया है एक अशिक्षित भोले-भाले वर्ग से लेकर शिक्षित तबके को बेकार बेरोजगार से कामकाजी, अधिकारी, कर्मचारी, उद्योगपति, से लेकर नेता अभिनेता तक सभी तो इसके गुलाम हो गए हैं गुलाम शब्द अगर आप सबको बुरा लग रहा हो तो वापस लेते हुए सुधार कर रहा हूं सभी इस नशा की सत्ता को स्वीकार कर रहे हैं।तभी तो अपने अंदर से नशा की इस बढ़ती हुई प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने में नाकामयाब हो रहें हैं।आज इस नशा से कैंसर, हृदय रोग,स्ट्रोक, पैरों में वैस्कुलर रोग शुगर और न जाने कितनी गंभीर बिमारियां इन नशीले पदार्थों के सेवन से अपना डेरा जमा लेती है जो जीवन को उस मोड़ पर पहुंचा देती है जंहा जिंदगी मौत से भी बदतर हो जाती है। ऐसा नहीं है कि इस नशा के बिरोध में कोई कार्य नहीं हो रहा।की समाजसेवी संस्थाओं ने अलख जगाने का कार्य कर रही है पर क्या वह काफी है अब समय आ गया है कि इसके लिए अपने आपको बदलना होगा और मजबूती के साथ इस नशा के बिरोध में खड़ा होना होगा नहीं पतन सुनिश्चित है।
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