आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट बांदा। साहित्य पाठकों का केवल मनोरंजन ही नहीं करता बल्कि दिशा भी देता है। वह पाठक को अपने समय से जोड़ते हुए देश एवं समाज के लिए कुछ रचने-गढ़ने को प्रेरित करता है। साहित्य में संवेदना समाहित होती है। प्रमोद दीक्षित मलय एक संवेदनशील शिक्षक एवं साहित्यकार हैं। आपकी रचनाओं में लोकजीवन के सहज चित्र दिखाई पड़ते हैं और संवेदना का स्वर सुनाई देता है। उक्त विचार बीआरसी महुआ के सभागार में प्रशिक्षण के दौरान शिक्षक प्रमोद दीक्षित मलय द्वारा संपादित काव्य संग्रह ‘हाशिए पर धूप’ की भेंट-प्रति प्राप्त करने के पश्चात खंड शिक्षा अधिकारी महुआ श्री अंबिका प्रसाद ओझा ने शिक्षक- शिक्षिकाओं के सम्मुख व्यक्त किए। आगे बीईओ ओझा जी ने कहा कि प्रमोद दीक्षित एक समर्थ रचनाकार हैं। मलय की रचनाओं में जीवन का खरा सच संवाद करता प्रकट होता है। एक शिक्षक के रूप में भी आप शिक्षा की बेहतरी के लिए समुदाय के साथ मिलकर विद्यालय को संवार रहे हैं। आपके शैक्षिक लेख जमीनी अनुभवों से उपजते हैं। आपकी लेखन शैली पाठक को मोह लेती है। प्रस्तुत काव्य संग्रह में उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा में कार्यरत 28 शिक्षक- शिक्षिकाओं की इंद्रधनुषी रचनाएं शामिल हैं। यह अपनी तरह का पहला और सराहनीय प्रयास है। शिक्षक महेंद्र गुप्ता ने कहा कि प्रमोद मलय सर लोक के रचनाकार हैं। आपकी रचनाओं में आम आदमी के जीवन के सुख-दुख दिखाई देते हैं। ‘भूख’ कविता इसी का उदाहरण है। एआरपी विनोद पटेल ने शिक्षक कवि मलय को जिले का गौरव बताया। नीलम, राकेश, विनीता, राजकुमारी, जयकांत ने बधाई देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।

Tagged in : #birds#environment #CMUP

Categorized in : उत्तर प्रदेश देश