आत्माराम त्रिपाठी की ✍🏻से अबैध बालू खनन पे शासन-प्रशासन अंकुश लगाने में नाकामयाब साबित हो रहा है जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह की भीष्म प्रतिज्ञा भी इनके राह का रोडा बनने में नकाम रही। जबकि बालू खनन माफियाओं द्वारा अबैध तरीके से नदियों व उसके किनारे के टीलों से अबैध खनन कर बालू निकालने का कार्य जारी है और इसके प्रमाण है इन अबैध खनन में हो रही घटनाओं का घटित होना।जो इस बात की चिल्ला चिल्ला कर गवाही दे रही है कि बांदा जनपद के हर हिस्से में अबैध बालू खनन कार्य माफियाओं द्वारा बेखौफ होकर कराया जा रहा है।भले ही इस कार्य में किसी मजदूर की जान जाती है तो चली जाए। इसके पहले भी पाडादेव में टीला धंसने से कयी मजदूर घायल हुए और कुछ कालकलवित हुए दोषियों पर कार्रवाई हुई पर कब जब मजदूर डेथबाडी को लेकर जाम लगाया। इसी तरह पथरी गांव में घटना घटित हुई पर कार्रवाई उस समय हुई जब म्रतक के परिजन आन्दोलनरत हुए तब जाकर इन रसूखदारों के बिरूध्द मुकादमा दर्ज हुआ।पर यह लोग जेल कब जायेगें सजा कब मिलेगी यह तो समय के गर्भ में छिपा हुआ है। इस अबैध खनन को सरपरस्ती किसकी है इसमें भी दो-फाड़ है कुछ का कहना है कि यह खादी करवा रही और खादी के आगे शासन प्रशासन नतमस्तक है तो कुछ का कहना है कि यह सब जिला प्रशासन एवं स्थानिय प्रशासन की सरपरस्ती पे चल रहा है।तभी तो इन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है और जो हो रही है वह मात्र दिखावा है।य फिर उन्ही खादीवर्दी धारियों के इसारे पर होती है।य मामला सडकपर उतर आने के बाद। आखिर यही कार्यवाही घटना घटित होने के पहले ही इन अबैध बालू खनन माफियाओं पर क्यों नही की जाती जिससे इन अप्रिय स्थितियों से बचा जा सके।वह कौन सा धर्म संकट है कौन सी मजबूरी है जो शासन प्रशासन को कार्यवाही करने की जगह पंगु बना देती है लाचार बेबस कर देती है। जो इन्हें बदनामी के शिवा कुछ भी तो नहीं प्रदान करती। और अगर करती भी है तो वह भी असंभव नहीं है और उसका परिणाम भी एंटीकरप्शन टीम ने उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के आर एम को गिरफ्तार कर सबको दिखा दिया कि एक अधिकारी किस तरह रिस्वत का भूखा है और यही हाल इस अबैध खनन में भी है पर देर है अंधेर नहीं।क्योंकी इस खेल पे जो इस सरकार के पहले लिप्त थे उनपर कार्रवाई हुई और जनता ने देखा सो ऐसी ही कार्यवाही आगे भी इसकी संभावना तो लगभग नजर ही आ रही है पर कब इसका अंदाजा अभी जरूर नहीं है।अब बात करते हैं पथरी गांव की जंहा एक मजदूर की मौत हो जाती है परिजन खनन संचालक को इसका जिम्मेदार ठहराते हैं वहीं सत्ताधारी पार्टी के एक बिधायक भी मैदान में उतर आते हैं और मामले को राजनैतिक रंग देते हुए पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करवा देते हैं। इस घटनाक्रम में आमजनमानस की अलग अलग राय है कुछ का कहना है कि म्रतक बिमारी से मरा तो कुछ का कहना है कि इस घटना के अबैध बालू खनन माफिया जिम्मेदार है तो कुछ का कहना है कि यह सब राजनीति है हो रही है। खैर हमें क्या करना है मुकादमा दर्ज है पुलिस जांच में जुटी है देर सबेर सत्य सामने आ ही जायेगा।पर यह भी कटुसत्य है कि जनपद में ओवरलोडिंग अबैध बालू खनन कार्य जारी है और शासन प्रशासन सबकुछ जानते हुए भी बेबस है।
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