आज चौथी वाहिनी सी.ए.एफ. माना रायपुर के प्रांगण में 21 अक्टूबर 2020 पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर पुलिस के शहीद जवानों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों से भी मुलाकात कर ढांढस बंधाया।

पुलिस या विभिन्न सुरक्षा बलों में तैनात जवान स्वयं की जान की परवाह किए बिना जनता और देश की हिफाजत के लिए समर्पित होते हैं। उनके जज्बे से ही समाज में उनका सम्मान सुनिश्चित होता है। इसलिए उनका कार्य रोजगार के अन्य अवसरों से भिन्न एवं अधिक प्रतिष्ठित होता है।

मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने बोला”पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मैं सभी सुरक्षा बलों में तैनात जवानों के प्रति अपनी सहभागिता, शहीदों के प्रति कृतज्ञता और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं”।

यह अवसर एक ओर जहां देश सेवा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने के सर्वोच्च बलिदान पर गौरवान्वित होने का है, वहीं अपने बहादुर साथियों से बिछुड़ने की याद में भावुक होने का भी है।

वास्तव में जोखिमपूर्ण कर्त्तव्यों का निर्वहन करते हुए होने वाली शहादतें व्यापक समाज के लिए किसी व्यक्ति का अमिट और सर्वोच्च योगदान होता है। इस योगदान के प्रति आदर का भाव रखना, व्यक्त करना तथा शहीद परिवारों की देख-रेख सिर्फ शासन का ही नहीं बल्कि व्यापक समाज का कर्त्तव्य है।

छत्तीसगढ़ में भी नक्सलवाद प्रभावित अंचलों में सीआरपीएफ या अन्य सुरक्षा बल के जवानों का त्याग, समर्पण और शहादत किसी से कम नहीं है।

हमारी सरकार ने सुरक्षा बलों के कार्यों को सर्वोच्च महत्ता देते हुए उनके लिए राहत और कल्याण के कदम सर्वोच्च प्राथमिकता से उठाए हैं लेकिन मेरा यह मानना है कि समाज की व्यापक सहभागिता के बिना वीर जवानों के कर्त्तव्य निर्वहन का समुचित सम्मान संभव नहीं है।

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